कौन बन सकता है अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष:अखाड़े के सदस्य के साथ एक पीठ का महंत होना जरूरी, अखाड़ों की बैठक में होता है तय

लखनऊ/ प्रयागराज4 महीने पहले
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प्रयागराज में हुए अखाड़ा परिषद की बैठक की फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रयागराज में हुए अखाड़ा परिषद की बैठक की फाइल फोटो।

महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष कौन होगा, इसको लेकर कयास लगने शुरू हो गए है। अखाड़ा परिषद की बैठक में यह तय होगा कि अध्यक्ष पद के लिए सबसे उपयुक्त कौन महंत होगा। इसको लेकर जल्द ही बैठक होने की उम्मीद है। हालांकि अभी तक अध्यक्ष को लेकर कुंभ मेले के आयोजन के दौरान होने वाली बैठक में इसका निर्णय लिया जाता रहा है। अध्यक्ष पद के दावेदार को इन मानकों को पूरा करना जरूरी होता है।
अध्यक्ष पद के लिए किसी मठ का महंत होना अनिवार्य
अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बनने के लिए किसी मठ का महंत होने के साथ किसी अखाड़े का सदस्य होना अनिवार्य होता है। इसके बाद अखाड़ा परिषद के सदस्य और अन्य पदाधिकारी सर्वसम्मति से अध्यक्ष को चुनते हैं। अध्यक्ष पद का कोई कार्यकाल तय नहीं होता है। धर्म-अध्यात्म के वरिष्ठ पत्रकार भव्य श्रीवास्तव ने बताया कि अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष अधिकतर उन्हें चुना जाता है जिसकी संत समाज और प्रशासनिक दोनों स्तर पर पकड़ होती है। कुंभ मेले के आयोजन से लेकर संत समाज की हर छोटी-बड़ी जरूरतों को सरकार व प्रशासन तक पहुंचाना और उसका निस्तारण कराना उसकी जिम्मेदारी होती है। वहीं परिषद की समिति किसी भी पदाधिकारी को अविश्वास प्रस्ताव लाकर हटा सकती है। जैसे 2010 में कुंभ के दौरान महंत ज्ञानदास जी को हटाकर महंत नरेंद्र गिरि जी को अध्यक्ष बना दिया गया।
अखाड़ा परिषद के उपाध्यक्ष कभी भी बुला सकते हैं बैठक
महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद से ही चर्चा है कि जल्द ही अखाड़ा परिषद के उपाध्यक्ष महंत हरि गिरि अध्यक्ष पद को लेकर बैठक बुला सकते हैं। वैसे अध्यक्ष पद के लिए कुंभ के दौरान बैठक होती है। जहां परिषद के पदाधिकारी व सदस्य अगले अध्यक्ष के लिए चर्चा करने के बाद कोई निर्णय ले सकते हैं।

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