पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

लखनऊ में किडनैपिंग केस का एक ऐसा किरदार:छोटे शहर से डेढ़ लाख लेकर राजधानी में पुलिस बनने आया था, दरोगा की वर्दी में घरवालों को अपनी फोटो भेजता रहा

लखनऊ10 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
एसटीएफ और लखनऊ पुलिस ने मोहनलालगंज के हरवंशगढ़ी गांव से पीड़िता को सकुशल रिहा कराया था और गाजीपुर के रहने वाले आरोपी संतोष चौबे को पकड़ा था। - Dainik Bhaskar
एसटीएफ और लखनऊ पुलिस ने मोहनलालगंज के हरवंशगढ़ी गांव से पीड़िता को सकुशल रिहा कराया था और गाजीपुर के रहने वाले आरोपी संतोष चौबे को पकड़ा था।

राजधानी लखनऊ में बीते 6 जून को हुए हाईकोर्ट के वकील अनुराग शुक्ला की पत्नी के अपहरण मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में दो और आरोपी गिरफ्तार किए हैं। उनमें एक आरोपी खुजौली-नीलमथा मार्ग और दूसरा आएसटीएफ और लखनऊ पुलिस ने मोहनलालगंज के हरवंशगढ़ी गांव से पीड़िता को सकुशल रिहा कराया था और गाजीपुर के रहने वाले आरोपी संतोष चौबे को पकड़ा था।रोपी रानीखेड़ा से पकड़ा गया है। इससे पहले बुधवार को एसटीएफ और लखनऊ पुलिस ने मोहनलालगंज के हरवंशगढ़ी गांव से पीड़िता को सकुशल रिहा कराया था और गाजीपुर के रहने वाले आरोपी संतोष चौबे को पकड़ा था।

पुलिस का कहना है कि परिवार की उम्मीदों को उनके तरीके से पूरा नहीं कर पाया तो अपराध की दुनिया में किस्मत आजमाने लगा। अभी इस मामले में सरगना समेत सात अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।

पुलिस में भर्ती होने के लिए गाजीपुर से लखनऊ आया था संतोष

गाजीपुर के नगर कोतवाली क्षेत्र के बिंदवलिया गांव निवासी संतोष चौबे की उम्र करीब 24 साल है। उसके पिता खेती किसानी करके परिवार का खर्च उठाते हैं। पिता गुलाब चौबे ने संतोष के पैदा होने के साथ ही उसे वर्दी में देखने का सपना पाल लिया था। संतोष ने भी हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के साथ ही पिता के इस सपने को पूरा करने का बीड़ा उठा लिया। ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते हुए ही वह फोर्स की तैयारी के लिए दो साल पहले लखनऊ आ गया। पिता की अमदनी और बड़े शहर के बीच तालमेल बैठाने के लिए वह शहर से बाहर सस्ता कमरा ढूंढकर मोहनलालगंज में रहने लगा।

लेकिन यह इलाका उसकी लाइफ का टर्निंग पॉइंट बन गया। यहीं से उसकी दोस्ती मैकेनिक का काम करने वाले मोहनलालगंज निवासी रोहित, अंबेडकर नगर निवासी राहुल और भीम आर्मी के सदस्य बबलू से हो गई। शातिर दिमाग बबलू और उसके सबसे खास दोस्त लवकुश ने संतोष को अपराध की दुनिया के ग्लैमर दिखाए। इसी तरह धीरे-धीरे दर्जन भर के करीब ऐसे युवक जो पढ़ाई या परिवार की माली हालत की वजह से छोटे-मोटे काम धंधे की तलाश में थे इस गिरोह के साथ जुड़ते गए। कैरियर के पहले पायदान पर खड़े इन नौजवानों के गिरोह ने पहले राहजनी, स्नैचिंग जैसे छोटे वारदात किए। इसमें बच निकलने के बाद हौसला बढ़ा तो बड़ा डॉन बनने की राह पर निकल पड़े। इसके लिए किसी बड़े आदमी से फिरौती वसूलने की योजना बनी और इसी फिराक में 6 जून की शाम अधिवक्ता अनुराग की पत्नी प्रीति को उठा लिया।

अपहरण के आरोपी रोहित और लवकुश को पुलिस ने जेल भेज दिया है।
अपहरण के आरोपी रोहित और लवकुश को पुलिस ने जेल भेज दिया है।

दरोगा की वर्दी में फोटो भेजकर घरवालों से लिए थे डेढ़ लाख

अधिवक्ता की पत्नी को रेस्क्यू करने के साथ पुलिस ने गाजीपुर निवासी संतोष को पकड़ा तो दूसरे दिन उसके घरवाले लखनऊ पहुंचे। पिता गुलाब चौबे ने बताया कि किसानी करके मुश्किल से परिवार को पाल रहे हैं। गांव के अमीर लोग अक्सर किसी न किसी बात पर विवाद करते रहते हैं। आसपास के गांव के दर्जनों परिवार के लड़के फोर्स में भर्ती हो गए। अब उनकी तरफ कोई आंख भी नहीं उठाता है। यही सब देखकर वह भी संतोष को फोर्स में भर्ती करवाना चाहते थे। संतोष की हर डिमांड पेट काटकर पूरी करते थे कि उसका मनोबल नीचा न होने पाए।

करीब दो महीने पहले उसने पुलिस की वर्दी में अपनी फोटो भेजकर घरवालों को बताया कि दरोगा के पोस्ट पर उसकी भर्ती हो गई है। एक अधिकारी को देने के लिए उसे डेढ़ लाख रुपए चाहिए। गुलाब चौबे ने उससे कुछ दिन का वक्त मांगा। इसके बाद संतोष खुद रुपये लेने घर पहुंचा तो बेटे के दरोगा बनने की खुशी मे पागल गुलाब ने किसी तरह इंतजाम करके उसे डेढ़ लाख रुपये दिए थे। संतोष ने पुलिस को बताया कि वह पुलिस और सेना की हर परीक्षा में बैठता है। कई साल के प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिली। परिवार की आर्थिक स्थित ऐसी नहीं थी कि आगे उसके पढ़ाई का बोझ उठा पाए। परिवार की उम्मीदों को उनके तरीके से पूरा नहीं कर पाया तो अपराध की राह पकड़ लिया।

सिपाही ही दे रहा था पुलिस की गतिविधियों की पल-पल की जानकारी

अपहरण का केस दर्ज होने के बाद अनुराग के बहनोई जो एडीजे है, ने पुलिस पर दबाव बनाया तो एसटीएफ को मामले की जानकारी दी गई। एसटीएफ ने अपने पैतरे लगाने शुरु किए और अनुराग से कहा गया कि बदमाशों पर फोन पर ज्यादा देर तक बात करें ताकी उनकी लोकेशन ट्रेस करने में आसानी हो। लेकिन इनका ही एक सिपाही इन नौसिखिए बदमाशों को पुलिस के हर गतिविधि की जानकारी दे रहा था।

दरअसल लंबे समय तक मोहनलालगंज में तैनात रहे सिपाही की बबूल से खासी दोस्ती थी। बबलू ने मिशन पूरा होने पर उसे भी मोटा हिस्सा देने का वादा किया था। 8 जून की रात पुलिस इन बदमाशों के लोकेशन की तरफ बढ़ी तो इसी सिपाही ने इसकी जानकारी बबलू को दी। इसके बाद बबलू संतोष को पीड़िता के पास छोड़कर बाकी साथियों के साथ वहां से फरार हो गया था। फिलहाल पुलिस संतोष के बाद रोहित और लवकुश तो टीम के लिए हर शाम शराब पहुंचा रहा था की गिरफ्तारी दिखा रही है। बबलू और राहुल पुलिस की पहुंच तक आ गए हैं। बाकी बदमाशों के बारे में पुलिस अभी छानबीन कर रही है।

खबरें और भी हैं...