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जेल में बंद माफियाओं ने सक्रिय किया नेटवर्क:चुनाव से पहले रंगदारी के धंधे को चमकाने के लिए शुरू हुआ गैंगवार, जड़ें तलाशने में जुटी पुलिस

लखनऊ9 दिन पहले
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राजधानी लखनऊ के कुख्यात अपराधियों ने जेल के भीतर से ही अपना नेटवर्क सक्रिय करना शुरू कर दिया है। शनिवार रात हुई हिस्ट्रीशीटर अन्नू अनवर की हत्या इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। मृतक अन्नू जेल में बंद सीरियल किलर सलीम, शोहरत, रुस्तम गैंग का खास गुर्गा था, तो वहीं हत्यारा शारिक जेल में रहकर हत्या, लूट करवाने का मास्टरमाइंड अकील अंसारी का शूटर है।

सआदतगंज के कैम्पवेल रोड पर शनिवार रात सरेराह हुई हत्या गैंगवार की शुरुआत माना जा रहा गया। खुद पुलिस भी कयास लगा रही है कि विधानसभा चुनाव से पहले रंगदारी के धंधे में अपनी-अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए अकील और सलीम गैंग ने पुराने लखनऊ के अपने नेटवर्क को सक्रिय कर दिया है। अन्नू की हत्या करने वाला शारिक हरदोई जेल में बंद अकील अंसारी के रंगदारी और जमीन के धंधे को संभाल रहा है। दूसरी ओर मृतक अन्नू अकील के विरोधी खेमे सीरियल किलर सलीम, शोहराब, रुस्तम के इशारे पर मलिहाबाद, ठाकुरगंज, बालागंज, दुबग्गा, पारा समेत लखनऊ आउटर के विवादित जमीनों पर अपना झंडा गाड़ रहा था। अन्नू सीरियल किलर भाइयों के इशारे पर बड़े व्यापारियों से हर महीने रंगदारी वसूल कर उनके पास तिहाड़ जेल तक पहुचता था।

सीरियल किलर को टक्कर देने के लिए खड़ा किया खुद का गैंग

लखनऊ में लंबे समय से अवैध वसूली और प्रॉपर्टी के कारोबार में दबदबा रखने वाले सीरियल किलर भाइयों के लिए ही अकील अंसारी भी काम करता था। लेकिन इस गैंग ने पूर्व पार्षद पप्पू पांडेय की हत्या की जिसके बाद रुपयों के लेनदेन को लेकर अकील का उनसे मनमुटाव हो गया। इसके बाद अकील ने गुजरात मे एक बड़ी लूट को अंजाम दिया और मोटा रकम हाथ रखने के बाद सलीम गैंग से किनारा करके खुद का गैंग खड़ा किया। अपने नाम का खौफ पैदा करने के लिए पांच साल पहले उसने व्यापारी श्रवण साहू के बेटे आयुष की ठाकुरगंज में गोली मारकर हत्या कर दी। बेटे की हत्या की पैरवी कर रहे श्रवण साहू को भी 2017 में जेल में रहते हुए मरवा दिया था।

राजनीतिक संरक्षण के लिए चुनाव में करना होता है फंडिंग

सलीम और अकील गैंग का दबदबा और उनके नाम के खौफ को कैश करवाने के लिए इन्हें अपने-अपने पाले में लाने के लिए नेताओ में भी होड़ लगने लगी। प्रशासन से बचे रहने के लिए दिनों गैंग भी राजनीतिक आकाओं का संरक्षण लेते हैं। लेकिन बदले में उन्हें मोटी रकम देनी पड़ती है। रंगदारी की कमाई का एक हिस्सा नेताओं तक पहुचना पड़ता है, और चुनाव से पहले मोटा फंड भी देना होता है। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले अपने नाम के खौफ बढ़ाने के लिए अकील और सलीम गैंग आमने सामने आ रहे हैं।

चश्मदीद दोस्त की तहरीर पर दर्ज हुआ केस, दो की तलाश

सआदतगंज इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव ने बताया कि घटना के समय अन्नू के साथ मौजूद उसके दोस्त सलीम की तहरीर पर शारिक, अली व एक अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। शारिक को घटना के बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया था। बाकी दो की तलाश की जा रही है। सलीम ने बताया कि वह और बबलू अंसारी अन्नू के साथ दुकान पर खड़े थे। तभी अली आया और उन्हें देखकर चला गया। थोड़ी देर बाद अली के साथ शारिक व एक अन्य लड़का पहुँचे। कोई कुछ समझ पाता इसके उनके शारिक ने अन्नू के सिर में तमंचा सटाकर गोली मार दी। पुलिस का कहना है कि शारिक ने अपने बयान में बताया है कि अन्नू का भाई उसकी बहन से छेड़छाड़ करता था जिसके विरोध में उसने गोली मारी।

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