घरों पर लहराए तिरंगों का नहीं होगा अपमान:यूपी में 24 घंटे में 1 लाख 37 हजार झंडे हुए कलेक्ट, अखिलेश बोले- घबराएं नहीं

लखनऊएक महीने पहले
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आजादी के 75 साल पूरे होने पर देश में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खास तौर पर जनता से 13 से 15 अगस्त के बीच घरों पर तिरंगा लगाने की अपील की थी। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार यूपी में करीब 10 करोड़ तिरंगा घरों पर फहराए गए।

मंत्रालय की ओर से आंकड़े जारी किए गए हैं। जिसमें यूपी के सभी जिलों से अब तक 1 लाख 37 हजार झंडे कलेक्ट किए जा चुके हैं। मगर, सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब इन तिरंगों का क्या होगा?

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इस पर अखिलेश यादव ने ट्विटर पर एक पोस्टर भी शेयर किया है। उन्होंने लिखा, "15 अगस्त के बाद झंडे का क्या? घबराने की जरूरत नहीं है। ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज, लखनऊ के पास इसका समाधान है।"

​​​​​​इस अभियान को 'हर घर तिरंगा' का नाम दिया गया
आपने भी अपने घर, दफ्तर, कार या बाइक, सड़कों, चौराहों पर भारत का झंडा लगाया होगा। सरकार की दलील थी कि राष्ट्रीय ध्वज के साथ नागरिकों का व्यक्तिगत से ज्यादा औपचारिक और संस्थागत रिश्ता है। सरकार को लगता है कि 'हर घर तिरंगा' अभियान के बाद यह संबंध ज्यादा व्यक्तिगत हो सकेगा। दोनों के बीच इस अभियान के साथ नागरिकों का तिरंगे के साथ रिश्ता और गहरा होगा। देशभक्ति की भावना इससे और मजबूत होगी।

तिरंगे को लेकर भारत सरकार ने जारी किया था पत्र
'हर घर तिरंगा' अभियान में देशवासियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा भी लिया। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT के मुताबिक, इस साल 15 अगस्त के मौके पर देश भर में व्यापारियों ने अलग-अलग साइज के 10 करोड़ झंडे बेचे। झंडे का कुल व्यापार करीब 500 करोड़ का हुआ।

जाहिर है इतनी बड़ी मात्रा में झंडों की बिक्री हुई है, तो उन्हें सहेज कर रखना भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है। तिरंगा भारतीयों की आन-बान-शान का प्रतीक है। इस वजह से जागरूक जनता और विपक्ष सवाल पूछ रही है कि 15 अगस्त के बाद इन झंडों का क्या करना है?

अखिलेश यादव ने उठाया सवाल

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्विटर पर एक पोस्टर शेयर किया है। इसमें लिखा है, ''15 अगस्त के बाद झंडे का क्या? घबराने की जरूरत नहीं है। ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज, लखनऊ के पास इसका समाधान है। हम राज्य भर के अलग-अलग शहरों के रिहायशी इलाकों, घरों, दूसरे संस्थानों, सड़कों से जमा किए झंडे इकट्ठा कर रहे हैं। आप चाहें, तो इस्तेमाल किए हुए झंडे डाक से भेज सकते हैं। चाहें तो उनके कॉलेज के गेट पर भी जमा कर सकते हैं।''

यूपी में झंडे के कलेक्शन को लेकर क्या किया जा रहा है?

  • लखनऊ के जिला अधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने बताया कि किसी तरह की समस्या नहीं है। किसी भी सरकारी ऑफिस में आम नागरिक झंडा जमा करा सकता है।
  • ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज की प्रिंसिपल आश्रिता दास ने बताया कि शहर वासी विद्यालय के कार्यालय में इसको जमा करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि वॉट्सऐप नंबर 6307609503 पर भी जानकारी ले सकते हैं।
  • अगर राष्ट्र ध्वज अच्छी स्थिति में हुआ, तो उसे दोबारा इस्तेमाल करने के लिए सहेज कर रखा जाएगा। अगर कटा-फटा हुआ, तो उसे सम्मान के साथ डिस्पोज किया जाएगा। इस महीने के अंत तक इसे स्वीकार किया जाएगा।
  • लखनऊ नगर निगम के नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने बताया कि सभी जोनल अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं। अगर कोई जोनल ऑफिस पर आकर झंडा देता है, तो वह उसे लेकर सम्मान के साथ रख लें।
  • इंडियन ऑयल कंपनी के यूपी प्रमुख संजीव कक्कड़ ने बताया कि कंपनी के पेट्रोल पंप पर 19 अगस्त को झंडे जमा किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम भी इस काम में सहयोग कर रहा है।

क्या हैं नियम?

  • भारतीय झंडा संहिता, 2002 में बनी थी। इसमें 2021 में कुछ बदलाव किया गया। फ्लैग कोड के तहत झंडा अगर फट जाए या मैला हो जाए, तो उसे एकांत में पूरी तरह नष्ट कर दिया जाए। बेहतर होगा कि उसे जला कर या मर्यादा के अनुकूल नष्ट कर दिया जाए।
  • भारतीय ध्वज संहिता, 2002 (Flag Code 2022) को 20 जुलाई, 2022 के संशोधन के बाद जहां ध्वज खुले में प्रदर्शित किया जाता है। या किसी नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है। वहां इसे दिन-रात फहराया जा सकता है।
  • पहले तिरंगे को सूर्योदय से सूर्यास्त तक लगाने की इजाजत थी।

तिरंगे का अपमान करने पर क्या है सजा?
कोई व्यक्ति राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करते, इसे जलाते, दूषित करते, कुचलते या नियम विरुद्ध ध्वजारोहण करते पाया जाता है, तो उसे तीन साल की जेल या जुर्माना हो सकता है। या फिर जेल और जुर्माना दोनों से दंडित किया जा सकता है।

ध्वजारोहण और तिरंगा फहराने में अंतर?
15 अगस्त को ध्वजारोहण किया जाता है, जबकि 26 जनवरी को तिरंगा फहराया जाता है। ध्वजारोहण और झंडा फहराने के बीच एक बड़ा अंतर है। जब तिरंगे को नीचे से रस्सी के माध्यम से खींचकर फहराया जाता है, तो इसे ध्वजारोहण कहते हैं। मगर, 26 जनवरी में तिरंगा ऊपर ही बंधा होता है, जिसे पूरा खोलकर फहराया जाता है। इसे झंडा फहराना कहते हैं।