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गोरखपुर परवेज अहमद एनकाउंटर मामला:खान मुबारक के जरिए मुख्तार गैंग को आर्थिक मदद पहुंचा रहा था परवेज अहमद, STF ने दो महीने तक किया था वर्क आउट

लखनऊ6 दिन पहले
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गोरखपुर में परवेज अहमद एनकाउंटर मामला। - Dainik Bhaskar
गोरखपुर में परवेज अहमद एनकाउंटर मामला।

अंबेडर नगर में अपने आका अंडरवर्ल्ड माफिया खान मुबारक के खिलाफ आखिरी गवाह बसपा नेता जुरगाम की हत्या करके फरार हुआ परवेज अहमद पूर्वांचल के माफिया और बांदा जेल बंद मुख्तार अंसारी को आर्थिक मदद पहुंचा रहा था। उसने गोरखपुर और आसपास के जिलों को वसूली का अड्‌डा बनाया था। यहां से वह आसानी से सरहद पार करके सोनौली के रास्ते नेपाल भाग जाता जहां इस वक्त उसका स्थाई ठिकाना था। एसटीएफ के मुताबिक करीब दो महीने से परवेज पर नजर रखी जा रही थी।

जुरगाम की हत्या करके 2018 में फरार हुआ परवेज लंबे समय से नेपाल में रह रहा था। आईएसआई समर्थित लश्कर-ए-तैय्यबा के स्लीपर सेल का कमांडर उमर शम्स उर्फ मदनी नेपाल में अपना एजुकेशनल आर्गनाइजेशन चलता है। यहीं पर परवेज को संरक्षण मिल रहा था। लगातार जेल में रहने और कई खास लोगों के मारे जाने से मुख्तार गैंग कमजोर पड़ने लगा तो खान मुबारक ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया।

खान मुबारक अंबेडकर नगर के भठ्‌ठा कारोबारी ऐनुद्दीन की हत्या में इस वक्त उरई जेल में बंद है। यहां से उसने मुख्तार से संपर्क करके मदद का भरोसा दिलाया। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक खान मुबारक के कहने पर परवेज ने फिर से रंगदारी वसूलना शुरू किया। उसने गोरखपुर और देवरिया के कुछ बड़े व्यापारियों से संपर्क साधा जिसके बाद एसटीएफ की रेडार पर आ गया।

दो महीने की फिल्डिंग के बाद निशाने पर आया परवेज एसटीएफ के मुताबिक कई महीनों से परवेज की गोरखपुर में दखल की जानकारी मिल रही थी। करीब दो महीने पहले उसने व्यापारियों से रंगदारी के लिए संपर्क किया था। तभी से उसकी फिल्डिंग लगाई जा रही थी। इस बीच कई बार उसे घेरने का प्रयास किया गया लेकिन वह भागने में कामयाब रहा।

एसटीएफ के मुताबिक मुख्तार गैंग से जुड़े लोगों का सहयोग मिलने की वजह से उसे गाजीपुर, बनारस, मऊ और पूर्वांचल के कई जिलों में आसानी से छिपने की जगह भी मिल रही थी। बीते दो महीनों में दस ज्यादा बार उसकी लोकेशन गोरखपुर और बनारस में ट्रेस की गई थी। गैंग के हर सदस्य पर पुलिस की पैनी नजर की वजह से मुख्तार के लोगों ने वसूली का काम बंद कर रखा था।

परवेज से मुख्तार का सीधा कनेक्शन न होने की वजह से पूर्वांचल में वसूली के की जिम्मेदारी उसे सौंपी गई थी। पूर्वी यूपी से होने वाली वसूली का पैसा खान मुबारक के जरिए मुख्तार गिरोह में पहुंच रहा था।

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