प्रियंका के आगे हमेशा बैकफुट पर दिखी यूपी सरकार:सोनभद्र से लेकर हाथरस और अब लखीमपुर, प्रियंका के कारण सरकार हरकत में आई; कहीं अधिकारी हटे तो कहीं आरोपियों की गिरफ्तारी

लखनऊ11 दिन पहलेलेखक: प्रवीण राय
प्रियंका गांधी के चलते ही प्रदेश सरकार ने मंत्री के बेटे को अरेस्ट करने की पहल शुरू कर दी है।

यूपी में कांग्रेस की सियासी जमीन पथरीली हो चुकी है। कांग्रेस महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा उसे फिर से हरा-भरा करने की कोशिश में जुटी हैं। बीते रविवार को लखीमपुर में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों की गाड़ी से कुचलकर हत्या किए जाने के कुछ ही घंटे बाद प्रियंका दिल्ली से लखनऊ पहुंच गईं।

हालांकि, प्रियंका को सीतापुर में हिरासत में ले लिया गया और PAC गेस्ट हाउस में रखा गया। प्रियंका के पास लखनऊ वापस जाने का विकल्प खुला रखा गया था, लेकिन प्रियंका वहीं जमी रहीं और अड़ी रहीं कि वह लखीमपुर जाएंगी। वह तब तक वहां रहीं, जब तक कि सरकार ने उनके लखीमपुर जाने का रास्ता साफ नहीं कर दिया।

विपक्षी दलों को सड़क पर आने को किया मजबूर

यह प्रियंकाने जब लखीमपुर जाने की घोषणा की तो एक-एक कर सभी विपक्षी दलों को भी वहां जाने की बात कहनी पड़ी। सरकार भी हरकत में आई औ वह उन्हें रोकने में जुट गई। इस पूरे प्रकरण में सरकार को प्रियंका के सामने जहां बैकफुट पर आना पड़ा, वहीं विपक्ष को भी उसी रास्ते चलना पड़ा, जो रास्ता प्रियंका ने दिखाया।

प्रियंका के चलते ही प्रदेश सरकार ने मंत्री के बेटे को अरेस्ट करने की पहल शुरू कर दी है। उनकी ही वजह से प्रमुख विपक्षी दल सपा के मुखिया अखिलेश यादव सालों बाद किसी आंदोलन में सड़क पर उतरने को विवश हुए हैं। अखिलेश को गिरफ्तारी देने से लेकर पीड़ित परिवार से मिलने तक जाना पड़ा है।

पहले भी प्रियंका के चलते सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े

चुनार गेस्ट हाउस में धरने पर बैठीं प्रियंका, पीड़ित परिवार खुद आया मिलने

जुलाई 2019 में सोनभद्र में जमीनी विवाद में 10 लोगों की हत्या कर दी गई थी। शासन के आला अधिकारी मामले को दबाने में जुट गए। लेकिन, प्रियंका गांधी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंच गईं। यहां भी शासन ने उनको मौके पर जाने से रोका। यहां तक कि चुनार गेस्ट हाउस में उनको अरेस्ट कर लिया गया। लेकिन वह नहीं मानी। मौके पर ही धरने पर बैठ गईं। आरोप लगाया गया कि स्थानीय प्रशासन ने गेस्ट हाउस की बत्ती तक कटवा दी।

प्रियंका से जमानत के लिए 50 हजार रुपए का मुचलका भरने को कहा गया, लेकिन उन्होंने कोई शर्त नहीं मानी। यहां तक कि ट्वीटर के जरिए लगातार प्रदेश सरकार और शासन को कठघरे में खड़ा कर दिया। इसके बाद डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उस समय पीड़ित परिवार प्रियंका से मिलने के लिए खुद आया था। इस मामले में डीएम को वहां से हटाया गया। जांच बैठी, जिसमें सामने आया कि करोड़ों की जमीन का हेर-फेर हुआ था।

गेस्ट हाउस में ही धरने पर बैठ गईं प्रियंका।
गेस्ट हाउस में ही धरने पर बैठ गईं प्रियंका।

पीड़ित परिवार के लिए प्रशासन से भिड़ गईं, कार्यकर्ताओं को भी बचाया

हाथरस में पीड़िता तक पहुंचने के लिए प्रियंका प्रशासन से भी भिड़ गईं। जिसके बाद प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। आते हुए पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठियां चलाईं तो प्रियंका खुद आगे आ गईं और पुलिस की लाठी पकड़ ली। अक्टूबर 2020 में हाथरस में एक दलित युवती के साथ गैंगरेप और हत्या का मामला सामने आया था।

इस मामले को प्रशासन ने दबाने की पूरी कोशिश की थी। यहां तक पीड़िता का शव रात में ही जला दिया गया था। पीड़िता के परिजनों से मुलाकात के दौरान प्रियंका के गले लगकर रोतीं पीड़िता की मां की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इस पूरे मामले में सरकार को प्रियंका की वजह से पीछे हटना पड़ा था।

एक हजार बसों को पैदल जा रहे मजदूरों के लिए लाकर खड़ा कर दिया

कोविड के पहले फेज में रोजी- रोटी के संकट की वजह से मजदूर पैदल ही अपने घरों के लिए निकल पड़े। इसमें यूपी के लाखों मजदूर पैदल चल रहे थे। मामले की जानकारी प्रियंका को हुई तो उन्होंने सरकार के सामने 1000 बसों को शुरू करने की पहल की। यहां तक की राजस्थान से लाकर करीब 1000 बस आगरा के पास सीमा पर खड़ी कर दीं। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर प्रदेश सरकार को काफी घेरा गया। ट्वीटर से लेकर फेसबुक पर प्रियंका को बड़ा समर्थन मिलने लगा।

ट्वीटर पर सीएम योगी और प्रियंका के बीच आरोप-प्रत्यारोप

ट्वीटर पर सीएम योगी और प्रियंका के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला। इस मामले में प्रियंका के निजी सचिव व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू पर भी मुकदमा दर्ज करा दिया गया। मामले में अजय लल्लू को 40 दिन जेल में रहना पड़ा था। हालांकि, इस विवाद के बाद प्रदेश सरकार ने उप्र परिवहन निगम की बसों को फ्री में चलाया।

यहां तक कि ट्रेन से उतरने वाले लोगों को रोडवेज की बसों ने उनके गृह जनपद तक पहुंचाया। इस मामले में प्रियंका की ही पहल थी कि प्रदेश सरकार को यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि बाद में यूपी सरकार को इस कदम के लिए काफी तारीफ भी मिली।

बसों की सूची तक यूपी सरकार को भेज दी गई थी।
बसों की सूची तक यूपी सरकार को भेज दी गई थी।

उन्नाव केस में सबसे पहले परिवार के पास पहुंची

दिसंबर 2019 में रेप पीड़ित लड़की को आरोपियों ने आग के हवाले कर दिया था। 90 फीसदी तक जलने वाली लड़की ने इलाज के दौरान दिल्ली में दम तोड़ दिया। इस मामले में भी प्रियंका गांधी सबसे पहले पीड़ित परिवार के पास पहुंची थीं। इस मामले में उन्होंने प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा था, 'पीड़िता के पूरे परिवार को पिछले एक साल से लगातार परेशान किया जा रहा था। लेकिन दोषियों को बचाने में पुलिस प्रशासन लगा था।

प्रियंका ने लगाया था दोषियों का भाजपा से कनेक्शन होने का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया था कि दोषियों का भाजपा से कनेक्शन है। इसलिए वे अभी तक बचे हुए हैं। उन्होंने सीएम पर भी हमला बोलते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि राज्य में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन उन्होंने राज्य को क्या बना दिया। इस घटना के बाद सपा हरकत में आई थी और सरकार ने भी दोषियों की गिरफ्तारी को लेकर कार्रवाई तेज कर दी।

उन्नाव में पीड़िता के परिवार से मिलीं प्रियंका तो अन्य विपक्षी दल हरकत में आए।
उन्नाव में पीड़िता के परिवार से मिलीं प्रियंका तो अन्य विपक्षी दल हरकत में आए।
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