यूपी में RLD का जाट-मुस्लिम एकता प्लान:15 सितंबर के बाद लखनऊ में जयंत चौधरी 'भाईचारा जिंदाबाद' सम्मेलन करेंगे, हिंदू-मुस्लिमों को एक मंच पर लाने पर जोर

लखनऊ9 महीने पहलेलेखक: विनोद मिश्र
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राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने मुस्लिम-जाट-यादव और दलितों को साधने के लिए पूरे प्रदेश में 'भाईचारा जिंदाबाद' कार्यक्रम चलाने का फैसला लिया है। सितंबर के मध्य यानी 15 तारीख के बाद जयंत चौधरी लखनऊ में सम्मेलन करेंगे। इसका मकसद हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने वालों को 2022 में वोट की चोट देना है।

दरअसल, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पश्चिमी यूपी में धार्मिक और जातीय ताना-बाना बिगड़ गया। राष्ट्रीय लोक दल ने चुनाव से पहले जातियों को साधने के लिए पश्चिमी यूपी में 'भाईचारा जिंदाबाद' सम्मेलन कराया। जिसके तहत अब तक करीब 300 छोटे-बड़े सम्मेलन पश्चिमी यूपी के गांवो और शहरों में हो चुके हैं। इस सम्मेलन में सभी जाति और धर्म के लोगों को बुलाया जाता है, ताकि उनके बीच के जातीय समीकरण ठीक कर भाईचारा बढ़ाया जा सके। अब इसे पूरे प्रदेश में आयोजित करने का प्लान है।

पश्चिमी यूपी में राष्ट्रीय लोक दल करीब 300 भाईचारा जिंदाबाद सम्मेलन कर चुकी है।
पश्चिमी यूपी में राष्ट्रीय लोक दल करीब 300 भाईचारा जिंदाबाद सम्मेलन कर चुकी है।

जाट-मुस्लिम के साथ ही सभी जातियों को जोड़ने का मकसद

रालोद के इस सम्मेलन में सभी जातियों को आमंत्रित किया जाता है। रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम मिश्रा का कहना है कि 'भाईचारा जिंदाबाद सिर्फ हिंदू और मुसलमान के लिए नही है। दरअसल, हिंदूओं और मुसलमानों के अंदर भी जातिगत विभाजन है। इसे तोड़ने की पहल किसी नेतृत्व को करनी होगी। जयंत चौधरी भी यही कोशिश कर रहें है। वो बंटवारे कि सियासत नही करते। हमारी कोशिश सबको जोड़े की है, और यह इन्हें बांट कर सियासत करने वालों को करारा जवाब होगा।' यह सम्मेलन हर गांव और शहर में हो रहा है और इसे भरपूर जन समर्थन भी मिल रहा है।

जयंत चौधरी लखनऊ से करेंगे पूरे यूपी के लिए आगाज

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम मिश्रा ने बताया की 'मिड-सितबंर महीने में रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी लखनऊ में एक भाईचारा जिंदाबाद का कार्यक्रम करेंगे। पश्चिमी यूपी की सफलता के बाद यूपी के बाकी हिस्सों से भी इसकी मांग आ रही है।

इतना ही नही यूपी के बाहर उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर से भी भाईचारा सम्मेलन के लिए प्रस्ताव आएं है। पार्टी उन पर भी विचार कर रही है। फिलहाल रालोद का समाजवादी पार्टी से गठबंधन है, लेकिन पार्टी की तैयारी पूरे उत्तर-प्रदेश में एक मजबूत विपक्ष बनने की भी है।'

राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम मिश्रा ने कहा, पश्चिमी यूपी के बाद अब भाईचारा जिंदाबाद का दायरा पूरे देश में फैल रहा है। उत्तरखंड और जम्मू-कश्मीर से भी प्रस्ताव आ रहे हैं।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम मिश्रा ने कहा, पश्चिमी यूपी के बाद अब भाईचारा जिंदाबाद का दायरा पूरे देश में फैल रहा है। उत्तरखंड और जम्मू-कश्मीर से भी प्रस्ताव आ रहे हैं।

पश्चिमी यूपी में जाट Vs मुस्लिम

रालोद के सीनियर नेता ने बाताया कि राज्य में जाटों की आबादी करीब 6 से 7 फीसदी तक है और इनका प्रभाव खास तौर पर वेस्ट यूपी के 100 से 120 विधानसभा सीटों पर है। वही वेस्ट यूपी में मुस्लिम आबादी भी करीब 25 फीसदी है। जबकि दलितों की आबादी पश्चिमी यूपी में 20 फिसदी मानी जाती है। रालोद का यूपी में सपा के साथ गठबंधन भी है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता कहते है कि अगर हम जाट, मुस्लिम, दलित और यादव को एक साथ जोड़ने में कामयाब हो गए तो, फिर पश्चिमी यूपी में बाकी विपक्षी दलों की सूपड़ा साफ हो जाएगा। पश्चिमी यूपी में जाट, मुस्लिम, दलित और यादव का कंबिनेशन करीब 50 से 55 फिसदी के बीच है।

मुजफ्फरनगर दंगों ने पश्चिमी यूपी का जातिय समीकरण विगाड़ा

अगस्त 2013 में पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगे हुए थे। जिसने खासतौर पर जाट और मुसलमानों के बीच गहरी खाई पैदा कर दी थी। इस दंगे में करीब 62 लोगों की मौत हुई थी, 93 लोग जख्मी हुए थे, जबकी करीब 40,000 लोगों को बेघर होना पड़ा था। भाजापा ने इस दंगे को समाजवादी पार्टी के खिलाफ महौल बनाया और 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव के साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को इसका फायदा भी मिला।

जाटों के बड़े नेता माने जाने वाले तत्कालीन रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित चौधरी और बेटे जयंत चौधरी भी अपने गढ़ बागपत और मथुरा का चुनाव हार गए थे। अब पार्टी इस भाईचारा जिंदाबाद सम्मेलन के जरिए एक बार फिर अपने गढ़ को जातिय समीकरणों के बहाने मजबूत करने में जुटी है।

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