बुखार पीड़ित को देर से मिला वेंटिलेटर, हुई मौत:4 दिन से बुखार से तड़प रहा था 50 वर्षीय मरीज, PGI व लोहिया संस्थान में मनाही के बाद KGMU में मिला वेंटिलेटर

लखनऊ4 महीने पहले
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PGI व लोहिया संस्थान में नही मिला बुजुर्ग मरीज को वेंटिलेटर , 4 दिन से बुखार पीड़ित मरीज को सांस लेने में थी तकलीफ, KGMU में भर्ती होते ही हुई मौत - प्रतीकात्मक चित्र - Dainik Bhaskar
PGI व लोहिया संस्थान में नही मिला बुजुर्ग मरीज को वेंटिलेटर , 4 दिन से बुखार पीड़ित मरीज को सांस लेने में थी तकलीफ, KGMU में भर्ती होते ही हुई मौत - प्रतीकात्मक चित्र

उत्तर प्रदेश में तमाम दावों के बावजूद मरीजों को अस्पताल में आसानी से सहूलियत नही मिलती।गंभीर अवस्था के मरीजों को वेंटिलेटर बमुश्किल ही मिल पा रहा है।नतीजा मरीज जिंदगी से जंग हार जा रहे है।बुखार से तप रहे प्रयागराज के 50 वर्षीय मरीज को जब सांस लेने में परेशानी हुई तो डॉक्टरों ने वेंटिलेटर सपोर्ट की सलाह दी।परिजनों ने लखनऊ की दौड़ लगाई पर जान नही बच सकी।परिजनों का आरोप है कि समय रहते वेंटिलेटर मिल जाता तो मरीज की जान न जाती।

चार दिनों से बुखार से तप रहा था मरीज

दरअसल प्रयागराज निवासी 50 वर्षीय मरीज गुलाब सिंह को चार दिनों से बुखार था। बाद में सांस में भी तकलीफ होने लगी। परिवार के सदस्यों के अनुसार पहले मंगलवार को एसजीपीजीआइ के एपेक्स ट्रामा सेंटर ले गए, लेकिन वहां पर कोविड अस्पताल होने की वजह से भर्ती नहीं किया गया। तब एंबुलेंस चालक ने मरीज व तीमारदारों को झांसा देकर निजी अस्पताल के चंगुल में फंसा दिया। इस बीच रात भर में ही यहां 90 हजार रुपये का बिल बन गया। बुधवार सुबह निजी अस्पताल से डिस्चार्ज करा कर वैंटिलेटर सपोर्ट के लिए दोबारा मरीज को SGPGI लेकर पहुंचे। तब पुनः निराशा हाथ लगी। इसके बाद गोमतीनगर के लोहिया संस्थान गए, लेकिन वहां वेंटीलेटर खाली नहीं था। डॉक्टरों ने वहां से भी वापस लौटा दिया।

लंबी भागदौड़ के बाद KGMU में हुआ था भर्ती

गंभीर अवस्था मे मरीज को वेंटिलेटर का लंबा इंतज़ार करना पड़ा। इस भागदौड़ में छह-सात घंटे गुजर गए।अंत में परिजन मरीज को KGMU ट्रामा सेंटर पहुंचे सीएमएस डा. संदीप तिवारी ने मरीज को मेडिसिन वार्ड के आइसीयू में वेंटीलेटर सपोर्ट पर रखवाकर इलाज शुरू कराया। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कुछ ही देर में मरीज की मौत हो गई। तीमारदार कन्हैया लाल के मुताबिक समय पर वेंटिलेटर समय पर मिला होता तो जान बच गई होती।

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