पॉवर कार्पोरेशन के पूर्व एमडी एपी मिश्रा को मिली जमानत:50 हजार कर्मचारियों के पीएफ का पैसा निजी कंपनियों में लगा दिया था मिश्रा ने, दो साल से थे जेल में

लखनऊ5 महीने पहले
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2 साल पहले हुए पीएफ घोटाले में मिश्रा की गिरफ्तारी हुई थी। तब से वे जेल में ही थे। - Dainik Bhaskar
2 साल पहले हुए पीएफ घोटाले में मिश्रा की गिरफ्तारी हुई थी। तब से वे जेल में ही थे।

पीएफ घोटाले में फंसे पावर कॉरपोरेशन के पूर्व एमडी एपी मिश्रा को शनिवार जमानत मिल गई। मिश्रा पिछले करीब दो साल से पीएफ घोटाले में मुख्य आरोपी के तौर पर जेल में बंद थे। कई बार उनकी जमानत खारिज भी हो चुकी थी। सपा सरकार के सबसे नजदीकी टेक्नोक्रेट में शामिल एपी मिश्रा करीब पांच साल तक एमडी के पद पर तैनात थे। उस दौरान उनका रसूख ऐसा था कि पावर कॉरपोरेशन के एमडी के साथ उनको मध्यांचल और पूर्वांचल एमडी का प्रभार भी मिला हुआ था। वह मुलायम और अखिलेश दोनों के करीबी थे।

नवंबर 2019 में यह घोटाला उजागर हुआ था। बिजली कर्मचारियों के भविष्य निधि के 2,268 करोड़ रुपये बिजली विभाग ने जिस डीएचएफएल में लगाया था। इसकी जांच ईडी समेत कई एजेंसियां कर रही थी। एपी मिश्रा के बाद कोई भी इंजीनियर एमडी नहीं बन पाया है।

अफसरों ने बोर्ड बैठक में लिया था फैसला
21 अप्रैल, 2014 को उत्तर प्रदेश स्टेट पावर सेक्टर एम्पलाइज ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में कर्मचारियों के जीपीएफ और सीपीएफ का पैसा ज्यादा ब्याज देने वाले फाइनेंशियल कॉरपोरेशन में लगाने का फैसला हुआ है। उस समय एमडी एपी मिश्रा थे। इसके बाद मार्च, 2017 से लेकर दिसंबर, 2018 तक तत्कालीन सचिव, ट्रस्ट पीके गुप्ता और निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी की मंजूरी पर दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) में निवेश किया जाता रहा। जबकि इन दोनों अधिकारियों को पता था कि डीएचएफएल वाणिज्यिक बैंक की श्रेणी में नहीं आता है। इसमें एपी मिश्रा भी दोषी पाए गए थे।

गुमनाम शिकायत से मामला खुला था

मामला 10 जुलाई 2019 को एक गुमनाम शिकायत मिलने के बाद सामने आया। कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आलोक कुमार ने 12 जुलाई को मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की थी। 29 अगस्त को समिति ने जांच रिपोर्ट दी तो खुलासा हुआ कि कर्मचारियों के भविष्य निधि में करीब 2,268 करोड़ की गड़बड़ी की गई है। स्टेट पावर सेक्टर एंप्लॉयीज ट्रस्ट के सचिव ने अनियमितता करते हुए ट्रस्ट की 99 प्रतिशत से ज्यादा धनराशि का निवेश केवल तीन हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों में कर रखा था, जिसमें 65 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा डीएचएफएल में था। खास बात है कि गैर सरकारी कंपनी में निवेश करने के संबंध में तत्कालीन निदेशक वित्त व सचिव ट्रस्ट ने अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक का अनुमोदन नहीं लिया। 10 अक्टूबर को एम्पलाइज ट्रस्ट के सचिव पीके गुप्ता को सस्पेंड कर दिया गया था।

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