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सरकार से राहत की आस:लखनऊ नगर निगम के कर्मचारी संगठन का दावा- कोविड संक्रमण से 42 की गई जान, हर परिवार को मुआवजा 50 लाख मिले

लखनऊ2 महीने पहले
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मरने वाले ज्यादातर कर्मचारी संविदा पर कार्यरत थे। उसमें सफाई कर्मचारियों की संख्या करीब 50 फीसदी तक है। - Dainik Bhaskar
मरने वाले ज्यादातर कर्मचारी संविदा पर कार्यरत थे। उसमें सफाई कर्मचारियों की संख्या करीब 50 फीसदी तक है।

कोरोना संक्रमण के कारण स्वास्थ्य और शिक्षकों के साथ नगर निगमों में भी बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की मौत हुई है। लखनऊ नगर निगम में पिछले एक साल में 42 लोगों की मौत हो चुकी है। नगर निगम-जलकल कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शशि मिश्रा ने इसकी पूरी सूची तैयार कर अधिकारियों और शासन को भेजा है। उनके परिवार वालों को नौकरी और 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग की गई है।

संगठन के महामंत्री कैसर रजा ने बताया कि मृतकों में से कई लोगों के पास कोविड की रिपोर्ट भी नहीं है। लेकिन सभी लोगों वाला लक्षण कोविड-19 का ही था। यहां तक की आक्सीजन का स्तर भी काफी कम हो गया था। ऐसे में उनको भी मुआवजा मिलना चाहिए। सोमवार को अपने साथियों के याद में संगठन ने लालबाग स्थिति मुख्यालय पर शोक सभा का आयोजन होगा।

उनका कहना है कि कोरोना कॉल में फ्रंट लाइन वर्कर की भूमिका निभाते हुए 42 लोगों की मौत हो चुकी है। उसके बाद भी विभाग में प्राथमिकता के आधार पर अभी कोविड से बचाव के लिए वैक्सीनेशन नहीं कराया गया है। नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की संख्या ही करीब 9000 है। कुल कर्मचारियों की संख्या 12 हजार तक है। उसके बाद भी उनकी सुरक्षा को लेकर सभी लोग लापरवाही कर रहें है। इस दौरान मेयर से लेकर नगर आयुक्त और नगर विकास मंत्री तक से गुहार लगाई गई लेकिन अभी तक बड़ा कैंप लगा कर प्राथमिकता के आधार पर इंजेक्शन नहीं लगवाया गया है।

कम वेतन वाले संविदा कर्मचारियों की हुई सबसे ज्यादा मौत
मरने वाले ज्यादातर कर्मचारी संविदा पर कार्यरत थे। उसमें सफाई कर्मचारियों की संख्या करीब 50 फीसदी तक है। इनको 7 से 9 हजार रुपये तक का वेतन मिलता है। जबकि कोरोना कॉल में भी यह लोग लगातार काम कर रहे थे।

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