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पुरानी पेंशन को लेकर पदयात्रा निकाली गई:अटेवा पेंशन बचाओं मंच के साथ कई संगठन जुड़े, 22 नवंबर को लखनऊ में करेंगे रैली, चुनाव में बनेगा मुद्दा

लखनऊ8 महीने पहले
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पुरानी पेंशन को लेकर कर्मचारियों ने पदयात्रा निकाली। - Dainik Bhaskar
पुरानी पेंशन को लेकर कर्मचारियों ने पदयात्रा निकाली।

पुरानी पेंशन को लेकर अटेवा पेंशन बचाओं ने शुक्रवार को पूरे प्रदेश में पदयात्रा शुरू की। लखनऊ में शहीदपथ से जिला मुख्यालय तक यात्रा निकाली। इस दौरान पुरानी पेंशन की मांग को लेकर कर्मचारियों ने नारे लगाए। आवाज उठाई गई कि जब पश्चिम बंगाल पुरानी पेंशन दे सकता है तो उप्र को भी देना चाहिए। इस दौरान निजीकरण भारत छोड़ो पदयात्रा भी निकाली गई। कर्मचारियों ने बताया कि अब 21 नवंबर को लखनऊ में बड़ी रैली की जाएगी।

अटेवा पेंशन बचाओ मंच उत्तर प्रदेश के नेता विजय बंधु ने बताया कि लगातार कई वर्षों से पुरानी पेंशन बहाली के लिए संघर्ष कर रहा है। धरना प्रदर्शन रैली और पदयात्रा के माध्यम से अपनी मांग को उठा रहा है। पदयात्रा में शामिल लोगों ने हाथों में तख्तियां लिए एनपीएस गो बैक, ओपीएस कम बैक, निजीकरण मुर्दाबाद, पुरानी पेंशन बहाल करो शिक्षक कर्मचारी एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। पदयात्रा में मातृ शक्तियां काफी सक्रिय रही और पदयात्रा की अगवानी करते हुए आगे कदम बढ़ाती रही।

सरकार और विदेशी दलों का ध्यान अपनी तरफ करेंगे

पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर अड़े अटेवा पेंशन बचाओ मंच ने शुक्रवार को पदयात्रा कर अपनी ताकत दिखाई है। अटेवा के साथ इस पदयात्रा में दर्जनों कर्मचारी संगठनों ने भी भाग लिया। अब अटेवा 21 नवंबर को लखनऊ में शंखनाद रैली कर सत्ताधारी भाजपा के साथ विपक्षी दलों का भी ध्यान आकर्षित करेगा। इसको लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अटेवा के इन आंदोलनों को कई कर्मचारी संगठनों का समर्थन भी मिल चुका है।

पूरे प्रदेश में मिल रहा समर्थन

अटेवा प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने बताया कि एनपीएस निजीकरण भारत छोड़ो पदयात्रा को अपार समर्थन मिला है। निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में यह पदयात्रा शिक्षकों कर्मचारियों के इतिहास में एक रिकॉर्ड स्थापित कर चुकी है। ब्लॉक-ब्लॉक और जिले-जिले से अभूतपूर्व समर्थन शिक्षक और कर्मचारियों का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और उनके परिवार के लोग इस आंदोलन के साथ हैं। विजय कुमार बंधु ने कहा कि हम अपनी मांगों को लेकर शहादत तक दे चुके हैं। जो सरकार हमारी मांगों की अनदेखी करती है, अब कर्मचारी और शिक्षक मिलकर उसे बदल देने का काम कर रहे हैं।

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