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लखीमपुर हिंसा:टूटी लाठियां और जली हुई गाड़ियां...बता रहीं 8 मौतों की कहानी; चश्मदीद बोला- 90 की स्पीड से आई थी कारें, फायरिंग करते भागा था मंत्री का बेटा

लखीमपुर/ लखनऊ4 महीने पहलेलेखक: आदित्य तिवारी
3 अक्टूबर को तिकुनिया गांव में हुई हिंसा की तस्वीरें खौफनाक मंजर को बयां कर रही है।

2022 के विधानसभा चुनाव के 5 महीने पहले लखीमपुर हिंसा ने पूरे यूपी को हिला दिया है। जिसका असर चुनाव में जिले की निघासन विधानसभा सीट पर भी देखने को मिल सकता है। यहां से 22 किलोमीटर दूर स्थित तिकुनिया गांव में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा में 8 जानें गईं। जिससे प्रशासन से लेकर कानून व्यवस्था पर सवाल उठे।

हालांकि, योगी सरकार ने एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार को भेजकर 24 घंटे के अंदर ही डैमेज कंट्रोल कर लिया। मगर, 72 घंटे बीतने के बाद भी यहां हिंसा के निशान मौजूद हैं। एक किलोमीटर के दायरे में टूटी लाठियां, खाक में बदल चुकी गाड़ियां, हिंसा के पद-चिन्ह पूरे घटनाक्रम को ताजा कर रहे हैं।

हिंसा की पूरी कहानी...

भगदड़ के निशान साफ कर रहे संघर्ष की तस्वीर
तिकुनिया गांव में महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज के गेट से करीब 100 मीटर दूर दर्दनाक हिंसा हुई। इस स्पॉट पर जाने वाले रास्ते के दोनों तरफ 24 घंटे (4 अक्टूबर) बीतने के बाद भी गाड़ियां दहकती दिखाई दी। गाड़ियों व जीप से धुंआ निकल रहा था। दोनों तरफ स्थित धान के खेत में गाड़ी के पहियों के निशान संघर्ष व हिंसा की कहानी बयां कर रहे थे।

कहीं पर आग से घास भी जली हुई थी तो कहीं खेत में भगदड़ के निशान साफ झलक रहे थे। तालाब के आस-पास स्थित गीली मिट्टी पर बने पैरों के सूखे चिन्ह साफ दिख रहे थे। ऐसा लग रहा था कि हिंसा के वक्त कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए तालाब में कूदे होंगे।

हिंसा के 72 घंटे बीतने के बाद भी संघर्ष के निशान दर्दनाक मंजर को बयां कर रहे हैं।
हिंसा के 72 घंटे बीतने के बाद भी संघर्ष के निशान दर्दनाक मंजर को बयां कर रहे हैं।

दर्दनाक मंजर को फोटो में कर रहे कैद
हिंसा की आग को प्रशासन के बुझाने के बाद भी किसान वहां पर पहुंच रहे हैं। इन निशानों को देखकर चर्चा कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इस दर्दनाक मंजर के सबूतों को फोटो के जरिए कैद करने में लगे हैं।

कहीं जली हुई कारें तो कहीं भगदड़ के निशान हैं।
कहीं जली हुई कारें तो कहीं भगदड़ के निशान हैं।

एक तरफ खून से लथपथ किसान तो दूसरी तरफ जलती कारें
वहीं, कुछ दूर आगे चलने के बाद बैरिकेडिंग के पास खड़े दो PAC के जवान मिले। जिनकी उम्र 50 के करीब थी। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि यह जो स्कूल(महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज) देख रहे हैं, उसकी तरफ से आ रहे रास्ते से तीन कार रफ्तार बहुत तेज थीं।

इधर, किसान सड़क पर खड़े थे। उनके हाथ में झंडे- डंडे और तलवार थीं। तेज रफ्तार कार का ड्राइवर चढ़ाते हुए चला जा रहा था। वहीं, दूसरे जवान ने बताया कि बहुत ही दर्दनाक मंजर था। एक तरफ खून से लथपथ करीब एक दर्जन घायल किसान तो दूसरी तरफ आग में जलती गाड़ियां।

हिंसा की आग को प्रशासन के बुझाने के बाद भी किसान वहां पर पहुंच रहे हैं। इन निशानों को देखकर चर्चा कर रहे हैं।
हिंसा की आग को प्रशासन के बुझाने के बाद भी किसान वहां पर पहुंच रहे हैं। इन निशानों को देखकर चर्चा कर रहे हैं।

सुनिए चश्मदीद राम सिंह की जुबानी....

पहले ही आगाह किया था, काफिले का टकराव
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेता राम सिंह गिलोनी 3 अक्टूबर की दोपहर किसान आंदोलन में सैकड़ों की संख्या में भीड़ थी। पुलिस की फोर्स भी तैनात थी। जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाई गई थी। दोपहर में किसान नेताओं के साथ डीएम-एसएसपी से वार्ता हुई। जिसमें प्रशासन चाहता था कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के जाने का रूट बदल दिया जाए। हम सभी प्रशासन की बात से संतुष्ट थे।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेता राम सिंह।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेता राम सिंह।

प्रशासन ने हम सभी से मांग की कि किसान अब अपना प्रदर्शन समाप्त करके यहां से चले जाएं। इस पर हम सभी ने कहा, एकाएक सभी यहां से जाएंगे तो मंत्री और हमारे किसान साथियों के काफिले में टकराव हो सकता है।प्रशासन से यह बात घटना से पहले की आखिरी वार्ता थी।

90 की स्पीड से आई कारें, मंत्री का बेटा फायरिंग करते हुए भागा
किसान नेता राम सिंह के मुताबिक, शाम को हम मंच से सभी से वार्ता कर रहे थे। तब ही अचानक तिकुनिया की तरफ से 3 गाड़ियां तेजी से आते हुए दिखाई दीं। आगे स्कॉपियों थी, पीछे ईनोवा और उसके पीछे एक और गाड़ी थी। सभी गाड़ियां करीब 80 से 90 की स्पीड में थीं। आगे जाकर तीनों कारें पलट गईं।

इस दौरान गाड़ी से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र उतरते ही, फायरिंग करते हुए भागने लगा। लोगों ने उन्हें पकड़ने की कोशिश। तब पुलिस ने उन्हें पकड़ा और आगे जो गाड़ी थी उसमें बैठाकर ले गई।

इनकी गई जान

  1. शुभम मिश्रा (27) निवासी शिवपुरी, गढ़ी रोड, लखीमपुर।
  2. हरिओम मिश्रा(26) निवासी फरधान।
  3. रमन कश्यप (30) निवासी निघासन।
  4. श्यामसुंदर निषाद (30) निवासी सिंगहा कलां, सिंगाही।
  5. लवप्रीत सिंह(18) निवासी चौखड़ा फार्म, मझगईं, पलियाकलां।
  6. नक्षत्र सिंह (55) निवासी धौरहरा।
  7. गुरुविंदर सिंह (40) नानपारा, बहराइच।
  8. दलजीत सिंह (36) निवासी बंजारन टांडा, नानपारा, बहराइच।
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