प्रचार ही माध्यम बना परेशानी का सबब:समाजवादी पार्टी समेत कई दलों में मोबाइल के साथ एंट्री पर पाबंदी, बड़ा नेता या पदाधिकारी ही मोबाइल लेकर जा सकता है

लखनऊ4 महीने पहले
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पार्टी कार्यालय के अंदर आम कार्यकर्ताओं को मोबाइल के साथ एंट्री नहीं मिल रही है। - Dainik Bhaskar
पार्टी कार्यालय के अंदर आम कार्यकर्ताओं को मोबाइल के साथ एंट्री नहीं मिल रही है।

चुनाव डिजिटल मोड पर आने का असर पार्टियों की कार्य शैली पर दिखने लगा है। राजनीति दल और उनके बड़े नेता इस बार से बेहद सतर्क हैं कि चुनावी समय में ऐसा कुछ भी वायरल न हो जाए, जिससे कि उनकी छवि पर विपरीत असर पड़े। नेता जहां लोगों से मोबाइल के साथ मिलने से परहेज कर रहे हैं। वहीं, राजनीतिक दलों में आम कार्यकर्ता के लिए मोबाइल के साथ प्रवेश पर बंदिश लगा दी गईं हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आमतौर पर वायरल फोटो से लेकर वायरल वीडियो समान है। इसमें कुछ भी टिप्पणी हो रही है। ऐसे में छवि को बेहतर रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसमें सबसे सख्त रवैया समाजवादी पार्टी ने अपनाया है। पार्टी कार्यालय के अंदर आम कार्यकर्ताओं को मोबाइल के साथ एंट्री नहीं मिल रही है। पदाधिकारियों और कुछ बड़े चेहरों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर लोगों के साथ ऐसा किया जा रहा है।

स्थिति यह है कि गाड़ी के अंदर या बाहर किसी दुकान पर मोबाइल जमा कर कार्यकर्ता कार्यालय के अंदर जाते हैं। ग्रुप में आए लोग किसी एक सख्त के पास मोबाइल रख उसको बाहर ही छोड़ देते हैं, उसके बाद कार्यालय के अंदर जाते हैं। दरअसल, साल 2017 में पार्टी के अंदर हुए विवाद के दौरान कोई वीडियो सार्वजनिक हो गई थी। इसके बाद विपक्ष ने इसको सोशल मीडिया पर डालकर खूब प्रचार-प्रसार किया था। उसके बाद अखिलेश यादव कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं।

अब हर वक्त मोबाइल के साथ प्रवेश पर रोक
पार्टी कार्यालय पर बांदा से आए एक सीनियर कार्यकर्ता ने बताया कि दो महीने पहले तक जब राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कार्यालय के अंदर होते थे तो मोबाइल के साथ एंट्री पर रोक थी। अब हर समय रोक लगा दी गई है। इसमें अखिलेश यादव अगर कार्यालय के अंदर नहीं है तो भी मोबाइल के साथ प्रवेश पर बैन है।

ओम प्रकाश राजभर भी हुए सक्रिय
सुभासपा के नेता ओम प्रकाश राजभर के यहां भी अगर कोई आम आदमी या कार्यकर्ता से मिलने से पहले मोबाइल जमा कराए जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। स्वतंत्र पत्रकार अतिक बताते हैं कि रविवार को ओम प्रकाश राजभर से मिलने के लिए कुछ कार्यकर्ता मिलने आए तो उनका मोबाइल जमा करा लिया गया। दरअसल, पिछले दिनों ओम प्रकाश राजभर का भी एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह सामान्य जाति के लोगों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए नजर आए थे। ऐसे में चुनाव की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है।

स्वाती सिंह का ऑडियो हो चुका है वायरल
बीजेपी सरकार की स्वतंत्र राज्य मंत्री स्वाती सिंह का ऐसे ही एक ऑडियो वायरल हुआ है। जिसमें वह अपने ही पति और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष दया शंकर सिंह पर आरोप लगाती हैं कि वह उनको मारते हैं। इस ऑडियो में दूसरा व्यक्ति स्वाती सिंह से शिकायत करता है कि दया शंकर सिंह जबरदस्ती उसका फ्लैट कब्जा करना चाहते हैं। सोशल मीडिया पर यह ऑडियो करोड़ों लोगों ने सुना है। उसके बाद विपक्ष बीजेपी को इस मुद्दे पर घेर रही है। इसमें कहा जा रहा है कि पार्टी के अंदर जब राज्यमंत्री सुरक्षित नहीं है तो यह आम महिलाओं की सुरक्षा की बात कैसे कर सकते हैं।

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