कुशीनगर एयरपोर्ट बनने से पर्यटन केन्द्र तक:हर साल 50 हजार के करीब आते है पर्यटक, 12 देशों के उपासक का है आना, बुद्ध पूर्णिमा के दिन हजारों में रहती संख्या

लखनऊ10 महीने पहले
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इसके अलावा हर साल जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड आदि देशों के इतिहासकार, शोधार्थी व पुरातत्वविद भी कुशीनगर की प्राचीनता को जानने आते हैं। - Dainik Bhaskar
इसके अलावा हर साल जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड आदि देशों के इतिहासकार, शोधार्थी व पुरातत्वविद भी कुशीनगर की प्राचीनता को जानने आते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूपी के पूर्वी क्षेत्र के जिले कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट उद्धाटन समारोह में बुधवार को पहुंचे। नरेन्द्र मोदी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि, भगवान बुद्ध के सभी तीर्थ स्थल, लुंबिनी, बोधगया, सारनाथ सब इसी क्षेत्र के आसपास है। यहीं कारण है कि ये श्रद्धा का केंद्र बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, रोड सहित सभी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलमेंट का काम हो रहा है। टूरिज्म के क्षेत्र में नया पहलू जुड़ गया है। बुधवार को एयरपोर्ट के शिलान्यास होने के बाद आइये जानते है कि, कुशीनगर में एयरपोर्ट बनने से पयर्टन और व्यापार का क्या हाल रहेगा और इससे पहले अभी तक क्या स्थिति रही।

12 देशों के बुद्ध के उपासक आते, 50 हजार प्रत्येक वर्ष
भगवान बुद्ध के उपासकों की संख्या श्रीलंका, थाईलैंड, जापान, वियतनाम, भूटान, म्यामांर, कम्बोडिया, मंगोलिया, सिंगापुर, लाओस, उत्तरी व दक्षिणी कोरिया समेत कई देशों के लोग शामिल है। पर्यटन अधिकारी गोरखपुर रेंज रविन्द्र कुमार के मुताबिक अभी कुशीनगर में हर साल 50 हजार से अधिक विदेशी पर्यटक आते हैं। इनमें श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड से करीब 70 प्रतिशत पर्यटक रहते है। इसके अलावा अन्य बौद्धिस्ट देशों के लोग शामिल होते हैं। इसके अलावा हर साल जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड आदि देशों के इतिहासकार, शोधार्थी व पुरातत्वविद भी कुशीनगर की प्राचीनता को जानने आते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर के रिश्ते बढे़ेगे, दो साल से था इंतजार कुशीनगर भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली है, इसलिए इस तीर्थ पर आने की मंशा हर बौद्ध अनुयायी की होती है। अब तक उन्हें देश के अलग अलग रास्तों से होकर यहां आना पड़ता था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन जाने से वे अब सीधे यहां पहुंच सकेंगे। जब बड़ी संख्या में ये बौद्ध मतावलंबी आएंगे तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के सांस्कृतिक संबंध और अच्छे होंगे। फिलहाल प्रदेश के तीसरे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ा। एयरपोर्ट का 3200 मीटर लंबा रनवे सबसे पहले बनकर तैयार हुआ है। इसके बाद पुराने टर्मिनल बिल्डिंग का जीर्णोद्धार कर उद्घाटन की तैयारी शुरू कर दी गई है। कोरोना संक्रमण के चलते कार्यक्रम टल गया। इस दरम्यान यहां नया एटीसी टॉवर और जर्मन फेब्रिक से नया टर्मिनल बिल्डिंग भी बन गई। एयरपोर्ट को सीधे कुशीनगर तक फोरलेन से जोड़ने के लिए 21 करोड़ की लागत से नई सड़क का भी निर्माण शुरू हो गया है।

पर्यटन क्षेत्र से सृजित होंगे रोजगार के अवसर, निवेश की संभावना भी बढ़ेगी
मजबूत एयर कनेक्टिविटी होने से कुशीनगर व आसपास के जिलों में निवेश की संभावना भी खूब बढ़ेगी। यूपी सरकार द्वारा किए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट सीधे विदेशियों की नजर में भी आएगा। जमीन और मानव संसाधन की सहज सुलभता के साथ प्रदेश सरकार की औद्योगिक विकास नीति से निवेशक यहां आने के लिए आकर्षित होंगे। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के क्रियाशील होने के साथ ही कुशीनगर के साथ ही आसपास के क्षेत्रों में भी पर्यटन विकास को बढ़ावा मिलेगा। बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली का दर्शन करने आने वाले विदेशी मात्र 50 किमी की दूरी पर स्थित गोरखपुर में विश्व प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर, खूबसूरत रामगढ़ताल, चिड़ियाघर आदि का भी भ्रमण करने आएंगे। विदेशी पर्यटकों की आमद बढ़ने से रोजगार के कई अवसर भी बढ़ेंगे।

कुशीनगर का इतिहास

  • -कुशीनगर, गोरखपुर से लगभग 53 किमी की दूरी पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यहीं पर गौतम बुद्ध ने अपने जीवन की आखिरी सांस ली थी, जिस वजह से इसे प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थल भी माना जाता है।
  • -हर साल दुनिया भर से हज़ारों पर्यटक और श्रद्धालु यहां आते हैं। बुद्ध पूर्णिमा के दिन अप्रैल-मई और नववर्ष उत्सव (31 दिसंबर) के दिन संख्या हजारों में रहती है।
  • -अनूठी डिज़ाइन वाले महापरिनिर्वाण मंदिर में लेटे हुए बुद्ध की विशालकाय मूर्ति है। यह मूर्ति 1876 की खुदाई में प्राप्त हुई थी।
  • - यहां के स्मारकों को तीन वर्गों में बांटा जा सकता है; निर्वाण स्थल, मध्य स्तूप, मठाकुआर कोट और रामभर स्तूप के आसपास का इलाका।
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