मोदी के भरोसेमंद एके शर्मा प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए:UP की सियासत में फिर योगी भारी पड़े; संघ के सामने दूसरी बार झुके PM मोदी, इसीलिए एके शर्मा संगठन में आए

लखनऊ4 महीने पहले
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  • दो सचिव और 7 मोर्चा अध्यक्षों की भी हुई नियुक्ति, पहले शर्मा को डिप्टी सीएम बनाने की चर्चा थी

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन में बड़ी नियुक्तियां की गई हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने शनिवार को पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए एक प्रदेश उपाध्यक्ष, 2 प्रदेश मंत्री (सचिव) और 7 मोर्चा अध्यक्ष नियुक्त किए हैं।

नई नियुक्तियों के तहत प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के 18 साल से भरोसेमंद रहे रिटायर्ड आईएएस अफसर और MLC अरविंद कुमार शर्मा को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। शर्मा को संगठन और सरकार में जगह देने के लिए पिछले कुछ समय से अटकलों का बाजार गर्म था।

शर्मा की एंट्री तो धमाकेदार रही, लेकिन अब संगठन को देंगे विस्तार

उत्तर प्रदेश की सियासी उठापठक से दिल्ली और नागपुर अछूता नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी के साथ 18 सालों तक साये की तरह काम करने वाले पूर्व आईएएस एके शर्मा वीआरएस लेकर राजनीति में आए हैं। राजनीति में उनकी एंट्री भी धमाकेदार रही। पहले उन्हें भाजपा में शामिल कराया गया और फिर अगले दिन ही उन्हें MLC का टिकट भी पकड़ा दिया गया। उसी समय से अटकलें थीं कि शर्मा को यूपी में कुछ बड़ा पद दिया जाएगा। एक महीने पहले योगी मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा शुरू हुई, उसमें उन्हें डिप्टी सीएम का दावेदाद भी बताया गया। हालांकि, सीएम योगी के एक मास्टर स्ट्रोक ने सारी कहानी ही बदल दी।

संघ के आगे दूसरी बार पीएम मोदी को झुकना पड़ा है। इससे पहले जब यूपी का सीएम चुनने की बारी आयी थी तो भाजपा के वरिष्ठ नेता और मोदी के करीबी माने जाने वाले मनोज सिन्हा को यूपी का सीएम बनाए जाने की काफी अटकलें चलीं थीं। यहां तक कि मनोज सिन्हा को संसद में भी यूपी का नया मुख्यमंत्री बनाए जाने की बधाई भी दे दी गई थी, लेकिन आखिरी वक्त में संघ ने योगी के नाम पर मुहर लगा दी थी।

योगी ने अपनी मंशा संघ और मोदी को बता दी थी

बीजेपी के सूत्र बताते हैं कि पिछले दो महीनों से योगी के ऊपर शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का दबाव बनाया जा रहा था, लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं थे। अंदरूनी खींचतान की खबरों के बीच संघ के सरकार्यवाह 4 दिन के दौरे पर लखनऊ पहुंचे थे। लखनऊ में होने के बावजूद योगी ने उनसे मुलाकात नहीं की। इससे नाराज बीजेपी संगठन और संघ ने भी योगी को दिल्ली में तलब किया। दबाव के बीच योगी दिल्ली गए और वह प्रधानमंत्री पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्‌डा और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर लखनऊ लौट आए।

दबाव बढ़ने पर योगी ने कर दी थी इस्तीफे की पेशकश

भाजपा के सूत्रों की माने तो जब अरविंद शर्मा को मंत्रिमंडल में लेने का दबाव बढ़ने लगा तो सीएम योगी ने दबाव की राजनीति के तहत अपना मास्टरस्ट्रोक खेला। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के सामने इस्तीफे की पेशकश तक कर डाली थी। योगी ने संघ से कहा कि जब उनके पास गृह मंत्रालय ही नहीं रहेगा तो वह सीएम किस काम के? फिर उन्होंने कहा कि वह पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। योगी के इस कदम से संघ भी बैकफुट पर आ गया। इसके बाद अरविंद शर्मा को मंत्रिमंडल की बजाए संगठन में ही फिट करने पर सहमति बनी। इसके लिए संघ ने पीएम मोदी को भी राजी कर लिया।

टाटा नैनो को गुजरात लाने में अहम भूमिका
अरविंद शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में 11 अप्रैल 1962 को हुआ। 1988 बैच के गुजरात कैडर के IAS शर्मा ने पॉलिटिकल साइंस में फर्स्ट क्लास से मास्टर्स किया। टाटा नैनो को गुजरात लाने, राज्य में निवेश और वाइब्रेंट गुजरात समिट के आयोजनों में इनकी भूमिका अहम रही। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से मास्टर ऑफ पब्लिक पॉलिसी और अमेरिका से स्ट्रक्चरिंग टैरिफ की ट्रेनिंग भी ली है।

18 साल से मोदी के भरोसेमंद
'एके' के नाम से पहचाने जाने वाले शर्मा के बारे में मशहूर है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वस्त ब्यूरोक्रेट्स में से एक हैं। पिछले 18 साल से मोदी के भरोसेमंद हैं। जून 2014 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आने वाले शर्मा PMO में ज्वॉइंट सेक्रेटरी बनाए गए थे। 2017 में उन्हें एडिशनल सेक्रेटरी बनाया गया।

महामारी के दौरान वाराणसी समेत कई जिलों में काम किया
एके शर्मा काशी व पूर्वांचल के आसपास कोविड नियंत्रण से जुड़ी रणनीति बनाने व उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पीएम मोदी के करीबी माने जाने वाले शर्मा कोविड की दूसरी लहर में लगातार सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

केवल वाराणसी ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के अन्य 20 से ज्यादा जिलों में भी लगातार एक्टिव हैं। वाराणसी में कोरोना की रोकथाम को लेकर वे लगातार काशी में डेरा जमाए हुए हैं और स्थिति को काबू में करने के लिए प्रयास कर रहे थे।

भाजपा के 7 विभिन्न मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा भी की गई

शनिवार को भाजपा के 7 विभिन्न मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा भी की गई है। प्रियांशु दत्त द्विवेदी (फर्रूखाबाद) को युवा मोर्चा, गीता शाक्य राज्यसभा सांसद (औरैया) को महिला मोर्चा, कामेश्वर सिंह (गोरखपुर) को किसान मोर्चा, नरेन्द्र कश्यप पूर्व सांसद (गाजियाबाद) को पिछड़ा वर्ग मोर्चा, कौशल किशोर सांसद को अनुसूचित जाति मोर्चा, संजय गोण्ड (गोरखपुर) को अनुसूचित जनजाति मोर्चा व कुंवर बासित अली (मेरठ) को अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया है।

भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष ब्रहमदत्त द्विवेदी के भतीजे हैं

प्रियांशु दत्त द्विवेदी को भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए है। प्रियांशु, भाजपा के कद्दावर नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी के भतीजे है। ब्रहमदत्त की 1998 में हत्या हो गई थी। फर्रूखाबाद निवासी प्रांशुदत्त की युवाओं में अच्छी पकड़ है।

चर्चा में रहने वाले सांसद कौशल किशोर को फिर कमान

कौशल किशोर सांसद को अनुसूचित जाति मोर्चा का फिर से अध्यक्ष बनाया है। किशोर पहले भी मोर्चा के अध्यक्ष रहें है। कौशल प्रदेश सरकार को लिखे अपने पत्रों के कारण लगातार चर्चा में रहते है।

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