पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

CBI का इंजीनियरों पर शिकंजा, पर IAS अफसरों पर मेहरबानी:रिवर फ्रंट घोटाले में 3 पूर्व मुख्य सचिवों का है सीधा कनेक्शन, प्रमुख सचिव रहे सरन और चंद्रा भी जानते हैं गड़बड़ी

लखनऊ24 दिन पहलेलेखक: सुनील कुमार मिश्रा
  • कॉपी लिंक

गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई ने इंजीनियर्स और ठेकेदारों पर तो कार्रवाई शुरू कर दी। लेकिन जिम्मेदार IAS अधिकारियों पर मेहरबान दिख रही है। अब तक सीबीआई ने उन अफसरों से भी पूछताछ नहीं की है, जिनका इस प्रोजेक्ट से सीधा नाता था। सीधे तौर पर जुड़े 6 आईएएस अफसरों में 3 पूर्व मुख्य सचिव हैं। दो प्रमुख सचिव व एक लखनऊ के तत्कालीन डीएम।

अखिलेश सरकार में शुरू हुए गोमती रिवरफ्रंट परियोजना की नींव तत्कालीन प्रमुख सचिव सिंचाई दीपक सिंघल की देखरेख में डाली गई थी। इसके बाद प्रोजेक्ट की निगरानी से लेकर वित्तीय अनियमितताओं तक आधा दर्जन से ज्यादा IAS इसमे शामिल रहे। इन अधिकारियों ने आंख बंद करके इंजीनियरों और ठेकेदारों को लूट-खसोट करने की खुली छूट दे दी लेकिन खुद अभी तक किसी जांच के दायरे में नही आए।

जानिए कौन-कौन अफसर रहे हैं गोमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के भागीदार...

दीपक सिंघल के करीबी थे इंजीनियर रुप सिंह यादव
गोमती रिवरफ्रंट का काम तत्कालीन प्रमुख सचिव सिंचाई विभाग दीपक सिंघल के देखरेख में शुरू हुआ था। शुरुआती परियोजना 1656 करोड़ की बनाई गई थी। इसमें 1433 करोड़ जारी हुए और 1427 करोड़ खर्च होने तक 90 फीसदी काम पूरा दिखाया गया। कुछ महीनों बाद दीपक सिंघल मुख्य सचिव बन गए थे, तब इनकी जिम्मेदारी और बढ़ गयी थी। मामले का मुख्य आरोपी तत्कालीन अधीक्षण अभियंता रूप सिंह यादव इन्हीं का करीबी था।

आलोक रंजन प्रोजेक्ट हेड थे, दागी कंपनियों को दिए ठेके
आलोक रंजन प्रोजेक्ट शुरू होने के समय सूबे के मुख्य सचिव थे और प्रॉजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप के हेड भी। बाद में इन्हें मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया गया और परियोजना की समीक्षा की जिम्मेदारी दी थी। आलोक रंजन ही अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। गैर जरूरी उपकरणों की खरीद, दागी कम्पनियों को ठेकों की स्वीकृति और बजट रिवाइज इन्हीं के निर्देशन में होता रहा।

राहुल भटनागर को नहीं दिखी कोई गड़बड़ी
परियोजना शुरू होने के समय राहुल भटनागर वित्त विभाग के प्रमुख सचिव थे। परियोजना की लागत राहुल के ही समय में बढ़ना शुरू हुई थी। लेकिन उन्होंने न रोक लगाई न आपत्ति जताई। मुख्य सचिव होने के बाद वह भी परियोजना की समीक्षा में लगे रहे, लेकिन उन्हें कोई अनियमितता नहीं दिखी।

संजीव सरन ने पर्यावरण नियमों पर आपत्ति नहीं की
संजीव सरन पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव थे। परियोजना निर्माण के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की NOC के बिना ही नदी के किनारे दर्जनों क्रशर चल रहे थे। नदी को संकरा किया जा रहा था। दोनों तरफ 14 मीटर की दीवार खड़ी की जा रही थी। कंक्रीट का काम होता रहा। इसके बावजूद उन्होंने पर्यावरण नियमों के लिहाज से आपत्ति नहीं दर्ज करवाई।

सुरेश चंद्रा को सिंचाई की बागडोर मिली लेकिन चुप्पी साधे रहे
दीपक सिंघल के बाद मुख्य सचिव बनने के बाद सिंचाई विभाग की बागडोर सुरेश चंद्रा के हाथ मे आई। इन्हें सिंचाई विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया। लम्बे समय तक यह कुर्सी पर बैठकर गोमती के सुंदरीकरण के नाम पर मची लूट को देखते रहे।

राजशेखर रोज देखने जाते थे लेक फ्रंट का काम
गोमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट के समय राजशेखर लखनऊ के डीएम थे, अब कानपुर मंडल के कमिश्नर हैं। यह हर रोज सुबह शाम काम की गुणवत्ता चेक करने और उसकी प्रगति देखने जाते थे। एक भी दिन इनकी नजर में कोई अनियमितता सामने नही आई। इन्हें पूर्व सीएम अखिलेश यादव का करीबी बताया जाता है।

खबरें और भी हैं...