पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

UP में कोरोनों मौतों से भी सबक नहीं:प्रदेश में लापरवाही चरम पर, रोज कट रहे 4.10 करोड़ के चालान; 21 दिन में 86 करोड़ का जुर्माना वसूला

लखनऊएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
आंशिक लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर कार्रवाई करती पुलिस। - Dainik Bhaskar
आंशिक लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर कार्रवाई करती पुलिस।

उत्तर प्रदेश में कोरोना महामारी की रोकथाम में सरकार का स्वास्थ्य महकमा फेल हो रहा है तो पुलिस का डंडा इसकी भरपाई करने में जुटा हुआ है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इन थोड़े दिनों के आंशिक लॉकडाउन में इसका उल्लंघन करने वालों से पुलिस अब तक 86 करोड़ रुपए जुर्माना वसूल चुकी है। इसकी जानकारी ADG कनून व्यवस्था ने कार्रवाई के आंकड़े जारी करते हुए दी।

24 मार्च 2020 में कोरोना की पहली लहर के दौरान सम्पूर्ण लॉकडाउन लगाया गया और लोगों को घर से बाहर निकलने पर पाबंदी थी। उस वक़्त अप्रैल तक पुलिस ने प्रदेश भर में लॉकडाउन का उल्लंघन करने में 42359 चालान काटकर 5 करोड़ 87 लाख रुपए जुर्माना वसूला था। इस बार कोरोना के घातक रूप में दस्तक के बाद चारों तरफ हाहाकार मच गया। हर घंटे लोग मर रहे हैं और सरकार उन्हें समय से इलाज देने में नाकाम साबित हो रही है।

नाइट कर्फ्यू के साथ सख्ती शुरू की

हालात बिगड़ते देख 15 अप्रैल से सरकार ने नाइट कर्फ्यू के साथ सख्ती शुरू की जो धीरे-धीरे लॉकडाउन में बदल गया। हालांकि, इसे आंशिक लॉकडाउन तक सीमित रखकर इसका समय 10 मई तक बढ़ा दिया गया है। इस आंशिक लॉकडाउन का उल्लंघन करने के मामले में प्रदेशभर में अब तक 53 लाख, 89 हजार, 83 चालान काटे जा चुके हैं। इस चालान की जद में आने वालों से 86 करोड़ 12 हजार 179 रुपए जुर्माना वसूला गया जो सामान्य तौर पर पुलिस की पूरे साल की कार्रवाई से कई गुना ज्यादा है।

जिम्मेदारी से बचने के लिए आंशिक लॉकडाउन का फाॅर्मूला

जानकारों का कहना है कि सम्पूर्ण लॉकडाउन में जनता की मूलभूत सुविधाओं और जरूरतों की जिम्मेदारी सरकार की होती है। पिछली बार सम्पूर्ण लॉकडाउन में सरकार लोगों को सुविधाएं मुहैया करवाने से लेकर उनके जीवनरक्षा तक हर मोर्चे पर फेल रही। पब्लिक ट्रांसपोर्ट न मिलने की वजह से यूपी के लाखों कामगारों, मजदूरों ने पैदल सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय किया। इसमें सैकड़ों जिंदगियां चली गईं। सरकार के कम्युनिटी किचन की व्यवस्था कारगर नहीं हुई और जाने कितने बेसहारा भूख से मर गए। इन सबके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए विपक्ष ने खूब शोर-शराबा किया। पिछली बार से सबक लेते हुए सरकार इस बार उन हालात की जिम्मेदारी अपने सिर नहीं लेना चाहती इसलिए आंशिक लॉकडाउन का फाॅर्मूला अपना रही है।