UP में गरजे बिहार के मंत्री मुकेश सहनी:बोले- निषाद जातियों को नहीं दिया SC का आरक्षण तो मिशन-2022 का सपना देखना छोड़ दे सरकार

लखनऊ3 महीने पहले
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यूपी में गरजे ‘सन ऑफ मल्लाह’। - Dainik Bhaskar
यूपी में गरजे ‘सन ऑफ मल्लाह’।

विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री मुकेश सहनी ने रविवार को अंबेडकरनगर और आजमगढ़ में 'निषाद चेतना रैली' को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यूपी के 403 विधानसभा क्षेत्रों में 169 पर निषाद वोट बैंक काफी निर्णायक है।

अगर निषाद जातियों को एससी (अनुसूचित जाति) का आरक्षण नहीं दिया गया तो इस बार चुनाव में समाज अपनी ताकत दिखाएगा। बिना निषादों के किसी की नैया पार नहीं लगेगी। यूपी में उनकी पार्टी अब आर या पार की लड़ाई लड़ेगी। हर हाल में समाज को आरक्षण दिलाकर रहेगी।

2022 में निषाद समाज अपना दम दिखाएगा

मुकेश सहनी ने कहा कि अगर प्रदेश की मौजूदा सरकार ने अपने वादे के अनुसार निषाद समुदाय की मल्लाह, केवट, बिंद, मांझी, धीवर, कहार, गोड़िया, रायकवार आदि जातियों को अनुसूचित जाति के आरक्षण का राजपत्र और शासनादेश जारी नहीं किया तो मिशन-2022 की नैया पार नहीं लगेगी।

मिशन-2022 में निषाद जातियां निर्णायक की भूमिका निभाएंगी। अब निषाद समाज किसी के वादे को सुनकर उनकी तरफ नहीं जाएगा। चुनाव से पहले अनुसूचित जाति आरक्षण शासनादेश और राजपत्र जारी करने के बाद ही उनकी पार्टी किसी के साथ गठबंधन करेगी।

मुकेश सहनी ने कहा कि सरकार चाहे तो दो-चार दिन में मझवार, तुरैहा, गोड़, बेलदार आदि को परिभाषित कर या पूर्ववर्ती सरकारों के भेजे गए प्रस्ताव को स्वीकार कर निषाद जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दे सकती है।

आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं

मुकशे सहनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निषादों के वोट से कई पार्टियों ने राज किया, लेकिन निषादों को भला करने के बजाय उन्होंने अपने घर की तिजोरी भरी। उन्हें निषाद समाज को आरक्षण और अधिकार दिलाने की चिंता नहीं है। विकासशील इंसान पार्टी का साफ तौर पर कहना है कि आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं। पहले निषाद जातियों को अनुसूचित जाति का आरक्षण चाहिए, उसके बाद प्रदेश में पार्टी किसे समर्थन और किसके साथ गठबंधन करेगी, इस पर विचार किया जाएगा।

71 विधानसभा में 70 हजार से अधिक निषाद मतदाता

मुकेश सहनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 12.91 प्रतिशत निषाद जातियां होने के बाद भी सभी राजनीतिक दल इनके साथ दोयम दर्जें का बर्ताव करते आ रहे हैं। गोरखपुर, गाजीपुर, जौनपुर, फतेहपुर, कानपुर, सिद्धार्थनगर, अयोध्या, अम्बेडकर नगर, चन्दौली, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बलिया, वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही, प्रयागराज, बांदा, आगरा, औरैया, फिरोजाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बाराबंकी, बहराइच, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर, बदायूॅ, बरेली, उन्नाव, इटावा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, बस्ती के दो या दो से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में निषाद समाज का वोट बैंक 40 हजार से अधिक है। 71 विधानसभा क्षेत्रों में 70 हजार से अधिक निषाद मतदाता हैं, फिर भी समाज की अनदेखी की जा रही है। वीआईपी पार्टी यूपी में निषादों को आरक्षण दिला कर रहेगी।

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