वकीलों पर हमले की होगी जांच:हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा- वकीलों के अभद्र व्यवहार पर मूकदर्शक नहीं बन सकते

लखनऊ2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

लखनऊ में वकीलों पर 30 अक्टूबर को हुए हमला मामले की जांच होगी। यह घटना जिला कोर्ट परिसर के पास हुई थी। मामले करने वाले भी वकील ही थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यह आदेश दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि हम मूकदर्शक बनकर वकीलों के इस व्यवहार को नहीं देख सकते। कोर्ट ने मामले में डीसीपी, वेस्ट जोन सोमेन वर्मा को तलब कर उन्हें मामले में दर्ज FIR पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया। साथ ही जनपद न्यायाधीश, लखनऊ से विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है।

यह आदेश जस्टिस राकेश श्रीवास्तव और जस्टिस शमीम अहमद की बेंच ने अधिवक्ता पियूष श्रीवास्तव व अन्य की याचिका पर पारित किया। याचियों का कहना है कि 30 अक्टूबर को उन्होंने कुछ अभियुक्तों की जमानत अर्जी निचली अदालत में दाखिल की थी। जो अदालत ने उसी दिन स्वीकार कर ली। लेकिन थोड़ी ही देर बाद एक वकील सतीश कुमार वर्मा ने जिन अभियुक्तों की जमानत हुई थी, उनका बेल बांड न भरने के लिए याचियों से कहा। दरअसल, उक्त अभियुक्तों के खिलाफ सतीश कुमार वर्मा ने ही FIR दर्ज कराई थी। हालांकि याची नहीं माने। सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद अभियुक्तों को रिहा कर दिया गया।

आरोप है कि तब सतीश कुमार वर्मा ने अपने 30-40 कथित वकील साथियों के साथ पुराने हाईकोर्ट के गेट नंबर-6 के पास पियूष श्रीवास्तव, शैलेंद्र मिश्रा और सुचिता सिंह को घेर लिया। याचियों को गाली-गलौज करते हुए उन पर हमला भी किया। कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद कहा कि कानून के कार्य में बाधा बनने वाले हर शख्स के साथ सख्ती से निपटा जाना चाहिए। कोर्ट ने जनपद न्यायाधीश, लखनऊ से भी पूछा है कि वर्तमान मामले के साथ 2017 में तत्कालीन सीजेएम द्वारा भेजी गई ऐसी ही एक रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की गई।