इलाहाबाद हाईकोर्ट की 2 बड़ी खबरें:विलंब शुल्क के नाम पर कॉलेजों की ओर से की जा रही धोखाधड़ी को रोकने का आदेश

लखनऊ2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने डिग्री कॉलेजों द्वारा अपने छात्रों से विलंब शुल्क वसूलने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इसे धोखाधड़ी का कृत्य बताते हुए, राज्य सरकार व विश्वविद्यालयों को इस रोकने के लिए कदम उठाने का आदेश दिया है। यह आदेश जस्टिस विवेक चौधरी की एकल पीठ ने राम अवतार कल्याणी देवी कन्या महाविद्यालय, माधुरी सिंह महाविद्यालय व श्री जगदेव सिंह महाविद्यालय की ओर से दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया।

उक्त तीनों ही कॉलेज लखनऊ यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध हैं। दरअसल, लखनऊ यूनिवर्सिटी ने परीक्षा शुल्क देर से जमा करने पर इन कॉलेजों को प्रति छात्र पांच सौ रुपए का विलम्ब शुल्क जमा करने का निर्देश दिया था। जिसके बाद कॉलेजों ने वर्तमान याचिकाएं दाखिल कीं। याचिकाओं पर अंतरिम राहत देते हुए, कोर्ट ने प्रति छात्र ढाई सौ रुपये विलम्ब शुल्क जमा करने का आदेश दिया। हालांकि बाद में यूनिवर्सिटी ने अपने पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए, विलम्ब शुल्क को ढाई सौ रुपये ही कर दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची कॉलेज दाखिले के समय ही छात्रों से पूरा शुल्क वसूल लेते हैं लेकिन हर साल वे परीक्षा शुल्क जमा करने में देरी करते हैं।

कोर्ट ने इस पर कहा कि ऐसे कॉलेज बाद में विलंब शुल्क छात्रों से वसूल करते हैं। यह छात्रों और विश्वविद्यालय दोनों के साथ धोखा है। कोर्ट ने आगे कहा कि इस प्रकार का कोई प्रावधान नहीं है कि ऐसे कॉलेज विलंब शुल्क छात्रों से न वसूल सकें। कोर्ट ने निर्देश दिया कि विश्वविद्यालयों को अकादमिक सत्र की शुरूआत में ही यह प्रावधान करना चाहिए।

मुख्तार अंसारी के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र पर 2 नवंबर को होगी सुनवाई

सीजेएम रवि कुमार गुप्ता ने कूटरचित दस्तावेजों के जरिए एक निष्क्रांत जमीन पर मकान का अवैध निर्माण कराने के आपराधिक मामले में निरुद्ध मुल्जिम मुख्तार अंसारी के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को तय की है। सोमवार को इस मामले में मुख्तार अंसारी को बांदा जेल से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से पेश किया गया था। इस मामले में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी व उमर अंसारी भी मुल्जिम है।

इनके खिलाफ पहले ही आरोप पत्र दाखिल हो चुका है। मुल्जिमों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 420, 467, 468 व 471 के साथ ही सार्वजनिक सम्पति निवारण नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 3 में आरोप पत्र दाखिल किया गया है।

27 अगस्त, 2020 को इस मामले की FIR प्रभारी लेखपाल सुरजन लाल ने थाना हजरतगंज में दर्ज कराई थी। जिसके मुताबिक राजधानी के जियामऊ इलाके की एक निष्क्रांत जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए व अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मुल्जिमों ने अवैध रुप से मकान का निर्माण कराया है। मुल्जिमों ने आपराधिक षडयंत्र से मकान का नक्शा पास कराकर निर्माण कराया और करोड़ों की सरकारी सम्पति का नुकसान करते हुए जमीन को हड़प लिया।

खबरें और भी हैं...