नौकरी से निकाला गया तो बन गया जालसाज:फर्जी नियुक्ति पत्र से वन विभाग में नौकरी का देते थे झांसा, लखनऊ में STF ने 3 को दबोचा; 3 साल में 1 करोड़ ठगे

लखनऊ2 महीने पहले
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सरगना शिवम मेहरोत्रा वन विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर संविदाकर्मी था। वहीं से उसने नियुक्ति पत्र चोरी करके ठगी का कारोबार शुरू किया था। - Dainik Bhaskar
सरगना शिवम मेहरोत्रा वन विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर संविदाकर्मी था। वहीं से उसने नियुक्ति पत्र चोरी करके ठगी का कारोबार शुरू किया था।

वन विभाग में नौकरी का झांसा देकर प्रदेश के बेरोजगारों से करोड़ों रुपयों की ठगी कर चुके 3 जालसाजों को UP STF ने शनिवार को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से भारी मात्रा में भर्तियों से जुड़े फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। गिरोह का सरगना 3 साल पहले वन विभाग में संविदा पर नौकरी करता था। नौकरी से निकाले जाने के बाद उसने गिरोह बनाकर बेरोजगारों को ठगना शुरू कर दिया था। आरोपियों ने पिछले तीन साल में 35-40 लोगों को अपना शिकार बनाकर 1 करोड़ रुपए ठगा है।

एडीजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि कुछ दिन पहले इस गैंग ने सीतापुर निवासी रामगोपाल तिवारी से उनके बेटे और रिश्तेदारों की वन विभाग में नौकरी लगवाने के नाम पर 36 लाख रुपए ठगे थे। इसका मुकदमा लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में दर्ज किया गया था। एसटीएफ इस मामले की जांच में जुटी थी। शनिवार को टीम ने तीनों को इंदिरानगर सेक्टर-सी के एक मकान से गिरफ्तार किया।

नौकरी के दौरान चुराई थी नियुक्ति पत्र की कॉपियां
पूछताछ में मुख्य आरोपी शिवम मेहरोत्रा ने बताया कि 2017 में पलिया रेंज वन विभाग ऑफिस में मेरी नियुक्ति संविदा पर कम्प्यूटर आपरेटर के पद पर हुई थी। 2017 में ही पलिया रेंज में फारेस्ट गार्ड की भर्ती हुई थी, जिनके नियुक्ति पत्र जारी हुए थे। उनकी एक प्रति मैंने चुराकर अपने पास रख ली थी। 2018 में कम्प्यूटर ऑपरेटर की नौकरी से निकाल दिया गया था।

फर्जी नियुक्ति पत्र से ठगी का प्लान बनाया
नौकरी से निकाले जाने के बाद शिवम दूसरी जॉब की तलाश में लखनऊ आ गया। जिसके बाद कैसरबाग स्थित क्वीक मैनपॉवर कन्सेलटेंसी के ऑफिस में उसकी मुलाकात अरविंद यादव से हुई। वह भी नौकरी की तलाश कर रहा था। कई महीनों तक नौकरी न मिलने पर शिवम ने अरविंद के साथ मिलकर ठगी का प्लान बनाया। उसने वन विभाग के चुराए गए नियुक्ति पत्र और कुछ आदेश की कॉपी के जरिए ठगी का काम शुरू किया।

नौकरी के नाम पर 1.5-3 लाख रुपए लेते थे
लखनऊ के कैसरबाग से शिवम और अरविंद ने ठगी का कारोबार शुरू किया। दोनों तय किया कि वन विभाग में दरोगा पद के लिए 3 लाख और वन रक्षक व वनपाल के लिए 1.5 लाख रुपयों की डिमांड की जाएगी। गैंग बढ़ाने के लिए अरविंद ने शिवम की मुलाकात आनंद सिंह, परीक्षित पांडेय, देवेंद्र पांडेय व विजय सिंह से कराई। सभी ने मिलकर गिरोह बनाया। 2018 से अब तक इन लोगों ने 35-40 लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर लगभग 1 करोड़ रुपए की ठगी की है।

कंजरवेटर बनकर करता था कैंडिडेट से बात
शिवम ने बताया कि, वह फर्जी नियुक्ति व परिचय पत्र बना लेता था। इन पर अलग अलग रेंज के अनुसार अरविंद यादव आनन्द सिंह, परीक्षित पांडेय, देवेन्द्र पांडेय व विजय सिंह हस्ताक्षर बनाकर अभ्यर्थियों को देकर पद के अनुसार 1.5 लाख से लेकर 3 लाख रुपए तक ठग लेते थे। जिस व्यक्ति के माध्यम से कैंडिडेट आता था, शिवम उससे आधी-आधी रकम बांट लेता था। गैंग के अन्य सदस्य सरगना शिवम को कैंडिडेट से कंजरवेटर बताकर मिलवाते थे।
इन आरोपियों ने राम गोपाल तिवारी के बेटे व रिश्तेदारों से लगभग 36 लाख रुपए लिए थे। पीड़ित की तरफ से केस दर्ज कराए जाने की जानकारी होने पर आरोपी दस्तावेज नष्ट करने की तैयारी कर ही रहे थे, तभी एसटीएफ ने इन्हें दबोच लिया। एडीजी ने बताया कि गैंग के अन्य फरार सदस्यों की तलाश की जा रही है।

सरगना समेत ये 3 ठग दबोचे गए

  • शिवम मेहरोत्रा निवासी मोहल्ला बेहटी लहरपुर थाना लहरपुर सीतापुर।
  • आनन्द कुमार सिंह निवासी ग्राम मुरारपुर, शाहपुर थाना, रामसनेही घाट बाराबंकी।
  • परीक्षित पांडेय निवासी ग्राम भदोही, थाना मालीपुर, अंबेडकरनगर।
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