15 फोटो में देखिए, लखनऊ के श्मशान घाट के हालात:'अंतिम दर्शन' भी नहीं कर पा रहे अपने; शव दाह के लिए मिल रहा टोकन, बारी आने पर सिर्फ देखने को मिलती है जलती चिता

लखनऊ8 महीने पहलेलेखक: आदित्य तिवारी
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लखनऊ में गोमती किनारे बने श्मशान घाट पर एक साथ जलती कई चिताएं। - Dainik Bhaskar
लखनऊ में गोमती किनारे बने श्मशान घाट पर एक साथ जलती कई चिताएं।

उत्तर प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर बेकाबू होती जा रही है। सबसे ज्यादा भयावह स्थित राजधानी लखनऊ की है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में बीते 24 घंटे में 31 जबकि पिछले 10 दिन में 120 कोरोना पॉजिटिव की जान गई है। लेकिन लखनऊ के श्मशान घाट और कब्रिस्तानों में हालात कागजी दावों से उलट है।

यहां के गुलाल घाट, भैसा कुंड और ऐशबाग कब्रस्तान में हर दिन 80 से 100 के बीच शव बीते 10 दिनों से आ रहे हैं, जिनका कोविड-प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया जा रहा है। टोकन नंबर से दाह संस्कार की प्रक्रिया हो रही है। लोग अपनों का चेहरा भी नहीं देख पा रहे हैं। अंतिम संस्कार का नंबर आने पर मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया जाता है। वे दूर रहकर रोते-बिलखते हुए चिता को जलते हुए देखते रहते हैं। बता दें कि लखनऊ में अब तक 1,332 संक्रमितों की मौत हो चुकी है।

जान तो चली गई भैया, बेटे की शक्ल भी नहीं देख पाए

पुराने लखनऊ की रहने वाली वर्तिका 10 दिनों से बेटे के इलाज के लिए परेशान थीं। किसी तरीके से वह भर्ती हो पाया था। भर्ती होने के बाद उसका इलाज शुरू हुआ, लेकिन रविवार उनके बेटे की मौत हो गई। कोरोना संक्रमित होने की वजह से बेटे के शव को पूरी तरीके से पैक कर दिया गया था। वर्तिका कहती हैं कि हम उसका चेहरा भी नहीं देख पाए। आज अंतिम संस्कार हो रहा है। मैंने दूर से देखा कि उसका शव इलेक्ट्रॉनिक शव में जा रहा है। 5 घंटे बाद हमारा नंबर आया है। अब कुछ बोलने को नहीं है।

एम्बुलेंस में पैक्ड शव को देख नहीं सकी महिला।
एम्बुलेंस में पैक्ड शव को देख नहीं सकी महिला।

जान जोखिम में डालकर नगर निगम कर्मी कर रहे ड्यूटी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है। यहां खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रहते हैं। बावजूद इसके लखनऊ नगर निगम के द्वारा अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में कई खामियां देखने को मिल रही हैं। नगर निगम के कुछ कर्मचारी बिना किट के श्मशान घाट पर अपनी जान जोखिम में डालकर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। 100 कर्मचारियों की दो शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई है। एक शिफ्ट में 50 कर्मचारी, दूसरी शिफ्ट में 50 कर्मचारी आते हैं।

बिना सुरक्षा इंतजाम के काम करते नगर निगम कर्मी।
बिना सुरक्षा इंतजाम के काम करते नगर निगम कर्मी।

नगर निगम के इंतजाम का दावा
लखनऊ नगर निगम का दावा है कि कोविड-19 केस की बढ़ोत्तरी के साथ मृत्यु दर में भी वृद्धि हो रही है। जिसके चलते शवदाह गृह में बढ़ी संख्या में शव आ रहे हैं। अधिक शवों के आने से दाह संस्कार में देरी का सामना करना पड़ रहा था।

लखनऊ में भैंसाकुड स्थित श्मशान घाट पर अव्यवस्था और शव के अंतिम संस्कार में देरी होने की खबरों के बाद नगर निगम ने 80 शव संस्कार के प्लेटफार्म तैयार किए हैं। फिलहाल बीते 24 घंटे में 60 शवों का इलेक्ट्रॉनिक और लकड़ियों से जलाकर अंतिम संस्कार किया गया है। इसी के साथ गुलालाघाट पर भी शवदाह की क्षमता बढ़ाते हुए 20 नए प्लेटफार्म के निर्माण का आदेश जारी किया गया है। ऐशबाग कब्रिस्तान में 12 दिन में 180 शव दफनाए गए हैं।

शव को दाह संस्कार के लिए ले जाते कर्मी। इस दौरान एक कर्मी बिना पीपीई किट के नजर आया।
शव को दाह संस्कार के लिए ले जाते कर्मी। इस दौरान एक कर्मी बिना पीपीई किट के नजर आया।

यूपी में कोरोना के हालात, 7 दिन बाद तक आ रही रिपोर्ट

बीते 24 घंटे रविवार को 15,353 नए मामले सामने आए। जबकि 67 लोगों की मौत हुई है। अब तक प्रदेश में 9,152 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। लखनऊ में सबसे अधिक 4,444 रोगी सामने आए हैं। यहां 31 संक्रमितों की जान गई। प्रदेश में 81,576 एक्टिव कोविड केस हैं। लखनऊ में 7 दिन बाद कोरोना की रिपोर्ट मिल रही हैं। जिसकी वजह से 20 हजार लोगों को कोरोना रिपोर्ट का इंतजार है। PGI, मेडिकल कॉलेज, लोहिया हॉस्पिटल, बलरामपुर हॉस्पिटल में लापरवाही सामने आ रही है।

दाह संस्कार के लिए इंतजार करते लोग।
दाह संस्कार के लिए इंतजार करते लोग।
भैंसाकुंड में जलती चिताएं।
भैंसाकुंड में जलती चिताएं।
भैंसाकुंड में एक साथ जलती कई चिताएं।
भैंसाकुंड में एक साथ जलती कई चिताएं।
दाह संस्कार की प्रक्रिया संपन्न करता कर्मी।
दाह संस्कार की प्रक्रिया संपन्न करता कर्मी।
दूर से ही खड़े होकर अंतिम संस्कार देखते लोग।
दूर से ही खड़े होकर अंतिम संस्कार देखते लोग।
पीपीई किट व ग्लव्स आदि डस्टबिन में फेंके जा रहे हैं, जो उड़कर खुले में फैल रहा है।
पीपीई किट व ग्लव्स आदि डस्टबिन में फेंके जा रहे हैं, जो उड़कर खुले में फैल रहा है।
खुले में पड़ी पीपीई किट।
खुले में पड़ी पीपीई किट।
रोती महिला को सहारा देते हुए परिजन।
रोती महिला को सहारा देते हुए परिजन।
दूर से अपनों को जलते हुए देखते परिजन।
दूर से अपनों को जलते हुए देखते परिजन।
फुर्सत के पल में आराम करता कर्मी।
फुर्सत के पल में आराम करता कर्मी।
नदी किनारे रखी लकड़ियां।
नदी किनारे रखी लकड़ियां।
श्मशान घाट के बाहर इंतजार करते लोग।
श्मशान घाट के बाहर इंतजार करते लोग।
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