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सस्ते नहीं होंगे पेट्रोल-डीजल:काउंसिल की मीटिंग में 6 राज्यों ने डीजल-पेट्रोल को GST में लाने का विरोध किया, बायो डीजल पर GST​​​​​​​ घटकर 5% हुआ

लखनऊएक महीने पहले
GST काउंसिल की बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।

लखनऊ में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में GST (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) काउंसिल की 45वीं बैठक खत्म हो गई है। बैठक में पेट्रोल-डीजल को GST में शामिल करने को लेकर चर्चा हुई। छह राज्यों ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का विरोध किया।

सीतारमण ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि पेट्रोल और डीजल को GST में शामिल करने के मुद्दे पर चर्चा हुई। कई राज्यों ने कहा कि वे पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को GST में नहीं लाना चाहते हैं।

सीतारमण ने कहा कि यह मुद्दा केरल हाईकोर्ट के ऑर्डर पर बैठक के एजेंडे में आया। काउंसिल ने माना कि यह पेट्रोलियम उत्पादों को GST में लाने का सही समय नहीं है। इसकी जानकारी केरल हाईकोर्ट को भी दी जाएगी। केरल हाईकोर्ट ने कुछ दिनों पहले कहा था कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST के दायरे में लाने पर विचार करना चाहिए।

कैंसर मेडिसिन पर GST 12% से घटाकर 5% की गई
बैठक के बाद देर शाम वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। उन्होंने बताया कि GST काउंसिल की मीटिंग में शुक्रवार को कई बड़े फैसले लिए गए। कैंसर मेडिसिन पर GST 12% से घटाकर 5% की गई। रेमडेसिविर और हेपरिन पर 5% GST लगेगा। कोरोना की दवाइयों पर टैक्स छूट 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गई।

16 करोड़ की जीवन रक्षक दवाइयां हुईं टैक्स फ्री
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कुछ जीवन रक्षक दवाएं जो बहुत महंगी हैं, जो बच्चों के लिए ज्यादा इस्तेमाल की जाती हैं। ये कोरोना से संबंधित नहीं हैं। ऐसी ड्रग्स को GST से छूट दी गई है। इसपर अब GST नहीं लगेगा। जोलगेन्स्मा और विल्टेप्सो ऐसी ही 2 महत्वपूर्ण ड्रग्स हैं।

GST काउंसिल में लिए गए बड़े फैसले..

  • कोरोना महामारी की दवाओं एम्फोटेरिसिन-बी और टोसीलिजुमैब पर GST नहीं लगेगा। इन दवाओं पर GST छूट 31 दिसंबर, 2021 तक बढ़ा दी गई है। मेडिकल इक्विपमेंट्स पर यह छूट लागू नहीं होगी। रेमडेसिविर और हेपरिन पर 5% GST लगेगा।
  • मस्कुलर एट्रॉफी के इलाज में काम आने वाली दवाओं जोलगेन्स्मा और विल्टेप्सो को भी GST में छूट देने का फैसला किया है। इनकी कीमत करीब 16 करोड़ रुपए है। यह छूट पर्सनल यूज के लिए आयात की जाने वाली दवाओं पर मिलेगी। अब तक इन पर 12% GST लगता था।
  • कैंसर संबंधी ड्रग्स जैसे की ट्रूडा पर GST की दर 12% से घटाकर 5% की गई है। दिव्यांगों के वाहनों पर भी GST में कमी की गई है।
  • लीज पर लेने के लिए विमानों के आयात पर IGST नहीं लगेगा। रेलवे पार्ट और लोकोमोटिव्स पर GST की दर 12% से बढ़ाकर 18% की गई है।
  • बायोडीजल पर GST की दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है।
  • मालगाड़ी परमिट पर भी GST नहीं लगेगी। सभी प्रकार की कलम और उनके हिस्सों पर 18% GST लगेगी।

दायरे में आता तो पेट्रोल 28 रुपए और डीजल 25 रुपए तक सस्ता हो जाता
अगर पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में आता तो पेट्रोल 28 रुपए और डीजल 25 रुपए तक सस्ता हो जाता। अभी देश में कई जगहों पर पेट्रोल 110 और डीजल 100 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है। लेकिन ऐसा होने पर राज्यों के राजस्व में घाटा होगा है। यही कारण है कि कई राज्य इसका विरोध कर रहे हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वित्त मंत्री से मिलने पहुंच गए हैं।

GST काउंसिल की बैठक में 48 से ज्यादा वस्तुओं पर टैक्स दरों की समीक्षा की जा जा रही है। इसमें 11 कोविड दवाओं पर टैक्स छूट को 31 दिसंबर तक बढ़ाने का भी फैसला हो सकता है।

दिल्ली, बिहार समेत 7 राज्यों के उप मुख्यमंत्री शामिल हुए
बैठक में 7 राज्यों के उप मुख्यमंत्री शामिल हुए हैं। इनमें अरुणाचल प्रदेश के चौना मेन, बिहार के उप मुख्यमंत्री राज किशोर प्रसाद, दिल्ली के मनीष सिसोदिया, गुजरात के नितिन पटेल, हरियाणा के दुष्यंत चौटाला, मणिपुर के युमनाम जोए कुमार सिंह और त्रिपुरा के जिष्णु देव वर्मा शामिल हैं। इसके अलावा कई राज्यों के वित्त या भी मुख्यमंत्री की ओर से नामित मंत्री भी शामिल हुए हैं।

एक देश-एक दाम पर चल रहा मंथन
सरकार ने 'एक देश -एक दाम' के तहत पेट्रोल-डीजल, नेचुरल गैस और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (विमान ईंधन) को GST के दायरे में लाने पर विचार किया था। इसी को लेकर GST काउंसिल की बैठक में चर्चा चल रही है। हालांकि अभी तक मिली जानकारी के अनुसार ज्यादातर राज्यों ने पेट्रोलियम पदार्थों को GST के दायरे में शामिल करने का विरोध किया है।

फूड डिलीवरी ऐप्स पर 5% GST लगाने का प्रस्ताव
GST काउंसिल की बैठक में जोमैटो और स्विगी जैसे फूड डिलीवरी ऐप्स को रेस्टोरेंट की तरह मानने और उनके द्वारा की गई डिलीवरी पर 5% GST लगाने का फैसला भी लिया जा सकता है। ऐसा हुआ तो रेस्टोरेंट की बजाय फूड डिलीवरी ऐप्स को GST सरकार के पास जमा करवाना होगा, इससे ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

2017 में लागू हुई थी GST व्यवस्था
देश में GST एक जुलाई, 2017 को लागू हुआ था। इसके तहत केंद्र और राज्यों के अलग-अलग टैक्स को खत्म कर एक टैक्स GST लागू किया किया गया था। हालांकि, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन, नेचुरल गैस और कच्चे तेल को GST के दायरे से बाहर रखा गया था।

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