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शीशा देख यादें ताजा हो जाती हैं दिल भर आता:एसिड-अटैक सर्वाइवर अंशू, कुंती, रेश्मा, गुड़िया की संघर्ष भरी दास्तां, लखनऊ के शीरोज रेस्त्रां में नौकरी के साथ एक दूसरे का सुख-दुख बांट चला रही घर

लखनऊ5 महीने पहले
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एसिड अटैक सर्वाइवर। - Dainik Bhaskar
एसिड अटैक सर्वाइवर।

अंशू राजपूत, कुंती सोनी, रेश्मा, गुड़िया...... हर एसिड अटैक सर्वाइवर के सामने जब भी किसी अन्य के ऊपर एसिड अटैक होने की बात आती है तो उनके जहन में दिल दहला देने वाला अपना काला दिन दोबारा घूम जाता है। एसिड अटैक में शारीरिक चोट के साथ मानसिक सदमा हद से ज्यादा होता है । इन्हें अपनो से ज्यादा आस पड़ोस की उन सभी की नजरों और बातों से पीड़ा होती है जो इन्हें इस समाज का समझते ही नहीं। न जाने कितनी ऐसी दर्दनाक कहानियां हैं इन सभी एसिड अटैक सर्वाइवर की जो हमारा दिल दहला देती हैं । कुछ ऐसी दर्द भरी कहनी है जिनकी एक-एक बात दिल को झंझकोरने को मजबूर करती है। दैनिक भास्कर के साथ इन लोगों ने अपनी जिंदगी के उन पहलुओं को साझा किया जिसने एक पल में इनका पूरा जीवन ही बदल दिया।

मेरी सांस की नली सिकुड़ गई, मुझे सांस लेने में दिक्कत होने लगी...

एसिड अटैक सर्वाइवर अंशू राजपूत।
एसिड अटैक सर्वाइवर अंशू राजपूत।

पिता के उम्र के पड़ोसी कपिल शर्मा ने अवैध संबंध बनाने में असफल होने पर सोते वक्त तेजाब से नहला दिया। जिससे चेहरा बुरी तरह से खराब हो गया। इस हादसे के बाद मेरी सांस की नली सिकुड़ गई, मुझे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। मैं उसके बाद एक बदसूरत चेहरे, एसिड की जलन और एक आँख खोकर जिन्दगी से आज भी संघर्ष कर रही हूं... बिजनौर आबिदनगर निवासी अंशू राजपूत की कहानी दिल को दहला देती है। इन पर 12 फरवरी 2014 को पड़ोसी ने तेजाब डाला था। अंशू को इस घटना के बाद कई सर्जरी से गुजरना पड़ा, लेकिन दोबारा वह चेहरा वापस नहीं लौटा। एसिड अटैक सर्वाइवर अंशू एसिड अटैक पीड़ितों के अधिकारों के लिए सरकार से मांग करती हैं कि हमको पैसे नहीं अच्छा इलाज चाहिए। सरकारी अस्पताल में सर्जरी की वह सुविधा नहीं है। इसके चलते हमको प्राइवेट अस्पताल में भी इलाज की सुविधा दी जाए। समाज में हम अपनी पहचान बना सकें इसके लिए सरकारी नौकरी मिले। साथ ही आऱोपियों को जल्द सजा दिलाने की व्यवस्था बने।
पति नहीं वह इंसान के रूप में भेड़िया था....

एसिड अटैक सर्वाइवर कुंती सोनी।
एसिड अटैक सर्वाइवर कुंती सोनी।

एक इन्सान तो महिला पर एसिड फेंकने की बात सपने में भी नहीं सोच सकता। वह इंसान की शक्ल में भेड़िया था। कहने को तो मेरा पति था, लेकिन शराब के आगे सब कुछ उसके लिए बेकार। मेरे पति ने अपने परिजनों के बहकावे में आकर एसिड फेंक दिया। ऐसिड पड़ने के बाद भयानक जलन हो रही थी। मैं जमीन पर तड़प रही थी, मेरी दोस्त ने सिर पर पत्थर से हमले की बात समझकर रूमाल लगाया। उसके हाथ में जलन हुई तो पता चला मेरे ऊपर तेजाब फेंका गया है। उस दिन की जलन आज भी महसूस होती है जब उस मनहूस 22 अक्टूबर 2011 की घटना जहन में आती है। यह कहना है राजाजी पुरम की कुंती सोनी का। उन्होंने कहा कि घटना के बाद किसी तरह खुद को संभाला और जिंदगी शीरोज हैंगआउट कैफे से जुड़कर अब पटरी पर लौटने लगी है। कभी खुशी होती है कि मेरे पति सागर ने जो मेरे साथ किया उसका ही नतीजा है कि जुलाई 2017 में एक्सीटेंड में उसकी मौत हो गई। फिर लगता है कि क्या सिर्फ यही सजा है। जो मेरी पूरी जिन्दगी का दर्द दे गया।
बेटियां होने पर तेजाब डाल दिखाई मर्दानगी

एसिड अटैक सर्वाइवर रेश्मा।
एसिड अटैक सर्वाइवर रेश्मा।

बेटा न होने पर पति ने मर्दानगी दिखाते हुए सोते वक्त तेजाब डाला जिसके बाद आज भी उठते-बैठते शरीर दर्द से भर जाता है। पांच बेटियों की देखभाल और इस समाज की खोखली रीति-रिवाजों के आगे जीवन भर का दर्द देने वाले के साथ जीवन बिताने को मजबूर कर दिया। यह कहना है पुराने लखनऊ की रहने वाली रेश्मा का। जिसके पति ने 2013 में पांच बेटियां होने के कारण तेजाब डाल दिया था। इसके बाद समाज और बच्चियों की खातिर उसके साथ ही जीवन जीना पड़ रहा है, लेकिन जब भी वह घटना याद आती है तो उसका चेहरा देखना भी सजा लगने लगता है। सरकार को चाहिए कि हम जैसी पीड़िताओं को समाज में मान्यता दिलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाने चाहिए। जैसे सरकारी नौकरी, घर और प्राइवेट अस्पताल में इलाज। जिससे हम पुरानी जिन्दगी जीने के लायक हो जाएं।
जब पति को कोई कुछ कहता है तो आंखों भर आती हैं...

एसिड अटैक सर्वाइवर गुड़िया।
एसिड अटैक सर्वाइवर गुड़िया।

मेरे पति मेरे बारे में किसी से गलत बात सुनकर आते हैं तो परेशान हो जाते हैं। उनकी यह हालत देख मेरी आंखे भर आती हैं। रात में नींद नहीं आती। आज भी लोग जिस्म की जगह इंसान से प्यार करते हैं, यह कोई मेरे पति से सीखे। यह कहना है बलिया की गुड़िया का। जिसके पति ने उसके एसिड अटैक सर्वाइवर होने की जानकारी के बाद भी शादी की। गुड़िया पर उसके ही परिवार के तीन लोगों ने पारिवारिक रंजिश के चलते एसिड फेंक दिया था। गुडिया अपने पति व बेटे के साथ खुश है, लेकिन समाज में उसको लेकर जो बाते होती हैं उसको लेकर आज भी दुखी है।
यह संस्था दे रही इनको सहारा

शीरोज रेस्त्रां लखनऊ।
शीरोज रेस्त्रां लखनऊ।

शीरोज रेस्त्रां लखनऊ व आगरा, छांव फाउंडेशन, मीर फाउंडेशन एसिड सर्वाइवर्स एंड वीमेन वेलफेयर फाउंडेशन, कोलकाता।

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