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4 बड़े IAS पर भ्रष्टाचार का शिकंजा:योगी सरकार के मुख्य सचिव आरके तिवारी का भी नाम, चहेती फर्मों को ठेका देने का आरोप; नूतन ठाकुर ने की शिकायत पर जांच के आदेश

लखनऊएक महीने पहले
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उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी सहित शासन के 4 आईएएस अफसरों पर जांच का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। इन पर चहेती फर्मों को मैनपॉवर सप्लाई का ठेका दिलाकर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा है। यह आरोप सोशल एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने लगाया है। नूतन की तरफ से पेश किए गए साक्ष्य देखने के बाद नियुक्ति विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं।

नूतन ठाकुर ने 13 जनवरी को मुख्य सचिव आर के तिवारी और पूर्व अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दूबे के खिलाफ शिकायत भेजी थी। यह इनके द्वारा कथित रूप से मुन्ना तिवारी मेसर्स हर्ष इंटरप्राइजेज को मेडिकल कॉलेज मैनपावर सप्लाई में कथित अनियमितता के संबंध में था।

इसमें हर्ष इंटरप्राइजेज के मालिक मुन्ना तिवारी के आर के तिवारी के करीबी रिश्तेदार होने और इस कारण बदायूं मेडिकल कॉलेज में बिना सरकारी अग्रीमेंट के मैनपावर का काम करने व इसके एवज में बदायूं मेडिकल कॉलेज द्वारा उनके फर्म को करोड़ों रुपए का भुगतान किए जाने के आरोप हैं।

फर्म में तैनात कर्मचारियों को वर्षों से ईएफ, ईपीएफ नहीं दिया जा रहा है

यह भी आरोप है कि कन्नौज मेडिकल कॉलेज में जेम निविदा संख्या GEM/2020-B/906730 दिनांक 06/12/2020 को वेबसाइट पर अपलोड किया गया, जिसमें 21 निविदा प्राप्त हुईं। इसमें 18 निविदा को टेक्निकल अर्हता के नाम पर बाहर कर दिया गया और मुन्ना तिवारी से जुड़ी 3 फर्म को ही योग्य माना गया। इनमें हर्ष इंटरप्राइजेज, रॉयल टेक मैनेजमेंट और वाजपेयी ट्रेडर्स के टेंडर डालने के एक घंटे के भीतर मुन्ना तिवारी से जुडी इन 3 कंपनियों ने टेंडर डाला।

इनके अतिरिक्त शेष 18 फर्म को षडयंत्र के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया। शिकायत के अनुसार मुन्ना तिवारी के फर्म में तैनात कर्मचारियों को वर्षों से ईएफ, ईपीएफ नहीं दिया जा रहा है और न ही सरकारी खातों में जमा किया जा रहा है। शिकायत पत्र में बदायूं, जालौन, मेरठ, आगरा और अन्य स्थानों पर भी उन्हीं फर्म को ही मैनपावर सप्लाई मिलने का काम तय होने की बात अंकित है।

कैग की ऑडिट रिपोर्ट पर भी नहीं हुई कार्रवाई

नूतन ने 15 जनवरी को भेजे गए शिकायत पत्र में कहा कि निदेशक, आतंरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा द्वारा सचिव, चिकित्सा शिक्षा अनुभाग-1 को मेसर्स हर्ष इंटरप्राइजेज से संबंधित तमाम तथ्य अंकित हैं, जो मेसर्स हर्ष इंटरप्राइजेज की अनियमितताओं को स्पष्ट करता है। आतंरिक लेखा द्वारा दी गयी आख्या पर कोई कार्यवाही नहीं होना हर्ष इंटरप्राइजेज को उच्चस्तरीय संरक्षण के तथ्यों को सामने लता है।

सीएमओ की पोस्टिंग में भी खूब भ्रष्टाचार

10 जनवरी को की गई शिकायत मेसर्स अवनी परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ के संबंध में है। इसमें कंपनी के मालिक अज्ञात गुप्ता द्वारा मोटी रकम लेकर तथा उसका एक हिस्सा सिद्धार्थनाथ सिंह और आईएएस प्रशांत त्रिवेदी को देकर अप्रैल 2017 से सितम्बर 2019 तक प्रदेश के तमाम सीएमओ की पोस्टिंग कराए जाने का आरोप है।

ओएसडी से नजदीकियां दिलाती रही ठेके

आरोप है कि अज्ञात गुप्ता की मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्त ओएसडी अभिषेक कौशिक से नजदीकी होने और इस कारण इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी इन्हें अभिषेक कौशिक के दवाब में लगातार स्वास्थ्य विभाग, विद्युत् विभाग, परिवहन विभाग, मेडिकल कॉलेज आदि में मैनपावर का काम मिलते रहने की शिकायत है। अवनी परिधि द्वारा संबंधित विभागों से एडवांस सैलरी लेने और पीएफ, जीएफ का भुगतान तक नहीं किया गया। बावजूद इसके मेरठ मेडिकल कॉलेज के जेम बिड संख्या GEM/2021/B985085 दिनांक 20/01/2021 का काम भी अवनी परिधि को ही दिया गया।

एमडी मांगते रहे फर्म ने नही दिया लेनदेन का ब्यौरा

लघु उद्योग निगम के तत्कालीन एमडी हीरालाल द्वारा मेसर्स अवनी परिधि को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मार्च 2018 के बाद से बार-बार अवसर दिए जाने के बाद भी अवनी परिधि ने न तो वित्तीय वर्षवार कार्मिकों की सूची प्रस्तुत की और न कुल भुगतान की धनराशि प्रस्तुत की। इसी तरह अवनी परिधि ने वर्षवार व देयक वार वाणिज्य कर, जीएसटी, सर्विस टैक्स, ईपीएफ, ईएसआई, आयकर आदि के भुगतान की स्थिति भी स्पष्ट नहीं किया। उसके द्वारा अपने खातों से संबंधित बैंक स्टेटमेंट तक नहीं उपलब्ध कराये गए।

एमडी के पत्र में कहा गया कि ईपीएफ तथा ईएसआई विभाग द्वारा इस कंपनी के भ्रष्टाचार आदि के संबंध में कार्रवाई की जा रही है। जिसके संबंध में कंपनी ने भी अपनी अनियमितताओं को स्वीकार किया गया है। एमडी के पत्र में यह भी अंकित है कि अवनी परिधि के कुकृत्यों के कारण हाई कोर्ट में तमाम जनहित याचिकाएं तथा अन्य याचिका दायर हुई हैं, जिससे निगम को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। साथ ही निगम की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। पत्र में कहा गया है कि उपरोक्त समस्त कारणों से लघु उद्योग निगम द्वारा अवनी परिधि को भविष्य में पंजीकरण हेतु प्रतिबंधित करते हुए काली सूची में डाला जाता है।

इस पत्र की प्रतिलिपि चिकत्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित तमाम अन्य संबंधित प्राधिकारियों को प्रेषित की गयी है। इन सबके बावजूद उक्त अधिकारी इन कम्पनियों को ठेका दिलवाते रहे। आरोप है कि यह अधिकारी इन कम्पनियों में हिस्सेदार हैं। नूतन ठाकुर की शिकायत का संज्ञान लेकर सरकार ने इन अफसरों के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं।

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