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  • To Ban Such Marriages, The Muslim Personal Law Board Issued A New Guideline, Saying – Marriage With Non Muslims Is Not Justified; Keep An Eye On Girls Mobile

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बोला- गैर मुस्लिमों से शादी नाजायज:शरीयत में मुसलमानों को दूसरी बिरादरी में शादी की इजाजत नहीं, मां-बाप लड़कियों को को-एड स्कूलों में न भेजें, उनके मोबाइल पर नजर रखें

लखनऊ5 महीने पहले
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जारी की नई गाइडलाइन। - Dainik Bhaskar
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जारी की नई गाइडलाइन।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इंटरकास्ट मैरिज को अवैध करार दिया है। बोर्ड ने गैस मुस्लिमों से निकाह पर चिंता जताते हुए नई गाइडलाइन जारी की है। गाइडलाइन में पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि इस्लामिक शरीयत में मुसलमान लड़के-लड़कियों को दूसरी बिरादरी में शादी करने की इजाजत नहीं है। इसलिए इंटरकास्ट मैरिज अवैध है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यवाहक महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि लड़का हो या लड़की। दोनों को केवल मुस्लिम से ही शादी करने की इजाजत है। अगर कोई गैर मुस्लिम से निकाह करता है तो इस्लाम में वो शादी वैध नहीं मानी जाएगी। भले ही उसने निकाह की सभी रस्मों को अंजाम दिया हो। तब भी वो शादी अवैध ही मानी जाएगी। मौलाना ने लड़कियों के मोबाइल फोन पर कड़ी नजर रखने की अपील की है।

बच्चों के मोबाइल पर रखें कड़ी नजर
मौलाना ने मां-बाप से बच्चों खासकर बच्चियों के मोबाइल फोन पर कड़ी नजर रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बच्चों को बिगाड़ने में मोबाइल बड़ी वजह है। उन्होंने कहा कि लड़कियों को बालिका स्कूल में पढ़ाने की कोशिश करें। मां-बाप की जिम्मेदारी है कि वो अपने बच्चों को बुरी आदतों से बचाएं। बच्चों के रुटीन पर नजर रखें। वो कब-कहा जाते हैं, किससे मिलते हैं।

गैर मुस्लिमों से शादी पर जताया अफसोस
मौलाना खालिद सैफुल्लाह ने वर्तमान समय में लगातार बढ़ रही इंटरकास्ट मैरिज पर अफसोस जाहिर किया। कहा कि शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के दौरान व नौकरी के दौरान पुरुषों और महिलाओं के साथ-साथ होने से इंटरकास्ट मैरिज के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने इसके लिए मां-बाप को भी कसूरवार ठहराया।

मौलाना ने कहा कि, कई घटनाएं सामने आई हैं जिसमें मुस्लिम लड़कियां गैर-मुस्लिम लड़कों के साथ चली गई। बाद में उनको बड़ी परेशानियों से गुजरना पड़ता है। कुछ मामलों में तो लड़कियों ने सुसाइड कर लिया। नई पीढ़ी को ऐसी परेशानियों से बचाने के लिए ही बोर्ड ने उलेमा, धार्मिक संगठनों, परिवार, समाज के लिए नई गाइडलाइन जारी की है।

सादगी से निकाह करने की अपील
बोर्ड ने मुस्लिम समुदाय से बेहद सादगी से निकाह करने की अपील की है। गाइडलाइन में कहा गया है कि, सादगी से निकाह करना बरकत है। इसमें नस्ल की सुरक्षा है। सादगी से निकाह कर मुस्लिम समुदाए अपनी दौलत को बर्बाद होने से बचाकर ये पैसा बच्चों की शिक्षा पर खर्च करें। उनको आधुनिक शिक्षा के साथ मजहबी तालीम दें ताकि वो इस्लाम के बताए रास्तों पर जिंदगी गुजार सके।

ये है नई गाइडलाइन

  • मस्जिदों के इमाम जुमा के खिताब, कुरान और हदीस के दर्स में इस विषय को लोगों तक पहुंचाया जाए।
  • उलेमा होने वाले जलसों में इंटरकास्ट मैरिज से होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को जागरुक किया जाए।
  • लगातार महिलाओं के इज्तेमा ( धार्मिक आयोजन) हों और उनमें सुधारात्मक विषयों के साथ चर्चा की जाए।
  • मां-बाप बच्चों को मॉर्डन एजुकेशन के साथ दीनी तालीम (धार्मिक शिक्षा) दें।
  • बच्चों के मोबाइल फोन पर कड़ी नजर रखी जाए।
  • मैरिज रजिस्ट्रेशन कार्यालय जाकर शादी करने वाले लोगों के घर जाकर उनको समझाने की कोशिश की जाए।
  • लड़कों खासकर लड़कियों की शादी समय रहते कर दी जाए। शादी में देर बिलकुल न की जाए।
  • सादगी से निकाह किया जाए। निकाह में बर्बाद होने वाली रकम को बच्चों की शिक्षा पर लगाएं।
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