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आठ साल पुराना 100 परसेंट हार्ट ब्लॉकेज किया दुरुस्त:SGPGI में डॉ. सत्येंद्र तिवारी की अगुआई में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली धमनी की एंजियोप्लास्टी

लखनऊ3 महीने पहले
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SGPGI के डॉक्टरों ने 52 साल के मरीज के हार्ट में आठ साल पुराना ब्लॉकेज दूर कर दिया नया जीवन - Dainik Bhaskar
SGPGI के डॉक्टरों ने 52 साल के मरीज के हार्ट में आठ साल पुराना ब्लॉकेज दूर कर दिया नया जीवन

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान यानी SGPGI को ऐसे ही प्रदेश के सबसे प्रीमियर चिकित्सा संस्थान का दर्जा नहीं हासिल। यहां के चिकित्सक आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी ग्लोबल स्टैंडर्ड की मेडिकल फैसिलिटी उपलब्ध करा रहे हैं। संस्थान के कार्डियोलॉजी विभाग में आठ साल से 100 परसेंट ब्लॉक हार्ट की धमनी को डॉक्टरों ने एंजियोप्लास्टी कर ठीक कर दिया।

डॉक्टरों ने बताया कि यह दुर्लभ किस्म का मामला था। इसके जरिये 52 साल के पुरुष रोगी को नई जिंदगी दी है। गंभीर हार्ट अटैक को दूसरी बार झेल चुके बस्ती जिले के मरीज को दो दिन पहले ही स्वास्थ्य करके अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

दूसरी धमनी में भी थी रुकावट

डॉ. सत्येंद्र तिवारी, प्रोफेसर कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट की अगुवाई में टीम ने मरीज का उपचार किया।
डॉ. सत्येंद्र तिवारी, प्रोफेसर कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट की अगुवाई में टीम ने मरीज का उपचार किया।

एंजियोप्लास्टी करने वाली टीम को लीड कर रहे SGPGI के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सत्येंद्र तिवारी ने बताया कि मरीज को ऐंटिरीअर वॉल इन्फार्क्शन की पुरानी बीमारी थी। आठ साल पहले रोगी की एंजियोग्राफी में बाई तरफ की मुख्य धमनी में 100 फीसदी ब्लॉकेज मिला था। आर्थिक तंगी के कारण वह एंजियोप्लास्टी नहीं करवा पाया। इस दौरान मरीज को एनजाइना पेन यानी सीने में दर्द के शिकायत भी थी।

वह दवा के सहारे ही उपचार से काम चला रहा था। इस बीच मरीज को अचानक से सीने में तेज दर्द के साथ अत्यधिक पसीने के लक्षण दिखने लगे। दूसरी धमनी में भी परेशानी आने की वजह से उसे गंभीर हार्ट अटैक आया, जिसके बाद मरीज को संस्थान के MICU में एडमिट किया गया।

अल्ट्रासाउंड गाइडेड टेक्निक के जरिए ब्लॉकेज को किया दुरुस्त

मरीज को भर्ती करके नियमित जांच और कोरोनरी एंजियोग्राफी की गई। जांच में मुख्य धमनी के अलावा हार्ट की खराब पंपिंग और दाई की तरफ की धमनी में भी गंभीर रुकावट होने का पता चला। इस बीच मरीज के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए प्रो. सत्येंद्र तिवारी की अगुवाई में टीम ने पहले दाई तरफ की धमनी को सही करने का फैसला किया। चिकित्सकों ने बैलूनिंग करके उसमें स्टेंट लगा दिया गया।

सालों से ब्लॉक चल रहे हार्ट के बाई तरफ के हिस्से को भी डॉक्टरों को सही करने की ठानी। इसके लिए लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के सहारे मरीज को CTO यानी क्रॉनिक टोटल ओक्लूडेड के लिए ले जाया गया। इसमें ब्लॉकेज की सही लोकेशन को पता लगाने में कठिनाई थी। चिकित्सकों ने IVUS यानी इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड तकनीक का उपयोग किया।

अल्ट्रासाउंड गाइडेड कैथेटर के टिप पर हाई रेसोलुशन कैमरे को फिट किया गया। यह काम टीम की सदस्य डॉ. रूपाली खन्ना ने किया। उन्होंने IVUS के जरिए मरीज के हार्ट में ब्लॉकेज को ढूंढ निकाला। फिर हार्ड वायर के प्रयोग से इसे भी सही कर दिया गया।

आर्थिक मदद मुहैया कराता है SGPGI

संस्थान के निदेशक प्रोफेसर डॉ.आरके धीमन ने बताया कि SGPGI में लेटेस्ट मेथोडोलॉजी से पेशेंट का उपचार किया जाता है। यदि मरीज की आर्थिक स्थिति कमजोर है, तो संस्थान उसे आर्थिक मदद भी मुहैया कराता है।

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