UP विधानसभा उपाध्यक्ष का चुनाव:BJP से नितिन और SP से नरेंद्र वर्मा ने किया नामांकन; CM योगी बोले- हमारी पार्टी संसदीय परंपरा का किया पालन

लखनऊ3 महीने पहले

उत्तर प्रदेश में 17वीं विधानसभा के उपाध्यक्ष पद के लिए आज 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच नामांकन प्रक्रिया हुई। भाजपा से सपा के बागी नितिन अग्रवाल ने नामांकन किया तो सपा से सीतापुर के महमूदाबाद से विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा ने पर्चा दाखिल किया है। अब 18 अक्टूबर को मतदान होगा। यह पहली बार है जब चुनाव होने जा रहा है। नितिन अग्रवाल पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल के बेटे हैं।

उपाध्यक्ष संसदीय परंपरा के मुताबिक विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल का होना चाहिए। भाजपा नितिन अग्रवाल को मैदान में उतारकर यह जताना चाहती है कि उसने संसदीय परंपरा का निर्वहन करते हुए सपा के ही विधायक का चयन किया है।

नितिन के नामांकन के वक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद मौजूद थे। उन्होंने कहा, भाजपा संसदीय परंपराओं का पालन कर रही है। सबसे बड़े विपक्षी दल के लिए पद रिजर्व दिया गया है। लेकिन वह कैंडिडेट नहीं दे पाया। नितिन अग्रवाल विपक्षी दल के हैं। नितिन अग्रवाल का समर्थन करने के लिए हम सभी आए हैं।

विधानसभा के डिप्टी स्पीकर पद के लिए नामांकन करते नितिन अग्रवाल।
विधानसभा के डिप्टी स्पीकर पद के लिए नामांकन करते नितिन अग्रवाल।

भाजपा के पास बहुमत
विधानसभा में भाजपा का बहुमत है। ऐसे में नितिन अग्रवाल के उपाध्यक्ष पद पर विजयी होने में कोई संशय नहीं दिखता है। मगर सपा ने प्रत्याशी उतारा तो नितिन के निर्विरोध चुने जाने की भाजपा की रणनीति को धक्का जरूर लगा है।

सोमवार को होगा मतदान
UP विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने बताया कि विधानसभा उपाध्यक्ष का निवार्चन स्वीकार हुआ है। सोमवार को सुबह 11 बजे सदन में दिवंगत सदस्यों की शोक संवेदना व्यक्त की जाएगी। इसके बाद उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। विधान सभा के इस विशेष सत्र के कार्यक्रम को आज अंतिम रूप दे दिया गया है।

विधानसभा अध्यक्ष ने नितिन के खिलाफ दायर याचिका को रद्द कर दिया था।
विधानसभा अध्यक्ष ने नितिन के खिलाफ दायर याचिका को रद्द कर दिया था।

वैश्य बनाम कुर्मी की टक्कर
यूपी विधानसभा उपाध्यक्ष पद का 18 अक्टूबर को चुनाव तय हुआ है। नितिन अग्रवाल साल 2017 के चुनाव में सपा के टिकट पर जीते थे। बाद में वे अपने पिता नरेश अग्रवाल के साथ भाजपा में चए गए। सपा ने उनके बागी होने की स्थिति में दलबदल कानून के तहत नितिन की सदस्यता रद्द करने की याचिका विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित के समक्ष दायर की। लेकिन अध्यक्ष ने सपा की याचिका खारिज कर दी थी।
याचिका खारिज होने के बाद ही भाजपा ने अब नितिन अग्रवाल को विधानसभा उपाध्यक्ष पद बनाने का फैसला लिया है। भाजपा ऐसा करके वैश्य वोटों को साधने की कोशिश में भी है। क्योंकि बीते 5 साल में सपा से आए नरेश अग्रवाल को भी भाजपा में कुछ हासिल नहीं हुआ। वे अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इधर विधानसभा चुनाव निकट है ऐसे में भाजपा नितिन के जरिए नरेश अग्रवाल की नाराजगी को दूर करने के साथ वैश्य वोटों को सहजने का प्रयास करेगी।

उधर सपा नेतृत्व ने भी भाजपा को राजनीतिक तौर पर कटघरे में खड़ा करने के लिए नितिन अग्रवाल के मुकाबले पूर्व मंत्री और पार्टी के चार बार के विधायक नरेंद्र वर्मा को उपाध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाने का फैसला लिया है।

खबरें और भी हैं...