मनीष हत्याकांड...एनकाउंटर कर सिपाही से इंस्पेक्टर बने जेएन सिंह:नगद नारायण के नाम से चर्चित जगत नारायण, गोरखपुर में फेमस है इनका ये डॉयलाग- ओ मिस्टर...आई एम इंस्पेक्टर...हू आर यू?

गोखरपुर/लखनऊ9 महीने पहले
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प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता हत्याकांड में आरोपी इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह अपने कारनामों को लेकर अक्सर चर्चा में रहे हैं। साल 2017 से गोरखपुर में पोस्ट रहे जगत नारायण जिले में 'नगद नारायण' के नाम से फेमस हैं। उनका एक सीधा फंडा रहा है- 'मेरा कोई सगा नहीं, जिसको मैंने ठगा नहीं।' यहां तक उनके परिचितों के मोबाइल में भी उनके नंबर 'नगद नारायण के नाम से ही सेव होते हैं।

वजह यह है कि सामने वाला उनका चाहे कितना भी खास हो, लेकिन वे बिना कुछ लिए किसी काम में अपना हाथ नहीं डालते। ऐसे एक नहीं बल्कि कई मामलों में तो इंस्पेक्टर ने जिले के पुलिस कप्तानों को भी चैलेंज किया है। इन मामलों में पीड़ितों ने अधिकारियों से शिकायत भी कर रखी है।

वहीं, पुलिस विभाग के जुड़े जानकारों के मुताबिक, इंस्पेक्टर जेएन सिंह अपने एनकाउंटर की बदौलत ही सिपाही से आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर की कुर्सी तक पहुंचे हैं। STF में रहने के दौरान भी उन्होंने करीब 9 बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया है।

कोडवर्ड में करता था बात
वहीं, उनका एक पेट डॉयलाग (तकिया कलाम) भी गोरखपुर जिले में काफी चर्चित रहा है। वो हर किसी को चुटकी बजाकर कहते सुने जाते हैं- 'ओ मिस्टर...आई एम इंस्पेक्टर...हू आर यू?' वो अक्सर खुश होकर अपने कारनामों की कहानियां भी सुनाते हैं।

कहते हैं कि मुझसे कोई सिफारिश न करना...'मैं बिना वांछित के कोई काम नहीं करता।' वांछित यानी कि (रुपयों के)। मैं जिले में सिर्फ दो लोगों की ही सुनता हूं। बाकी किसी की नहीं। ऐसे ही इंस्पेक्टर नहीं बना हूं। घाट- घाट का पानी पीकर सिपाही से आउट ऑफ टर्म प्रमोशन मिला है।

एनकाउंटर के शौकीन हैं इंस्पेक्टर जेएन सिंह
वहीं, रामगढ़ ताल इंस्पेक्टर जेएन सिंह एनकाउंटर के शौकीन हैं। गोरखपुर जिले में कार्यकाल के दौरान उन्होंने यहां अब तक 4 बदमाशों के पैर में गोली मारी है। सिकंदर को गोली मारने से पहले उन्होंने रामगढ़ ताल में ही अमित हरिजन को गोली मारकर गिरफ्तार किया था। जबकि बांसगांव इंस्पेक्टर रहते हुए शातिर बदमाश राधे यादव और झंगहा इंस्पेक्टर रहते हुए हरिओम कश्यप को भी पैर में गोली मारी थी।

पुलिस विभाग के जुड़े जानकारों के मुताबिक, इंस्पेक्टर जेएन सिंह अपने एनकाउंटर की बदौलत ही सिपाही से आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर की कुर्सी तक पहुंचे हैं। STF में रहने के दौरान भी उन्होंने करीब 9 बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया है।

इंस्पेक्टर पर तीसरी बार लगा है पीटकर मारने का आरोप

रामगढ़ ताल पुलिस पर किसी को पीटकर मार डालने का आरोप कोई नई बात नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई बार ऐसे आरोप लगते रहे हैं। 13 अगस्त को भी रामगढ़ ताल पुलिस पर 20 साल के गौतम सिंह की पुलिस कस्टडी में संदिग्ध मौत हुई थी। हालांकि, बाद में पुलिस ने केस दर्ज किया था।

जिसमें लिखा था कि गायघाट में प्रेमिका से मिलने गए युवक की लड़की के परिवार वालों ने पीटकर हत्या कर दी, जबकि परिजनों का आरोप था कि पुलिस की पिटाई से ही युवक की ​मौत हुई है।

इसी तरह से बांसगांव में इंस्पेक्टर रहने के दौरान 7 नवंबर 2020 को भी जेएन सिंह पर गंभीर आरोप लगे थे। बांसगांव थाने में विशुनपुर निवासी मुन्ना प्रसाद के बेटे शुभम उर्फ सोनू कुमार के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज था।

पुलिस ने उसे 11 अक्टूबर 2020 को डिघवा तिराहे से गिरफ्तार कर लिया। जेल भिजवा दिया। 7 नवंबर को जेल में उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस की पिटाई से शुभम की मौत का आरोप लगा था। तत्कालीन चौकी इंचार्ज को सस्पेंड किया गया था।

होटल में ठहरने वालों को पहले भी टारगेट कर चुकी है पुलिस

रामगढ़ ताल पुलिस अपने कारनामों को लेकर पहले भी चर्चा में रही है। 11 जुलाई 2021 को 8 बदमाशों को गायघाट लहसड़ी फोरलेन अंडर पास से पुलिस की टीम ने दबोचा था। पुलिस का दावा था कि यह गैंग शहर में डकैती की बड़ी योजना बना रहे थे।

बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग भी की, लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि बदमाशों के पास से पुलिस ने कुछ भी बरामद नहीं किया था। जबकि गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने खुद दावा किया था कि वह शहर के एक होटल में ठहरे थे और वे गोरखपुर किसी से मिलने आए आए थे। पकड़े गए बदमाशों में अधिकांश गांधीनगर गुजरात के थे।

जिस पर नहीं थे एक भी केस, उसे मुठभेड़ में मारी थी गोली

21 अगस्त 2021 को क्राइम ब्रांच और रामगढ़ ताल थाने की पुलिस ने एक बदमाश सिकंदर को मुठभेड़ के दौरान गोली मारी थी। पुलिस का दावा था कि सिकंदर ने ही 16 अगस्त की दोपहर में कैश मैनेजमेंट सिस्टम के कर्मचारी नवनीत मिश्रा की आंखों में मिर्च पाउडर झोंक कर 5.28 लाख रुपए लूट की थी। पुलिस ने उसके पास से लूट के 1.50 लाख रुपए, घटना में इस्तेमाल बाइक और 315 बोर का एक तमंचा बरामद किया था।

जबकि इस घटना के 4 दिन पहले ही यह बात सामने आ चुकी थी कि पुलिस ने एक मुखबिर को थाने में बैठा रखा है। खास बात यह है कि मुठभेड़ के बाद ही सिकंदर पर पहला केस भी दर्ज हुआ। इससे पहले उसपर किसी तरह का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।

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