समझौते के सूत्रधार IPS प्रशांत कुमार:हिंसा बढ़ती देख खुद लखीमपुर पहुंचे, रात में 4 घंटे किसान नेताओं से मंत्रणा, 14 घंटे में समझौते का 'फॉर्मूला' ले आए

लखनऊ9 महीने पहले

लखीमपुर हिंसा की उठती लपटों पर पूरे देश की निगाहें थीं लेकिन 24 घंटे से भी कम समय में सब कुछ शांत हो गया। आखिर ये सब कैसे हुआ? कौन इसका सूत्रधार बना? किसानों के गुस्से को भांपते हुए किसने राकेश टिकैत को मनाया। जवाब है- यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार। प्रशांत कुमार पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने भरोसा जताया और फ्री हैंड देकर उन्हें लखीमपुर रवाना किया। प्रशांत ने रणनीतिक रुप से सिर्फ राकेश टिकैत को ही लखीमपुर आने की अनुमति दी। राजनीतिक पार्टी के नेताओं को वहां नहीं जाने दिया गया।

टिकैत के पहुंचते ही प्रशांत ने उन्हें भरोसे में लिया। सरकार की नीयत बताई और उनकी तमाम मांगे एक ही झटके में मान ली। टिकैत को अपने साथ प्रेस कांफ्रेंस में बैठाया। एक आईपीएस होने के बावजूद केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा व उनके बेटे के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया। कहा- मंत्री के बेटे के खिलाफ एफआईआर होगी। कड़ी कार्रवाई होगी। मृतकों के लिए मुआवजे से लेकर नौकरी तक का भरोसा दिलाया।

लखीमपुर में रहकर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर नजर रखी

प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने प्रशासनिक अधिकारियों संग करीब 14 घंटे की मशक्कत के बाद समान्य कर दिया। उन्होंने लखीमपुर में मौजूद रहकर पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर नजर रखते हुए कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं होने दी। हालांकि, कांग्रेस, सपा, बसपा समेत गैर भाजपा राजनैतिक दलों ने लखनऊ से लेकर पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन किए थे।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार लखीमपुर हिंसा के बाद कांफ्रेंस करते हुए।
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार लखीमपुर हिंसा के बाद कांफ्रेंस करते हुए।

सुपर कॉप की भूमिका में दिखे एडीजी
रविवार को घटना की जानकारी होते ही लखनऊ से एडीजी प्रशांत कुमार ने लखीमपुर का रुख किया। सीएम गोरखपुर में थे। पूरे घटना क्रम की पल-पल की जानकारी दिल्ली से भी मांगी जा रही थी। समूचा विपक्ष एजुट होकर सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख इख्तियार कर चुका था। ऐसी परिस्थितियों में बिगड़े हालात की कमान संभालने जब प्रशांत कुमार लखीमपुर पहुंचे तो किसानों से बात करने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। उन्होंने मृतक किसान के परिजनों से सहानुभूति पूर्वक बातचीत करके घटना की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। वहीं किसान यूनियन के नेताओं से लगातार संपर्क में रहकर शांति की अपील करते रहे। नजीता यह रहा कि प्रदेश में कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और कोई भी राजनैतिक दल इसको बड़ा मुद्दा नहीं बना सका।
किसान नेता टिकैत को चंद घंटे में सरकार की नीतियों से अवगत कराया
एडीजी प्रशांत कुमार घटना स्थल का मुआयना करने के बाद से ही किसान नेता राकेश टिकैत के संपर्क में आ गए थे। उन्होंने टिकैत के सामने मृतक किसानों का हित देखते हुए मुआवजे से लेकर सरकारी नौकरी तक की हर बात को कुशलता से रखा। करीब चार घंटे चली मैराथन मीटिंग में सरकार का पक्ष रखा और टिकैत के साथ साझा प्रेस कांफ्रेंस की। मीडिया को बताया कि किसानों की हर मांग मान ली गई है। इस दौरान अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी, डीजी एसएन साबत, आईजी लखनऊ जोन लक्ष्मी सिंह आदि की भी अहम भूमिका रही, लेकिन फ्रंट फेस प्रशांत का ही रहा।
वेस्ट यूपी का कनेक्शन काम आया
1990 बैच के आईपीएस प्रशांत कुमार को मई 2020 में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर बनाया गया। मेरठ जोन में तैनाती के दौरान एडीजी प्रशांत कुमार कांवरियों पर हैलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा और मेरठ जोन में सबसे ज्यादा एनकाउंटर के चलते सुर्खियों में आए। वहां रहते हुए टिकैत और अन्य नेताओं से उनके पुराने संबंध भी इस समझौते में कारगर साबित हुए।

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