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कल, आज, कल (दैनिक भास्कर की विशेष सीरीज):किसानों के युवा नेता जयंत; 20 साल बाद होंगे वैचारिक गुरु, जलवायु परिवर्तन पर इंटरनेशनल लेवल पर करेंगे काम

लखनऊ9 महीने पहले
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जाटलैंड यानी पश्चिमी यूपी में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विरासत संभाल रहे जयंत किसानों के लिए बड़े काम करेंगे। 20 साल बाद जलवायु परिवर्तन के लिए इंटरनेशनल लेवल पर आवाज बुलंद करेंगे। वो एक वैचारिक गुरु की तरह हो सकते हैं। किसानों के हक की बात करेंगे। दैनिक भास्कर की विशेष सीरीज 'कल, आज, कल' प्रस्तुति के लिए मशहूर ज्योतिषाचार्य नस्तूर बेजान दारुवाला ये भविष्यवाणी करते हैं।

वो कहते हैं कि जयंत का जन्म 23 दिसंबर 1978 को हुआ था। जिसका अंक जोड़ 9 आता है। मतलब ये है कि वो सबको साथ लेकर चलने वाले नेता हैं। आने वाले वक्त में वह अपने पिता अजीत चौधरी का नाम रोशन करेंगे। उनकी कुंडली में बुध के साथ उच्च का राहू और शुक्र है। उनके 5 साल बहुत अच्छे हैं। लेकिन उन्हें सेहत का ध्यान रखना होगा।

10 साल के बाद जलवायु परिवर्तन पर लोगों के बीच अलख जगाने का काम शुरू कर सकते हैं। एक वक्त पर अखिलेश के साथ मिलकर भारत का प्रधानमंत्री बनाने में मददगार होंगे। वो पॉलिटिकल थिंक टैंक की तरह हैं। उनकी कुंडली का केतु उनका राजनीतिक जीवन लंबा कर रहा है। वह 20 साल बाद भी प्रासंगिक रहेंगे। चौधरी चरण सिंह की तरह किसानों के लिए बहुत काम करेंगे।

विधानसभा चुनाव 2022 में भास्कर प्रतिदिन दिग्गज नेताओं के कल, आज, कल के बारे में आपको बताएगा। इस प्रस्तुति में आने वाले कल में रालोद प्रमुख जयंत चौधरी की तस्वीर को फोटोशॉप की मदद से तैयार किया गया है।

  • 27 दिसंबर 1978 को उनका जन्म टेक्सास में हुआ था।
  • लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई पूरी की।
  • अकाउंटिंग और फाइनेंस में MSC की डिग्री हासिल की है।
  • राजनीति में वह पिता अजीत चौधरी को गुरु मानते हैं।
  • 2009 में सिर्फ 30 साल की उम्र में वो 'बिना किसी संघर्ष के' संसद पहुंचे।
  • 2012 में वो मांट सीट से विधायक का चुनाव जीते थे।
  • 15वीं लोकसभा चुनाव में वह मथुरा से सांसद चुने गए।
  • 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जाट वोट रुठने से उन्हें पॉलिटिकल काफी नुकसान हुआ।
  • 2014 में वह मथुरा सीट से हेमा मालिनी से हार गए थे।
  • 2019 का लोकसभा चुनाव भी वो हार गए थे।
  • उनकी शादी चारु सिंह से हुई। जोकि एक डिजाइनर हैं। उनकी दो बेटियां हैं।
  • 2020 में वह हाथरस में रेप पीड़िता के घर पहुंचे थे। जिसके बाद वह कोविड पॉजिटिव हो गए।
  • उनके पिता चौधरी अजीत सिंह की 6 मई 2021 को गुरुग्राम में कोविड-19 से मृत्यु हो गई।
  • किसानों के प्रदर्शन ने समाप्ति की ओर बढ़ चुके रालोद को एक 'पॉलिटिकल माइलेज' दिया।
  • 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले रालोद का सपा से गठबंधन हुआ।
  • पश्चिमी यूपी में 29 सीटों पर उन्होंने प्रत्याशी घोषित किए हैं।

4 चुनौतियां, जिनसे उभरकर जयंत को अपनी जमीन करनी है मजबूत...

पहली चुनौती : सपा के साथ गठबंधन एक पॉलिटिकल ट्रायल है। जिसका सफल होना उनके पॉलिटिकल करियर के लिए जरूरी है। सीटों पर सहमति जयंत के हिसाब से ही हुई है।
दूसरी चुनौती : जाट-मुस्लिम वोट बैंक को अपनी तरफ कितना ला पाते हैं। जिला पंचायत चुनाव में 9 मुस्लिम उम्मीदवार के साथ चुनाव लड़ा। लेकिन जाट वोट ट्रांसफर नहीं हुआ था।
तीसरी चुनौती : किसान आंदोलन के सहारे जयंत महंगाई, बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था को मुद्दा बना रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन ने खुलकर अब तक रालोद का समर्थन नहीं किया है।
चौथी चुनौती : रालोद का लोकसभा और विधानसभा में कहीं भी प्रतिनिधित्व नहीं है। 2017 में विस चुनाव में सिर्फ छपरौली से एक विधायक चुना गया था। उसने भी बीजेपी का दामन थाम लिया।

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