125 सीटों पर 88 प्रत्याशी पहली बार लड़ेंगे चुनाव:​​​​​​​उन्नाव गैंगरेप व चीरहरण कांड जैसे पीड़ितों को टिकट, हार लगभग तय; लेकिन कांग्रेस का भविष्य इसी में छिपा है

लखनऊ10 दिन पहले

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों को लेकर सबसे पहले अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया। इस सूची में शामिल कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जो पिछले दिनों चर्चित रहे। लड़की हूं, लड़ सकती हूं...के स्लोगन के साथ आगे बढ़ रही कांग्रेस ने उम्मीदवारों की घोषणा में भी इसी बात का संदेश दिया है।

उन्नाव की चर्चित सदर विधानसभा सीट से उन्होंने रेप पीड़िता की मां का टिकट फाइनल किया है, तो वहीं, लखीमपुर खीरी की मोहम्मदी सीट से रितु सिंह को टिकट दिया है। रितु सिंह के साथ ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान बदसुलूकी की गई थी। राजनेताओं की तरह आर्थिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि से न होने के बावजूद भी कांग्रेस ने इन सीटों पर उन्हें अपना चेहरा बनाया है।

लोग इसे सिम्पैथी कार्ड की तरह देख रहे हैं, लेकिन यह कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर पर सोची समझी रणनीति है। सूत्रों की मानें तो हार-जीत एक अलग बात है, इन उम्मीदवारों को टिकट देने मात्र को ही कांग्रेस अपनी जीत मान रही है। आइए जानते हैं, कैसे राजनीतिक धुरंधरों और जातिगत समीकरण बीच कांग्रेस ने ताकत देने की शुरुआत भर की है।

जानिए क्यों जीत मुश्किल...

1. सबसे पहले बात उन्नाव सदर सीट की...

उन्नाव रेप कांड के बाद लगातार न्याय के लिए आवाज उठती रही।
उन्नाव रेप कांड के बाद लगातार न्याय के लिए आवाज उठती रही।

रेप पीड़िता के क्षेत्र उन्नाव सदर विधानसभा सीट में आता है। 2017 में गैंगरेप का मामला सामने आया था। आरोप भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगा था, इसलिए मामला काफी सुर्खियों में आया था। अब फिर से इसकी बात हो रही है।

उन्नाव विधानसभा सीटः कौन, कितना मजबूत

  • भाजपा के पंकज गुप्ता 2017 के चुनाव में जीते थे। वैश्य समाज से आते हैं।
  • सपा से मनीषा दीपक दूसरे नंबर पर रहीं थीं। वह और उनके पति दोनों का ही निधन हो चुका है। उनके बेटे अभिनव कुमार टिकट मिल सकता है। मल्लाह समाज से आते हैं।
  • बसपा से देवेंद्र सिंह को टिकट मिल सकता है। यह कुलदीप सिंह सेंगर के विरोधी माने जाते रहे हैं।
  • आशा सिंह रेप पीड़िता की मां हैं। पहली बार चुनाव लड़ेंगी। वर्तमान समीकरण के हिसाब सबसे कमजोर हैं।

क्या कहते हैं जातिगत समीकरण
यहां ब्राह्मण 67 हजार, क्षत्रिय 34 हजार, मुस्लिम 43 हजार, लोधी 54 हजार, केवट 25 हजार, पासी 34 हजार, वैश्य 24 हजार और बाकी अन्य जातियां हैं। जातिगत समीकरण के हिसाब से भी रेप पीड़िता की मां के पक्ष में बहुत वोट नहीं हैं। क्षत्रियों के 34 हजार वोट ही हैं। इसमें पुराने नेता कटौती करेंगे।

बाहुबल प्रतिद्वंद्वियों के पास
राजनीति में बाहुबल भी एक फैक्टर माना जाता है। इस हिसाब से देखें तो सदर सीट सपा का गढ़ है और भाजपा ने पिछली बार जीत हासिल की थी। दोनों के पास ही ज्यादा समर्थक और वोटों का बड़ा तबका है। बसपा तीसरे नंबर पर मानी जा रही है। पिछली बार तो कांग्रेस ने गठबंधन में यह सीट सपा को ही दे दी थी। कांग्रेस लड़ाई में नहीं दिख रही है।

क्या कहता है, धनबल
राजनीति में धनबल भी एक बड़ा फैक्टर है। चुनाव के अंतिम समय में इसे नेता अपने पक्ष में लोगों को करने के लिए खूब खर्च करते हैं। ऐसे में लगातार चुनाव लड़ रहे और लगभग हर पार्टी का अब तक जीत हार का क्रम रहा। इसलिए यह सभी मजबूत हैं। पहली चुनाव लड़ने जा रहीं, रेप पीड़िता की मां इस मामले में भी कमजोर हैं।

क्यों चर्चित है उन्नाव सदर सीट
साल 2017 में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर पर 17 वर्षीय पीड़िता ने अपहरण और बलात्कार का आरोप लगाया था, जिस वक्त ये घटना हुई थी उस वक्त महिला नाबालिग थी। पीड़िता सेंगर के घर नौकरी के लिए बात करने गई थी जिसके बाद उसने विधायक के घर पर उसके साथ बलात्कार किए जाने का आरोप लगाया था। इस मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को जेल हो गई। यह मामला काफी चर्चा में रहा।

2. अब बात लखीमपुर खीरी की मोहम्मदी सीट की...

लखीमपुर खीरी में 2021 में ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान बदसुलूकी हुई थी।
लखीमपुर खीरी में 2021 में ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान बदसुलूकी हुई थी।

लखीमपुर खीरी की मोहम्मदी विधानसभा सीट से कांग्रेस ने रितु सिंह को उम्मीदवार बनाया है। यहां ब्राह्मण-मुस्लिम समीकरण जीत-हार तय करते रहे हैं, लेकिन अब प्रियंका गांधी ने नारी सम्मान और उनके हक का संदेश देते हुए महिलाओं के वोट अपने पक्ष में करने की तैयारी शुरू की है, लेकिन सिर्फ यही एक पहलू उन्हें जीत नहीं दिला सकता है।

मोहम्मदी सीट 2017ः कौन, कितना मजबूत

  • भाजपा के लोकेंद्र प्रताप सिंह को 93 हजार वोट मिले।
  • कांग्रेस के संजय शर्मा को 59 हजार 82 वोट मिले।
  • बसपा के दाऊद अहमद को 57, 902 वोट मिले।

क्या कहते हैं जातिगत समीकरण
मोहम्मदी सीट पर 32 हजार ब्राह्मण हैं। 85 हजार मुस्लिम हैं। क्षत्रिय 17 हजार, तेली 25 हजार, यादव 42 हजार, हरिजन 44 हजार, पासी 35 हजार, सिक्ख 18 हजार, किसान 15 हजार, वैश्य 6 हजार और धोबी 8 हजार हैं।

बाहुबल में भी बहुत कमजोर
राजनीति में बाहुबल भी एक फैक्टर माना जाता है। इस हिसाब से देखें तो मोहम्मदी सीट पर कांग्रेस का प्रभाव ज्यादा है। लेकिन यहां जब तक जितिन प्रसाद कांग्रेस में रहे कांग्रेस को मजबूती मिली। अब जितिन प्रसाद भाजपा में चले गए हैं। इसलिए इस सीट पर कांग्रेस का प्रभाव कमजोर माना जा रहा है, जबकि सपा का कोई खास असर नहीं है। रितु सिंह सपा से थीं और अब कांग्रेस में है। ऐसे में दोनों ही तरह से उनके पास समर्थकों का साथ कम है। एक तरह से उनकी नई शुरुआत भर है।

धनबल में प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले के काफी पीछे
धनबल की बात करें तो रितु सिंह बाकी प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले कमजोर हैं। वह कभी विधायक नहीं रहीं। छोटे चुनाव से शुरुआत करने जा रहीं थीं। बाकी के मुकाबले वह काफी पीछे हैं। मौजूदा समय में रितु सिंह को टिकट देकर रनर अपर रहे कांग्रेस के उम्मीदवार कितना साथ देंगे, यह भी देखने वाली बात रहेगी।

क्यों चर्चित है यह सीट

पंचायत चुनाव नामांकन के दौरान हुई थी बदसलूकी थी। आरोप लगा था कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पंचायत चुनाव के नामांकन के दौरान रितु सिंह और उनकी प्रस्तावक अनीता की साड़ियां खींची थीं जिसकी काफी आलोचना हुई थी। रितु सिंह समाजवादी पार्टी से ब्लॉक प्रमुख पद की उम्मीदवार थीं।

मोहम्मदी सीट पर मतदाता

  • कुल मतदाता - 3,15,220
  • पुरष - 1,71,318
  • महिला - 1,43,902

यूपी चुनाव के मैदान में कांग्रेस ने 53 जिलों की 125 सीटों पर प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में 88 प्रत्याशी पहली बार, 15 दूसरी, 10 तीसरी, 7 चौथी, 3 पांचवीं, 1-1 प्रत्याशी छठवीं और सातवीं बार चुनाव लड़ रहा है। पहली बार चुनाव लड़ने वाले ज्यादातर प्रत्याशी महिला और युवा हैं।

इन्हें कांग्रेस ने दिया टिकट

  • हैदर अली खानः रामपुर नवाब खानदान से ताल्लुक रखने हैदर अली खान को पहली बार विधानसभा का टिकट दिया गया है।
  • अर्चना गौतमः अभिनेत्री और मॉडल अर्चना गौतम की युवाओं में अच्छी खासी लोकप्रियता है। इसे भुनाने के लिए उन्हें हस्तिनापुर से लड़ाया जा रहा है।
  • सुशांत गोयलः कांग्रेस से दोबारा सांसद रहे सुरेंद्र गोयल के बेटे सुशांत गोयल को गाजियाबाद से प्रत्यासी बनाया गया है।
  • पंखुड़ी पाठकः सालों से कांग्रेस की नेता हैं, लेकिन 40 फीसदी महिला आरक्षण की घोषणा के चलते चुनाव लड़ने का मौका पहली बार दिया गया है।
  • मनोज चौधरीः जेवर एयरपोर्ट का विरोध करने वाले आंदोलन के नेता मनोज चौधरी को भी टिकट दिया गया है।
  • प्रदीप माथुरः 6 बार चुनाव लड़कर 4 बार जीतने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रदीप माथुर को कांग्रेस ने सातवीं बार भी मौका दिया है।
  • विनोद बंसलः पश्चिम उत्तर प्रदेश के व्यापार मंडल के अध्यक्ष विनोद बंसल पहली बार लड़ रहे हैं।
  • मनोज दीक्षितः किसानों के आंदोलन में जेल जाने वाले कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज दीक्षित को भी पहली बार प्रत्याशी बनाया गया है।
  • रजनी सिंहः जिला पंचायत चुनाव लड़ चुकी रजनी सिंह बदायूं से विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं।
  • मोहम्मद इलियासः बरेली से मोहम्मद इलियास पहली बार लड़ रहे हैं।
  • पूनम पांडेः आशा कर्मी आंदोलन में बीजीपी ने पूनम पांडे का हाथ तोड़ दिया था, वे अब शाहजहांपुर से चुनाव लड़ेंगी।
  • रितु सिंहः पंचायत चुनाव के समय रितु सिंह की साड़ी खींचने का मामला सुर्खियों में आया था। उन्हें भी कांग्रेस ने मोहम्मदी सीट से प्रत्याशी घोषित किया है।
  • आशा सिंहः उन्नाव रेप पीड़िता की मां आशा सिंह को पहली बार लड़ाया जा रहा है।
  • ममता चौधरीः महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ममता चौधरी पांच बार पार्षद रहीं हैं। उन्हें पहली बार विधानसभा लड़ने का मौका दिया गया है।
  • रितुः मोहनलालगंज से रितु को प्रत्याशी बनाया है।
  • उर्मिला खावरीः पूर्व राज्यसभा सांसद ब्रजलाल खावरी की पत्नी उर्मिला खावरी उरई से कांग्रेस की प्रत्याशी बनी हैं।
  • शहलाः महिला कांग्रेस अध्यक्ष शहला रामपुर कारखाना से लड़ रही हैं।
  • अखिलेश प्रताप सिंहः कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह को भी चौथी बार कांग्रेस ने रुद्रपुर से प्रत्याशी घोषित किया है।
  • केशव चंद्रः भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष केशव चंद्र को भाटपार रानी से पहली बार लड़ाया जा रहा है।
  • रामराज गोंडः उम्हा में 11 आदिवासियों के नरसंहार के समय लड़ाई लड़ने वाले रामराज गोंड को भी टिकट दिया गया है।
  • कनिष्क पांडेः युवा कांग्रेस के अध्यक्ष कनिष्क पांडे महराजपुर से चुनाव लड़ेंगे। उनका भी यह पहला चुनाव होगा।
  • मीनाक्षी सिंहः जिला पंचायत सदस्य रहीं मीनाक्षी सिंह टौर सीट से कांग्रेस की महिला प्रत्याशी हैं।