अपना दल (क) का सपा से गठबंधन तय:राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल बोलीं- अखिलेश से हुई चर्चा; जल्द ही हम लोग दिखेंगे एक मंच पर

लखनऊ8 दिन पहले
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लखनऊ में पार्टी कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर कृष्णा पटेल ने सपा से गठबंधन के बारे में जानकारी दी। - Dainik Bhaskar
लखनऊ में पार्टी कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर कृष्णा पटेल ने सपा से गठबंधन के बारे में जानकारी दी।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार छोटे दलों के साथ गठबंधन कर रहे हैं। अब सपा का गठबंधन अपना दल (कृष्णा गुट) से हो गया है। अपना दल (कृष्णा गुट) की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने कहा कि हमने अखिलेश यादव से मुलाकात की। हमारा गठबंधन हो गया है। हम समान विचारधाराओं के लोगों के साथ गठबंधन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव से सार्थक बात और चर्चा हुई। बहुत जल्द हम लोग एक मंच पर दिखाई देंगे। हमारी प्राथमिकता सीट को लेकर नहीं थी। सीट को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।

16 दिन पहले भास्कर लिखी थी खबर, ढाई महीने से चल रही थी बात
दैनिक भास्कर ने 16 दिन पहले ही लिखा था कि अपना दल (कमेरावादी) के साथ सपा का गठबंधन होगा। बताया जा रहा है कि ढाई महीने पहले कृष्णा पटेल की बेटी पल्लवी पटेल ने अखिलेश यादव के मुलाकात की थी। तभी से गठबंधन की बात चल रही है। पल्लवी की बहन अनुप्रिया पटेल NDA के साथ हैं। वह केंद्र में मंत्री भी हैं। फिलहाल, यूपी में करीब 10 प्रतिशत कुर्मी वोटरों की रहनुमाई को लेकर दोनों बहनों का दावा है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात करती कृष्णा पटेल।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात करती कृष्णा पटेल।

पूर्वांचल समेत 12 जिलों में है कुर्मी समुदाय का प्रभाव अपना दल का वाराणसी, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, रॉबर्ट्सगंज में सीधा प्रभाव है। सोनेलाल पटेल कुर्मी समुदाय के बड़े नेता थे। राज्य की कुल पिछड़ा आबादी में करीब 24 प्रतिशत कुर्मी समुदाय के लोग हैं। विंध्याचल, बुंदेलखंड और पूर्वांचल के कुछ इलाकों में इनकी राजनीतिक अहमियत बहुत हो जाती है।

हालांकि कुर्मी से ज्यादा पिछड़ा वर्ग में सिर्फ यादव आबादी है। यह कुल पिछड़ा आबादी का करीब 40 प्रतिशत है। यही वजह है कि कृष्णा पटेल के नेतृत्व वाले अपना दल को कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव में पीलीभीत और गोंडा की 2 सीटें दी थीं।

दो धड़ों में बंटी पार्टी फिर एक नहीं हुई अपना दल का गठन सोनेलाल पटेल ने किया था। जिसकी कमान उनके निधन के बाद अनुप्रिया पटेल ने संभाली। 2012 में अनुप्रिया पटेल पहली बार विधायक चुनी गईं। 2014 में भाजपा से गठबंधन कर सांसद बनी। इसके बाद अनुप्रिया पटेल और उनकी मां कृष्णा पटेल के बीच सियासी वर्चस्व की जंग छिड़ गई।

अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने पल्लवी पटेल को अपनी जगह पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने का फैसला किया था। जिसका अनुप्रिया पटेल ने विरोध किया। इसके बाद अनुप्रिया ने खुद को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया था। जिस पर उनकी मां ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था।

फिर अपना दल 2 हिस्सों में बंट गई। एक की कमान अनुप्रिया पटेल ने अपने हाथों में ले ली। तो दूसरी की कमान उनकी मां कृष्णा पटेल और बहन पल्लवी पटेल के पास है। अनुप्रिया पटेल खुद को सोनेलाल पटेल के वारिस के तौर पर साबित करने में सफल रही हैं। जबकि कृष्णा पटेल अभी कोशिशें कर रही हैं। अनुप्रिया के गुट के नेताओं को मानना है कि पल्लवी पटेल के चलते परिवार में सुलह-समझौता का फॉर्मूला नहीं बन पा रहा है।

कृष्णा पटेल ठुकरा चुकी हैं बेटी अनुप्रिया का ऑफर कृष्णा पटेल की तरफ से बाकायदा एक बयान जारी किया गया। जिसमें उन्होंने साफ कर दिया है कि किसी भी कीमत पर अनुप्रिया पटेल के साथ नहीं जाएंगी। उन्होंने कहा कि डॉ. सोनलाल पटेल के आंदोलन की अहमियत का इन्हें अंदाजा ही नहीं है। यह नहीं जानते कि डॉक्टर पटेल मंत्री बनाने और एमएलसी बनाने के लिए नहीं लड़ रहे थे। वह किसानों के लिए लड़ रहे थे। जो लोग इनसे समझौता करके बैठे हैं। वह बहुत छोटी राजनीति कर रहे हैं।