सुप्रीम कोर्ट ने फिर लगाई फटकार:CJI रमन्ना ने UP सरकार से पूछा- लखीमपुर हिंसा में हजारों किसान मौजूद थे और सिर्फ 23 चश्मदीद गवाह मिले?

नई दिल्ली/लखनऊ3 महीने पहले

यूपी के लखीमपुर हिंसा मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। CJI एनवी रमन्ना ने एक बार फिर यूपी सरकार को फटकार लगाई है। पूछा कि गवाहों के मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराए? इस पर जवाब देते हुए यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि 30 गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए हैं, इनमें से 23 चश्मदीद गवाह हैं। कुछ बाकी हैं, जिनका बयान होना है।

इसके बाद बेंच ने पूछा कि लखीमपुर में रैली के दौरान हजारों किसान मौजूद थे और आपको सिर्फ 23 चश्मदीद गवाह मिले? हरीश साल्वे ने कहा कि हमने सार्वजनिक विज्ञापन देकर यह मांगा है कि जो भी चश्मदीद हैं, वे सामने आएं। घटना में सभी मोबाइल वीडियो और वीडियोग्राफी पर भी ध्यान दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश देते हुए कहा कि उनके बयान तेजी से दर्ज किए जाएं। अब इस मामले की सुनवाई 8 नवंबर को होगी।

हरीश साल्वे बोले- गवाहों को सुरक्षा दी जा रही

केस की सुनवाई CJI एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने की। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वहां चार-पांच हजार लोग थे, जो लोकल थे। साल्वे ने जवाब दिया कि सभी लोकल नहीं थे, कुछ बाहरी लोग भी थे। इस पर साल्वे ने कहा कि यहां सवाल चश्मदीदों का है। CJI ने कहा कि क्या आप जानते हैं कि इन मामलों में हमेशा एक संभावना होती है। CJI ने कहा कि आप अपनी जांच एजेंसी से कहें कि 23 लोगों के अलावा कितने लोग हैं, जिन्हें घटना देखी है। उनके बयान लें।

इस पर साल्वे ने पूछा कि क्या हम आपको सीलबंद लिफाफे में गवाहों के कुछ दर्ज बयानों के बारें में दिखा सकते हैं? हम अदालत को अगली बार ब्योरा देंगे। CJI ने कहा कि गवाहों की सुरक्षा का भी एक मुद्दा है। साल्वे ने कहा कि उनको सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है।

भाजपा नेता और पत्रकार की मौत पर अलग से मांगा जवाब

लखीमपुर खीरी में मृतक भाजपा नेता श्याम सुंदर की एक की पत्नी ने SC से कहा कि मेरे पति को मार दिया गया है, मुझे न्याय चाहिए। हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं और मुझे धमकी दे रहे हैं। बेंच ने कश्यप और पत्रकार कश्यप की मौत पर यूपी से अलग जवाब मांगा है। इस दौरान बेंच से शिकायत की गई कि मृतक में से एक की पत्नी द्वारा उनकी शिकायत की जांच नहीं की गई है। इसी प्रकार घटना में मारे गए पत्रकार रमन कश्यप के मामले को भी उठाया गया है।

बयान दर्ज करने में ढिलाई पर भी कोर्ट ने जताई थी नाराजगी
20 अक्टूबर को यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने जांच रिपोर्ट दाखिल की थी। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा था, 'अगर आप आखिरी मिनट में रिपोर्ट देंगे तो हम कैसे पढ़ पाएंगे? कम से कम एक दिन पहले देनी चाहिए। अदालत ने यह भी पूछा कि इस मामले में UP सरकार ने बाकी गवाहों के बयान क्यों नहीं लिए? कोर्ट ने कहा कि आपने 44 में से अभी तक 4 गवाहों से ही पूछताछ की है, ऐसा क्यों? ऐसा लगता है कि यूपी पुलिस इस मामले की जांच से पीछे हट रही थी। इस छवि को सुधारिए।

कोर्ट ने आगे कहा कि आपकी SIT यह समझ सकती है कि सबसे कमजोर गवाह कौन-से हैं और उन पर हमला हो सकता है, तो फिर अभी तक सिर्फ 4 गवाहों के ही बयान दर्ज क्यों किए गए'?

ये 6 सवाल कोर्ट ने किए थे

  • अब तक कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई है?
  • कितने लोग पुलिस कस्टडी में और कितने लोग जेल में हैं?
  • जो लोग जेल में हैं क्या उनकी पुलिस कस्टडी की जरूरत अब नहीं है?
  • जो लोग ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं, क्या उनकी पुलिस कस्टडी की मांग नहीं की गई?
  • सिर्फ 4 गवाहों के बयान ही अब तक क्यों दर्ज किए गए हैं?

पहली सुनवाई में भी कोर्ट ने लगाई थी फटकार
लखीमपुर मामले की पिछली सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की जांच पर नाखुशी जताते हुए कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने UP सरकार के वकील हरीश साल्वे से पूछा कि हत्या का मामला दर्ज होने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई? ऐसा करके आप क्या संदेश देना चाहते हैं?

हिंसा मामले की जांच SIT कर रही है। अब तक 13 आरोपी पकड़े जा चुके हैं।
हिंसा मामले की जांच SIT कर रही है। अब तक 13 आरोपी पकड़े जा चुके हैं।

बता दें कि 3 अक्टूबर को लखीमपुर में हुई हिंसा में 4 किसानों समेत 8 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र का बेटा आशीष मिश्र मुख्य आरोपी है।

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