PUBG के लिए मां की हत्या:फौजी को बेटे पर शक था; 5 दिन में 2 हजार कॉल किए; घर जाता, लेकिन टिकट ही नहीं मिला

लखनऊ6 महीने पहलेलेखक: सुनील कुमार मिश्रा

लखनऊ में मां की गोली मारकर हत्या करने वाले 16 साल के बेटे के इरादों की भनक उसके पिता को पहले ही लग गई थी। छटपटाहट में उन्होंने 5 दिन में 2 हजार से ज्यादा कॉल किए। 3 जून को एक बार बात हुई, लेकिन दोबारा कॉल रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद से ही उन्हें एहसास हो रहा था कि अब पत्नी जिंदा नहीं है। उनकी ये आशंका उस वक्त यकीन में तब्दील हो गई जब खुद बेटे ने ही उन्हें कॉल करके कहा कि मां मर चुकी है। दरअसल बेटे और मां के बीच रिश्ते ठीक नहीं थे। पिता से बात करते हुए अक्सर बेटा अपनी मां को गालियां दिया करता था।

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नवीन ने दैनिक भास्कर से बात की। पढ़िए, नवीन की जुबानी ही उन पांच दिनों की पूरी कहानी, जब हर पल उनकी आंखों के सामने वो सब कुछ दिख रहा था, जो उन्होंने देखा ही नहीं था।

ये फोटो नवीन की पत्नी साधना की है। 3 जून को नवीन की आखिरी बार बात हुई थी।
ये फोटो नवीन की पत्नी साधना की है। 3 जून को नवीन की आखिरी बार बात हुई थी।

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3 जून शुक्रवार: पत्नी से आखिरी बार बात हुई

नवीन कुमार सिंह पश्चिम बंगाल के आसनसोल में 21 राजपुताना बटालियन में पोस्टेड हैं। वह बताते हैं, 'शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे मैंने पत्नी साधना को फोन किया। पूछा कि बिजली का बिल जमा हुआ कि नहीं। जवाब मिला- JE के पास ही जा रही हूं। यह मेरी पत्नी से आखिरी बातचीत थी। इसके बाद शाम को मैंने फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। लगातार करीब 50 कॉल पर भी कोई जवाब नहीं मिला। इसी वक्त मुझे लगा कि बेटे ने मां को मार डाला।'

4 जून शनिवार: दोपहर में बेटे ने उठाया फोन

'शुक्रवार को कोई रिप्लाई नहीं मिला तो शनिवार सुबह से ही मैंने फिर फोन करना शुरू किया। दोपहर में बेटे ने फोन उठाया। उसने बताया कि मम्मी बिजली का बिल जमा करने गई हैं। मुझे लगा कि साधना किसी बात से नाराज होकर फोन नहीं उठा रही, लेकिन बेटे की बात पर भी एतबार नहीं हो रहा था। फोन की हर घंटी पर मैं घबरा जाता था। पूरा दिमाग घर की तरफ लगा था। घर आने के लिए ट्रेन का तत्काल टिकट निकलवाने पहुंचा, लेकिन टिकट नहीं मिला। शाम हुई तो फिर फोन लगाना शुरू किया।'

5 जून रविवार: पड़ोसी ने बताया बेटा स्कूटी लेकर जा रहा है

'रविवार सुबह 8 बजे थे। मैंने फोन किया तो अचानक बेटे ने फोन उठा लिया। पूछा- मम्मी कहां है। बेटा बोला सामान लेने बाहर गई हैं। मैंने उससे कहा कि बहन से बात कराओ। बेटी ने भी वही बात दोहराई जो भाई बोल चुका था, लेकिन उसकी आवाज बुझी सी थी। मुझे पक्का लगने लगा कि बेटे ने उसकी मां को मार दिया है। इसके बाद मैंने सामने रहने वाले पड़ोसी को फोन किया। उनको घर भेजा। पड़ोसी ने बताया कि घर पर कोई नहीं है। बेटा क्रिकेट की किट लेकर स्कूटी से कहीं जा रहा है। इस पर मेरा शक पुख्ता हो गया, क्योंकि साधना बेटे को कभी स्कूटी नहीं देती थी।'

इस तस्वीर में आरोपी के पिता नवीन कुमार सिंह सफेद हाफ पैंट और टी-शर्ट में दिख रहे हैं।
इस तस्वीर में आरोपी के पिता नवीन कुमार सिंह सफेद हाफ पैंट और टी-शर्ट में दिख रहे हैं।

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6 जून सोमवार: ट्यूटर को घर भेजा, उसे गेट अंदर से लॉक मिला

'मुझे लग रहा था कुछ गड़बड़ हो गया है। मैंने बेटे के ट्यूशन टीचर को फोन किया। उनको घर भेजा। वह घर पहुंचे तो घर का गेट अंदर से लॉक था। उन्होंने बहुत खटखटाया, लेकिन गेट नहीं खुला। उसने बताया कि लॉबी में धूल जमी है। पालतू कुत्ता जो हमेशा अंदर AC में बैठता था, वह लॉबी में बैठा है। इसके बाद ट्यूटर ने साधना के वॉट्सऐप नंबर पर मैसेज दिया। कुछ देर बाद साधना के नंबर से ही बेटे ने मैसेज दिया कि वह बाहर हैं। ट्यूटर वहां से चले गए, लेकिन मेरा शक यकीन में बदलता जा रहा था। मैंने साधना के नंबर पर सुबह से शाम तक सैकड़ों कॉल की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मायूस होकर किसी तरह रात गुजारी।'

7 जून मंगलवार: बेटे ने फोन करके कहा कि मां को किसी ने मार डाला

'सुबह होते ही फिर कॉल लगाना शुरू कर दिया। दोपहर में साधना के पिता को फोन किया, लेकिन वहां से भी कोई हालचाल नहीं मिला। शाम के करीब 7:30 बज रहे थे। साधना के नम्बर से कॉल आई। रिसीव करते ही बेटे की बोझिल सी आवाज आई। बोला- पापा, मम्मी की किसी ने हत्या कर दी। सुनते ही मेरा कलेजा बैठ गया। मेरे मुंह से सीधे निकला- हरामखोर अपनी मां को मार डाला।'

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3 जून शुक्रवार: बेटे के लिए मां ने किताबें खरीदींं

साधना बेटे को लेकर बाजार गईं, उसकी किताबें खरीदींं। इसके बाद बिजली का बिल जमा करने गईं लेकिन JE नहीं मिला। इस बीच नवीन की कॉल आती रही, लेकिन उठा नहीं पाईं। मकान के ऊपर निर्माण चल रहा है। इसका सामान लेने फिर बाजार गईं। दिन भर की भागदौड़ के बाद घर लौटी और सो गईं।

4 जून शनिवार: गहरी नींद में मां को मारी गोली

सुबह फिर से मां साधना बिल जमा करने के लिए बिजली विभाग के ऑफिस गईं। वहां से लौटकर आई तो मिस्त्री ने कुछ सामान लाने को कहा। वो लेकर लौटीं तो बेटा फोन पर गेम खेल रहा था। गुस्से में फोन छीनकर बेटे के बाल पकड़कर पिटाई की। शाम को 10 हजार रुपए गायब हो गए। बेटे पर शक हुआ तो फिर से उसे पीटा।

रात करीब 10 बजे एक ही बेड पर बीच में साधना, दाईं ओर बेटा और बाईं ओर 10 साल की बेटी सोई थी। रात 2 बजे बेटा उठा। बहन और मां गहरी नीद में थी। उसने अलमारी से पिस्टल निकाली। मैगजीन लोड की और साधना की दाईं कनपटी पर सटाकर फायर कर दिया।

गोली की आवाज सुनकर बहन जगी तो बोला चेहरा घुमा ले मां मर चुकी है। इसके बाद बहन को दूसरे कमरे में लेकर चला गया। पूरी रात बहन सिसकती रही और वो उसे धमकाता रहा।

5 जून रविवार: स्कूटी लेकर मैच खेलने चला गया

सुबह 8 बजे बहन को कमरे में बंद करके मां की स्कूटी लेकर मैच खेलने चला गया। दोपहर 3 बजे खेलकर लौटा। शाम 5 बजे एक दोस्त को फोन करके बुलाया। बहन को दूसरे कमरे में बंद करके दोस्त के साथ पार्टी की। रात भर दोनों ने मूवी देखी। दोस्त ने मां के बारे में पूछा तो बताया कि दादी के पास गईं हैं।

6 जून सोमवार: पड़ोसी के घर जाकर बहन के लिए खाना मांगा

सुबह दोस्त चला गया। दोपहर करीब 12 बजे बहन ने कहा कि भूख लगी है। इस पर पड़ोसी के घर गया। बोला कि मां दादी के घर गई है। मुझे खाना बनाना नहीं आता है। बहन भूखी है। पड़ोसी ने खाना दिया। उसे लेकर घर आया। शाम 5 बजे दूसरे दोस्त को बुलाया। इस बार दोस्त के साथ घर में ही खाना बनाया। तब तक कमरे में पड़ी लाश सड़ने लगी थी। हल्की बदबू आ रही थी। उसने दोस्त से बोला घर के बगल में जानवर मरा है।

7 जून मंगलवार: लाश छिपाना मुश्किल हो गया

पिता नवीन का सुबह से फोन और वॉट्सऐप मैसेज आ रहा था। दोपहर में उसने कॉल पिक किया। शाम तक घर के अंदर बेतहाशा बदबू फैल गई। उसे लगा कि घटना को छिपाना अब मुश्किल है। इस पर शाम करीब 7 बजे खुद पिता नवीन को फोन किया। बोला- पापा छत के रास्ते घर में घुसकर किसी ने मां की हत्या कर दी।

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