क्रॉनिक किडनी डिजीज के कारण होता है कुपोषण:लखनऊ में रीनल न्यूट्रिशन एंड मेटाबॉलिज्म वर्कशॉप में एक्सपर्ट्स बोले-भूख न लगे तो डॉक्टर को फौरन दिखाएं

लखनऊ8 महीने पहले
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डॉ. अनीता सक्‍सेना। - Dainik Bhaskar
डॉ. अनीता सक्‍सेना।

लखनऊ के गोमती नगर स्थित एक होटल में शुक्रवार को रीनल न्यूट्रिशन एंड मेटाबॉलिज्म विषय पर एक वर्कशाप का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओर से किया गया था।

इस दौरान विशेषज्ञों ने क्रॉनिक किडनी डिजीज में कुपोषण की समस्या की गंभीरता के बारे में बताया। डॉक्टरों ने बताया कि कुपोषण का मुख्य कारण यूरीमिया यानी खून में यूरिया का उच्च स्तर होना होता है। इसका असर यह होता है कि रोगी को भूख नहीं लगती।

यही कारण है कि वह कुपोषण का शिकार हो जाता है। इस दौरान सचिव नेफ्रोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ अनीता सक्‍सेना ने बताया कि किडनी मरीजों में कुपोषण की रोकथाम के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए रीनल न्यूट्रीशन एंड मेटाबॉलिज्म सोसायटी का गठन 2014 में किया गया था।

यह सोसाइटी अपने उद्देश्‍य को पूरा करने के लिए पूर्ण रूप से समर्पित है। यही कारण है कि इस साल 2 दिन के इस सेशन में विदेशों से भी एक्सपर्ट्स शिरकत करने पहुंचे है।

गोमती नगर के निजी होटल में हो रहा आयोजन

डॉ. अनीता सक्‍सेना ने बताया कि सेशन का मकसद चिकित्सकों, किडनी रोग विशेषज्ञों और आहार विशेषज्ञों को किडनी के रोगियों में कुपोषण का कुशलता से पता लगाने व समुचित पोषण के द्वारा कुपोषण को आगे बढ़ने से रोकने के लिए शिक्षित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

इस दौरान विशिष्ट पोषण प्रबंधन पर प्रतिभागियों को सूचित और शिक्षित किया जायेगा। इस पाठ्यक्रम में भारत, नेपाल, बांग्लादेश और इंग्लैंड समेत तमाम देश के प्रतिनिधि भाग ले रहे है।

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