अयोध्या-काशी में भव्य मंदिर निर्माण जारी, अब मथुरा की तैयारी:डिप्टी CM केशव मौर्या बोले- सारा काम जनता के आशीर्वाद से हो रहा, विपक्ष का पलटवार- काम किया नहीं, चुनाव में गुमराह करेंगे

लखनऊ2 महीने पहले

यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लिखा "अयोध्या-काशी में भव्य मंदिर निर्माण जारी है, मथुरा की तैयारी है' सोशल मीडिया पर किए पोस्ट के बाद अलग-अलग चर्चा शुरु हो गई है। इससे पहले अयोध्या में 3 नवंबर को संतों के बीच केशव ने अपने भाषण में पुराने नारे की याद दिलाई और कहा था कि, 'अयोध्या हुई हमारी है, अब मथुरा, काशी की बारी है, ये सारा काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और जनता के आशीर्वाद से हो रहा'। उन्होंने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में भी यह बात दोहराई थी कि अब मथुरा की बारी है।

विपक्ष बोला- ये तो पहले से तय था चुनाव में ये गुमराह करेंगे
कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत का कहना है कि, घी में सवारियां रोटियां बड़ी बहू का नाम ये कहावत सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अयोध्या के भव्य राम मंदिर का सभी लोगों ने स्वागत किया। लेकिन चुनाव आते आते भारतीय जनता के लोग अपनी हार के डर से कुछ भी बौखलाते जा रहे है। केशव प्रसाद मौर्य मानसिक स्थिति संभाले रखिएं। ये बताइ रोजगार कहा है, महिलाएं क्यों खुद को अपमानित हो रही है। लोगों के बताइयें पिछड़ो को हक क्यों नहीं दिये जा रहे है।
सपा के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया का कहना है कि, हमने पहले ही कहा जब भारतीय जनता पार्टी को हार का डर सताने लगेगा। तो जनता का ध्यान भटकाने के लिए जाति धर्म की राजनीति शुरु कर दी है। अब वहीं उन्होंने शुरु कर दी है। लेकिन किस तरीके से महंगाई किस तरह की बेरोजगारी है। लेकिन यह तय है कि, 2022 के चुनाव में सपा की बनेगी।

सीएम योगी ने अयोध्या में दिया था मथुरा पर बयान
बीते 3 नवम्बर को दीपावली की पूर्व संध्या पर आयोजित भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में कहा था कि, ‘पहले कार सेवकों पर गोलियां चली थीं, अब की बार पुष्प-वर्षा होगी।

सीएम के इस बयान के बाद से सियासी गलियारों में इस बात को लेकर जबरदस्त चर्चा है कि आखिर योगी कहां कार सेवा करने की बात कर रहे हैं, क्योंकि अयोध्या में तो राम मंदिर का निर्माण अपने चरम पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के पूरे बयान से मिले इशारों से यह साफ हो गया है कि राम की नगरी अयोध्या के बाद इस बार कृष्ण की नगरी मथुरा के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जाएगा।

मथुरा में क्या है पूरा विवाद
भगवान श्रीकृष्ण के लाखों-करोडों भक्त मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में मुगल शासक औरंगजेब के कार्यकाल में बने शाही ईदगाह मस्जिद को वहां से हटाने की मांग की करते रहे हैं। मथुरा जिला सिविल न्यायालय में याचिका भी दायर की गई है।

श्रीकृष्ण विराजमान की याचिका में 13.37 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक की मांग की गई है। यहां यह भी बता दें कि 6 कृष्ण भक्तों ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच 5 दशक पूर्व हुए समझौते को अवैध बताया। उसे निरस्त करने और मस्जिद को पूरी तरह से हटाकर पूरी जमीन मंदिर ट्रस्ट को सौंपने की मांग की है।

दायर याचिका में दावा किया गया है कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ (जो अब श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से जाना जाता है) और शाही ईदगाह मस्जिद के बीच जमीन को लेकर समझौता हुआ था। इसमें तय हुआ था कि मस्जिद जितनी जमीन में बनी है, बनी रहेगी। अब परिवादियों के अनुसार सेवा संघ की ओर से किया गया समझौता गलत है।