राजनीति का लव ज्यादा बोल्ड होता है:प्रियंका, अखिलेश , जितिन प्रसाद, अपर्णा यादव जैसे 8 नेताओं की लव स्टोरी...जानिए कैसे प्यार के लिए हदें पार की

लखनऊ6 महीने पहले

विधानसभा चुनाव 2022 का दूसरा फेज वैलेंटाइन डे के दिन हो रहा है। ये संयोग ही है कि इस दिन प्यार की बात तो होगी, लेकिन राजनीति के तड़के के साथ। फिर यूपी का सिरमौर कौन होगा... सीएम का चेहरा किसका पसंदीदा नेता होगा। इन अटकलों पर धुंध छटने में अभी वक्त है।

इससे पहले इस वैलेंटाइन डे पर हम आपको 8 राजनीतिक हस्तियों की लव स्टोरी के बारे में बता रहे हैं, जो अपने जीवनसाथी के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। हालांकि इनकाे एक-दूसरे का साथ इतनी आसानी से नहीं मिला। आइए जानते हैं, इन्हें कैसे मिला अपना वैलेंटाइन...

अखिलेश-डिंपल के लिए तैयार नहीं थे मुलायम

डिंपल और अखिलेश एक-दूसरे का राजनीतिक करियर भी संभालते हैं।
डिंपल और अखिलेश एक-दूसरे का राजनीतिक करियर भी संभालते हैं।

इनकी लव स्टोरी की शुरुआत तब हुई, जब अखिलेश 21 साल के थे और डिंपल 17 साल की। दोनों की मुलाकात एक दोस्त के घर पर हुई। डिंपल लखनऊ यूनिवर्सिटी से कॉमर्स की पढ़ाई कर रही थीं। अखिलेश ऑस्ट्रेलिया से इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री लेने के लिए वहां जाने की तैयारी कर रहे थे।

पढ़ाई के लिए सिडनी जाने के बाद भी अखिलेश हमेशा डिंपल के संपर्क में रहे। अखिलेश उन्हें लव लेटर और ग्रीटिंग कार्ड भेजते थे। ये सिलसिला करीब 4 साल तक चला। जब अखिलेश पढ़ाई पूरी करके वापस लौटे, तो शादी का मन पूरी तरह से बना चुके थे। यहीं से दिक्कतें शुरू हुईं क्योंकि मुलायम सिंह यादव इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। जबकि अखिलेश शादी करने के लिए अड़ गए थे।

बहुत सोच-विचार के बाद मुलायम सिंह उनकी शादी के लिए मान गए। डिंपल का परिवार आर्मी बैकग्राउंड से है। पिता कर्नल थे। डिंपल का परिवार उनके फैसले के साथ था। 24 नवंबर 1999 को अखिलेश और डिंपल की शादी हुई थी। अब अखिलेश की राजनीति में सभी महत्वपूर्ण कामकाज डिंपल ही संभालती हैं।

ईमेल भेजकर किया था प्रेम का इजहार

प्रतीक पॉलिटिक्स में नहीं आए, लेकिन अपर्णा के लिए उन्होंने राजनीति के रास्ते आसान बनाए।
प्रतीक पॉलिटिक्स में नहीं आए, लेकिन अपर्णा के लिए उन्होंने राजनीति के रास्ते आसान बनाए।

मुलायम सिंह यादव ने खुद साधना गुप्ता से प्रेम विवाह किया था। उनके छोटे बेटे प्रतीक भी स्कूल टाइम में अपर्णा को दिल दे बैठे थे। अपर्णा उनके स्कूल में नहीं पढ़ती थीं, लेकिन स्कूल फंक्शन में उनकी मुलाकातें होती रहती थीं। एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में प्रतीक ने पहली बार अपर्णा का ईमेल एड्रेस लिया था। अपर्णा उस वक्त ये नहीं जानती थीं कि प्रतीक, मुलायम के बेटे हैं। अपर्णा ने उन्हें मेल एड्रेस दिया।

कई दिनों के बाद उन्होंने अपना मेल चेक किया तो उसमें प्रतीक के संदेश मिले। जिनमें उन्होंने प्यार का इजहार किया हुआ था। अपर्णा और प्रतीक ने इसके बाद मिलना शुरू किया। 8 साल की मुलाकातों के बाद 2011 में दोनों की सगाई हुई और 2012 में शादी के बंधन में बंध गए।

यादव परिवार के करीबी कहते हैं कि मुलायम ने अखिलेश और प्रतीक के बीच एक समझौता कराया था कि प्रतीक बिजनेस संभालेंगे, अखिलेश राजनीति। प्रतीक खुद तो कभी पॉलिटिक्स में नहीं आए, लेकिन उन्होंने अपर्णा को राजनीति में आने से नहीं रोका। बल्कि हमेशा उनको सपोर्ट किया।

प्रियंका-रॉबर्ट के लिए पहले दोनों का परिवार राजी न था

प्रियंका के राजनीति में आने के पीछे रॉबर्ड वाड्रा का सपोर्ट भी एक कारण है।
प्रियंका के राजनीति में आने के पीछे रॉबर्ड वाड्रा का सपोर्ट भी एक कारण है।

कहते हैं कि प्रियंका को राजनीति में लाने वाले रॉबर्ट वाड्रा हैं। प्रियंका परिवार में खुश थीं। देश के सबसे बड़े सियासी घराने की बेटी प्रियंका और रॉबर्ट वाड्रा की लव स्टोरी भी बेहद दिलचस्प है। ब्रिटिश स्कूल में पढ़ाई के दौरान रॉबर्ट को लगता था कि प्रियंका उनमें दिलचस्पी रखती हैं। दोनों में बातचीत होने लगी। प्रियंका की सादगी पर रॉबर्ट का दिल आ गया था।

प्रियंका ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब मैं रॉबर्ट से पहली बार मिली थी तो सिर्फ 13 साल की थी। वे मुझसे वैसे ही मिलते थे। जैसे दूसरे दोस्तों से मिलते थे। ये बात मुझे पसंद आई। रॉबर्ट एक बिजनेसमैन फैमिली से संबंध रखते थे। उन्हें लेकर पहले गांधी परिवार राजी नहीं था। लिहाजा प्रियंका ने अपने परिवार को फिल्मी स्टाइल में रॉबर्ट के लिए राजी किया।

वहीं दूसरी तरफ रॉबर्ट के पिता भी इस रिश्ते से खुश नहीं थे, लेकिन बाद में वे भी मान गए। एक बार प्रियंका रॉबर्ट से मिलने मुरादाबाद पहुंच गई थीं। 18 फरवरी 1997 में प्रियंका और रॉबर्ट शादी के बंधन में बंध गए। उनकी शादी सोनिया गांधी के 10 जनपथ वाले घर पर हिंदू रीति-रिवाजों से हुई।

फिल्मी है नंदी की लव स्टोरी.. पर दोनों ने हार नहीं मानी

प्रयागराज की महापौर हैं अभिलाषा, नंदी के पॉलिटिकल करियर में मददगार भी।
प्रयागराज की महापौर हैं अभिलाषा, नंदी के पॉलिटिकल करियर में मददगार भी।

नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' और अभिलाषा दोनों प्रयागराज के लोहिया पाण्डेय के हाता में वेसेंट नर्सरी स्कूल में पढ़ते थे। घर भी एक ही गली में है, लेकिन कुछ दिनों बाद स्कूल बदला तो संपर्क छूट गया। कई सालों बाद इनकी मुलाकात मैहर देवी मंदिर सतना में हुई। यहां उन्होंने प्रेम का इजहार किया, लेकिन अभिलाषा के परिवार को ये रिश्ता मंजूर नहीं था। ये वो दौर था, जब नंदी की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।

नंदी ने दूध वाले से लेकर घर की नौकरानी तक से लेटर भिजवाए। इसके बाद अभिलाषा के पिता पीएन मिश्रा ने उन्हें जबलपुर भेज दिया। नंदी भी जबलपुर पहुंच गए। जबलपुर कॉफी हाउस में किसी तरह मजिस्ट्रेट को बुलाकर कोर्ट मैरिज की। अभिलाषा के पिता ने उन्हें वापस इलाहाबाद (अब प्रयागराज) बुलाकर उनकी दूसरे जगह शादी की तैयारी करने लगे।

इसी बीच अभिलाषा अपने पेरेंट्स को बिना बताए घर से निकल आईं और नंदी के साथ कार से विध्यांचल मंदिर पहुंची। यहां पर दोनों ने मां विंध्यवासिनी का दर्शन किया। फिर वे कार से ही नागपुर रवाना हो गए। वहां नंदी अपने एक दोस्त के पास रहने चले गए। इस बीच अभिलाषा की फैमिली को भी मना लिया और इलाहाबाद लौटे तो रीति रिवाज से शादी हुई। आज नंदी के व्यवसाय और राजनीतिक जीवन में अभिलाषा का सपोर्ट रहता है। अभिलाषा खुद भी महापौर हैं। वो उन्हें चुनाव लड़ने में भी मदद करती हैं।

मंत्री थे जितिन, नेहा से 4 साल के प्रेम संबंधों के बाद की थी शादी

लखनऊ में जितिन ने शादी के बाद शाही रिसेप्शन दिया था। बड़ी-बड़ी हस्तियां शामिल हुईं थीं।
लखनऊ में जितिन ने शादी के बाद शाही रिसेप्शन दिया था। बड़ी-बड़ी हस्तियां शामिल हुईं थीं।

2010 में तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री जितिन प्रसाद ने लखनऊ की पत्रकार नेहा सेठ से शादी करने का ऐलान करके सबको चौंका दिया था। 4 साल के प्रेम संबंध के बाद दोनों ने 16 फरवरी को सात फेरे लिए थे। राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले जितिन प्रसाद बेहद सरल व्यक्ति हैं।

नेहा के घर जितिन के कहने पर शादी का प्रपोजल उनके परिवार ने भेजा था। नेहा की मां ने कहा था कि मैं नेहा से बहुत नाराज थी, क्योंकि वो आने वाले हर शादी के प्रस्ताव को ठुकरा रही थीं। आखिरकार नेहा ने इस रिश्ते के लिए हां कह दी थी। जब बॉयफ्रेंड जितिन उनसे शादी का हाथ मांगने पहुंचे, तो घर वालों ने भी बिना देरी रजामंदी दे दी।

दून से स्कूलिंग और IIM दिल्ली से MBA करने के बाद जितिन ने पारिवारिक सियासी विरासत संभाल ली थी। पत्नी नेहा ने लखनऊ के ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज से पढ़ाई की है। उन्होंने मुंबई से मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया है। नेहा के माता-पिता पूनम और आदेश सेठ लखनऊ के जानी-मानी हस्तियों में से एक हैं। नेहा एक लेखक हैं। फ्रीलान्स राइटर के तौर पर मैगजीन्स में लिखती हैं। नेहा ने कई किताबें भी लिखी हैं।

फ्रांस में छिपकर की थी शादी... लेकिन तस्वीरें हो गईं वायरल

श्रीकला धनंजय के लिए जनसंपर्क करती हैं। वो मल्हनी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
श्रीकला धनंजय के लिए जनसंपर्क करती हैं। वो मल्हनी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

कहते हैं ना कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपता, यही हुआ धनंजय सिंह और श्रीकला की चोरी-छुपे शादी के मामले में। बसपा से सांसद रह चुके बाहुबली धनंजय सिंह और श्रीकला रेड्‌डी ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में शादी की थी। जब भारत लौटकर आए तो यहां भी परंपरागत तरीके से शादी की।

श्रीकला रेड्डी, धनंजय की तीसरी पत्नी हैं। श्रीकला का ताल्लुक तेलंगाना प्रांत के रईस सियासी परिवार से है। उनके पिता स्व. जितेंद्र रेड्डी नलगोंडा जिले की कोऑपरेटिव के अध्यक्ष रह चुके हैं। वो तेलंगाना की हुजूरनगर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक भी रहे हैं। श्रीकला अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं।

श्रीकला ने ग्रेजुएशन के बाद अमेरिका से आर्किटेक्चर इंटीरियर डिजाइनर का कोर्स किया। फिर इंटीरियर डिजाइनिंग के बिजनेस में उतर गईं। निप्पो बैटरी ग्रुप श्रीकला रेड्डी के परिवार का ही है। अब वे धनंजय सिंह के लिए जनसंपर्क करती हैं। धनंजय मल्हनी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

मोहसिन क्रिकेट खेलने के बहाने फौजिया से मिलने शारजाह जाते थे

मोहसिन खुद कहते हैं कि उनकी सफलता उनकी पत्नी फौजिया की वजह से संभव हो सकी।
मोहसिन खुद कहते हैं कि उनकी सफलता उनकी पत्नी फौजिया की वजह से संभव हो सकी।

यूपी के कैबिनेट मंत्री मोहसिन रजा क्रिकेटर से पॉलिटीशियन बने थे। उनकी लव स्टोरी में स्ट्रगल भी अलग तरह का रहा। मोहसिन शिया हैं और फौजिया सुन्नी हैं। इस डिफरेंस के बावजूद इन्होंने अपनी लव स्टोरी को सक्सेसफुल बनाया। मोहसिन और फौजिया की मुलाकात 1999 में लखनऊ में फैमिली फंक्शन के दौरान हुई थी। दोनों की फैमिली एक-दूसरे को पहले से जानती थीं। फौजिया ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से MBA किया था।

उसके बाद वो UAE के शारजाह में केनवुड नाम की कंपनी में जॉब करने लगीं। ऐसे में मोहसिन घरवालों से झूठ बोलकर कभी टूर्नामेंट के बहाने तो कभी बिना बताए शारजाह उनसे मिलने जाते थे। फौजिया के घरवालों को मोहसिन के शिया होने पर एतराज था। मोहसिन की कोशिशों के बाद किसी तरह मामला फाइनल हुआ।

दो साल के अफेयर के बाद उन्होंने शिया और सुन्नी, दोनों रीति-रिवाजों से निकाह किया। एक निकाह उन्होंने शारजाह में ही किया था। योगी कैबिनेट में मोहसिन एकमात्र मुस्लिम मंत्री रहे। वो खुद भी कहते हैं कि ये सब उनकी पत्नी फौजिया की वजह से हो सका है।

दो दिग्गज भाजपा नेताओं की प्रेम कहानी...

परिवारों की रजामंदी से स्वाति और दयाशंकर की 18 मई 2001 में शादी हो गई।
परिवारों की रजामंदी से स्वाति और दयाशंकर की 18 मई 2001 में शादी हो गई।

दयाशंकर सिंह और स्वाति सिंह की लवस्टोरी भी सत्ता के गलियारों में चर्चित रही है। झारखंड के बोकारो से ताल्लुक रखने वाली स्वाति सिंह लखनऊ यूनिर्विसिटी से पढ़ाई कर रही थीं। दयाशंकर ABVP के साथ छात्र राजनीति में बहुत ज्यादा सक्रिय थे।

उनके भाषण सुनने के लिए छात्रों की भीड़ जुटती थी। बताते हैं कि स्वाति को दयाशंकर के बोलने का तरीका बहुत पसंद था। उनकी प्रेम कहानी बहुत जल्दी कैंपस में फैल गई। स्वाति खुद भी छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय रही थीं। दोनों के परिवारों की रजामंदी से स्वाति और दयाशंकर की 18 मई 2001 को शादी हो गई।

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