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  • It Is Alleged That Due To Non implementation Of The Report Of National Backward Commission, Corruption Was Done In More Than 20 Thousand Seats.

88 वें दिन भी OBC अभ्यर्थियों का धरना जारी:आरोप है कि राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट लागू न करने से 20 हजार से ज्यादा सीट पर भ्रष्टाचार किया गया

लखनऊ9 दिन पहले
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राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग कर धरना दे रहे अभ्यर्थी। - Dainik Bhaskar
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग कर धरना दे रहे अभ्यर्थी।

69000 शिक्षक भर्ती मामले में ओबीसी और एसी वर्ग के अभ्यर्थियों का धरना लगातार 88 वें दिन जारी रहा। बारिश और खराब मौसम बाद भी अभ्यर्थी धरना स्थन छोड़ने को तैयार नहीं है। वहीं, दूसरी तरफ 26 सितंबर तक मांग पूरी न होने पर आंदोलनकारी पहले ही 27 को विधान भवन घेराव की चेतावनी जारी कर चुके हैं। आरोप है कि शिक्षक भर्ती मामले में दूसरे वर्ग को फायदा देने के लिए ओबीसी और एसी वर्ग के नियमानुसार आरक्षण नहीं दिया गया है।

पूरे मामले में 20 हजार से ज्यादा सीटों में भ्रष्टाचार किया गया है। इसको लेकर जांच बैठी थी, इसमें राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग ने भी भ्रष्टाचार को सही पाया है। अब अभ्यर्थी पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग को लेकर पिछले 88 दिन से धरना दे रहे हैं। ओबीसी एससी संगठित मोर्चा के विजय यादव ने उनकी सीट दूसरे समुदाय के लोगों को दे दी गई है। इसकी वजह से वह लोग नौकरी से वंचित हैं।

27 और 21 फीसदी की मांग कर रहे हैं

प्रदर्शनकारी ओबीसी में 27 फीसदी और एससी में 21 फीसदी आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग की अनदेखी की वजह से भर्तियां नहीं हो पा रही हैं। इसको लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग अपनी रिपोर्ट दे चुका हैं। इसमें धांधली की बात सामने आई थी। लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। थक हारकर हमें मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ रहा है। हम तब तक प्रदर्शन करेंगे। जब तक हमारी मांगों को मान नहीं लिया जाएगा।

इन सवालों को लेकर हो रहा आंदोलन

सवाल एक - 69000 शिक्षक भर्ती में ओबीसी को 27 प्रतिशत के स्थान पर उनके कोटे में 3.86 प्रतिशत आरक्षण क्यों?

सवाल दो - भर्ती में दलित वर्ग को 21 प्रतिशत के स्थान पर उनके कोटे में 16.6 प्रतिशत आरक्षण क्यों?

सही आरक्षण नियमावली लागू करने पर अड़े अभ्यर्थी

अभ्यर्थी 27 और 21 फीसदी आरक्षण लेने पर पड़े हैं। दलील है कि आरक्षण नियमावली बेसिक शिक्षा विभाग उप्र 1994 का सही ढंग से पालन न होने की वजह से 20000 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी चयन से वंचित हो गए। संविधान से मिले आरक्षण के अधिकार 27 प्रतिशत और 21 प्रतिशत को पूरी तरह से लागू किया जाए।

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