किसान के बेटे ने लिखी कामयाबी की इबारत:75 हजार US डॉलर की फंडिंग हासिल कर बढ़ाया LU का मान, अब गेमीफाइड लर्निंग एप से इंजीनियरिंग स्टूडेंटस होंगे पारंगत

लखनऊ6 महीने पहले
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लखनऊ यूनिवर्सिटी के बीटेक 3 ईयर स्टूडेंट शिवम सिंह। - Dainik Bhaskar
लखनऊ यूनिवर्सिटी के बीटेक 3 ईयर स्टूडेंट शिवम सिंह।
  • लखनऊ यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के थर्ड ईयर स्टूडेंट शिवम का स्टार्टअप 'ओरेजेन'
  • इंजीनियरिंग स्टूडेंटस को लेटेस्ट टेक्नोलॉजी में बनाएंगे पारंगत, करियर के मिलेंगे बेशुमार अवसर

लखनऊ यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग छात्र ने मिसाल पेश की है। कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के थर्ड ईयर स्टूडेंट शिवम सिंह को खुद के स्टार्टअप 'ओरेजेन' के लिए 75 हजार US डॉलर की फंडिंग मिली है। यह फंडिंग शिवम को जार्टप इन्वेस्टमेंट कंपनी से टेक्निकल क्रेडिट की रुप में हासिल हुई है। आने वाले कुछ महीनों के अंदर शिवम अपना प्रोजेक्ट लांच करने जा रहे हैं।

अपनी इस अभूतपूर्व कामयाबी का श्रेय शिवम अपने किसान पिता को देते हैं। शिवम का मानना है कि पिता से ही प्रेरणा लेकर उसने जीवन में हमेशा आगे बढ़ना सीखा है। उसी का नतीजा है कि आज यह उपलब्धि हासिल हुई है।

इंजीनियरिंग स्टूडेंटस को लेटेस्ट टेक्नोलॉजी में बनाएंगे पारंगत, करियर के मिलेंगे बेशुमार अवसर लखनऊ यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के स्टूडेंट शिवम सिंह ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि देश में हर साल बड़ी तादात में इंजीनियरिंग करके स्टूडेंट पास आउट हो रहे हैं। मगर उनके कौशल इंडस्ट्री की जरुरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि बड़ी संख्या में यह स्टूडेंट बेरोजगार रह रहे हैं या फिर मनमाफिक एम्प्लॉयमेंट नहीं हासिल कर पा रहे हैं। इसी करंट जॉब रिक्यारमेंट और वर्किंग ट्रेनिंग मॉड्यूल के गैप को भरने के लिए उन्होंने उन्हें ऑनलाइन गेमीफाइड लर्निंग एप 'ओरेजेन' को डिजाइन किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, एप्लीकेशन डेवलपमेंट, वेब डिजाइनिंग और ग्राफिक्स डिजाइनिंग यह वह क्षेत्र है, जिस पर 'ओरेजेन' फोकस करेगा।

क्या है 'ओरेजेन गेमीफाइड लर्निंग एक्सपीरियंस' की खूबियां ?
शिवम कहते हैं कि ओरेजेन गेमीफाइड लर्निंग एक्सपीरियंस के साथ एक न्यू ऐज स्किल डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म है। जिसकी मदद से वर्ल्ड वाइड अवसर इंजीनियरिंग स्टूडेंटस को हासिल हो सकेंगे। खास बात यह है कि लेटेस्ट इंडस्ट्री डिमांड को भी मैच करेगी और बेहतरीन हुनर हासिल करके हाई पेड सैलरी भी पा सकेंगे। इस स्टार्ट अप को बेहद उम्दा बनाने के लिए शिवम देश दुनिया के टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट को एमपैनल करने जा रहे है और उनके ऑनलाइन माध्यम से लाइव डेमोंस्ट्रेशन व वर्कशॉप स्टूडेंटस के लिए मुहैया कराएंगे। स्टार्ट अप की 'गेमीफाइड लर्निंग एक्सपीरियंस' को इसकी सबसे अहम खूबी करार देते हुए शिवम कहते है कि इसमें सेशन कुछ ऐसे ऑर्गनाइज होंगे कि स्टूडेंट को यह नार्मल ऑनलाइन क्लास व वेबिनार जैसा नहीं लगेगा। बल्कि उससे कही हटकर बेहद रोचक और इंटरेस्टिंग सेशन होगा।

कैसे हासिल की 75 हजार यूएस डॉलर की फंडिंग
शिवम बताते हैं कि उनके इस अप्रोच को साकार रुप देने में उनके 2 खास दोस्तों विकास सिंह व सिद्धार्थ राठौर का अहम योगदान रहा। सभी ने मिलकर इस स्टार्टअप का पूरा पिच डेक, बिजनेस प्लान, कॉम्पेटिटिव एडवांटेज प्लान और फाइनेंसिंग प्लान बनाया। एक स्टूडेंट के रूप में इन्वेस्टर्स को फंडिंग के लिए स्टार्टअप पर भरोसा दिला पाना काफी मुश्किल था। मगर खुद पर यकीन का नतीजा रहा कि असंभव सा लगने वाला काम भी, संभव हुआ। इसके लिए 20 से ज्यादा इन्वेस्टर्स को अप्रोच कर पहले सभी को फुल बिजनेस प्लान भेजा। काफी सारे इन्वेस्टर्स के साथ कई इंटरव्यू होने के बाद आखिर में जार्टप इन्वेस्टमेंट कंपनी में 2 राउंड के सेशन और इंटरव्यू के बाद लगभग 75 हजार डॉलर की फंडिंग रेज की, जिसकी मदद से वे अब अपने स्टार्टअप का मिनिमम वायबल प्रोडक्ट तैयार किया जाएगा और जल्द ही वह स्टार्टअप लॉन्च होगा।

इन्होंने दिखाई कामयाब की राह
अपनी कामयाबी के लिए शिवम किसान पिता के अलावा अपनी मां को श्रेय देते हैं। वह कहते हैं कि उन्ही के साथ वह लखनऊ के आलमबाग में सालों से रहते है। उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आएं, इसलिए मां उनके साथ ही रहती है। पिता हरदोई में पैतृक गांव में खेती किसानी देखते हैं। जब समय मिलता है तब वो भी लखनऊ आते है। इसके अलावा शिवम लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्लेसमेंट व ट्रेनिंग सेल इंचार्ज डॉ. हिमांशु पांडेय के सपोर्ट को भी बेहद अहम करार देते है। एलयू प्रवक्ता डॉ दुर्गेश ने बताया कि शिवम की इस कामयाबी पर पूरी यूनिवर्सिटी को गर्व है और बाकी स्टूडेंट भी उनसे सफलता से प्रेरणा लेकर ज़रुर आगे बढ़ेंगे।

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