किसानों का डाटाबेस तैयार कर रही सरकार:डिजिटल कृषि की योजना का पायलट प्रोजेक्ट तैयार, मथुरा, मैनपुरी और हाथरस से होगी शुरुआत; किसान योजनाओं को किया जाएगा लिंक

लखनऊएक महीने पहले
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प्रदेश सरकार किसानों की खेती का रकबा डिजिटाइज्ड करने जा रही है। सरकार ने कार्ययोजना भी तैयार कर ली है। - Dainik Bhaskar
प्रदेश सरकार किसानों की खेती का रकबा डिजिटाइज्ड करने जा रही है। सरकार ने कार्ययोजना भी तैयार कर ली है।

किसान आंदोलन के बीच यूपी सरकार बहुत किसानों की खेती का रकबा डिजिटाइज्ड करने जा रही है। इसके लिए सरकार ने कार्ययोजना भी तैयार कर ली है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सबसे पहले यूपी के 3 जिलों को चुना गया है। जिनमें मथुरा, मैनपुरी और हाथरस शामिल हैं। इन जिलों के 10-10 गांव के सभी किसानों का सरकार डाटा इकट्ठा करेगी। इसमें किसान की भूमि का लेखा-जोखा जोड़ा जाएगा। इतना ही नहीं जिन गांवों के किसानों का डेटाबेस तैयार किया जाएगा, उनकी जमीन का नक्शा भी डिजिटाइज्ड किया जाएगा।

किसानों के कल्याण से योजनाओं को लिंक करने के साथ उनको समय-समय पर एडवाइजरी भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही किसानों की ओर से तैयार किए जा रहे उत्पादों के लिए उचित विपणन की भी व्यवस्था सरकार करेगी।

कृषि से होगा यूपी का विकास
सरकार का मानना है कि उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास की नींव कृषि क्षेत्र है। किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने, उनको रोजगार के अवसर देने के भी बराबर प्रयास किये जा रहे हैं। डिजिटल कृषि की योजना से किसानों का जो डाटाबेस तैयार होगा उससे इसकी भी जानकारी मिल सकेगी कि किसानों को किस प्रकार का अनुदान किन-किन योजनाओं से प्राप्त हुआ है। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस योजना को शुरु करने वाले मथुरा, मैनपुरी और हाथरस जिलों के जिलाधिकारियों को डाटाबेस तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि इस कार्य के लिए जिलों में किसी अधिकारी को नोडल के रूप में नामित किया जाए। इसके साथ ही भारत सरकार एवं एनआईसी दिल्ली के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर डाटाबेस का कार्य पूरा कराया जाए।

केंद्र सरकार द्वारा आयोजित सम्मेलन को सीएम ने किया संबोधित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के सम्बन्ध में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा किया गया था। इस सम्मेलन के आयोजन का मकसद राज्यों को कृषि एवं किसान कल्याण के सम्बन्ध में रणनीति बनाना था। सम्मेलन को केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी सम्बोधित किया।

यूपी ने खाद्यान्न उत्पादन में नया रिकॉर्ड स्थापित किया
यूपी में वर्ष 2012 से 2017 की अवधि में प्रति वर्ष धान का औसत उत्पादन 139.40 लाख मीट्रिक टन, साढ़े चार वर्ष में यह बढ़कर 163.45 लाख मीट्रिक टन हो गया है। जबकि वर्ष 2012 से 2017 की अवधि में धान की खरीद 123.61 लाख मीट्रिक टन, वर्तमान सरकार के साढ़े चार वर्ष में यह बढ़कर 214.56 लाख मीट्रिक टन हो गई।साढ़े चार वर्ष की अवधि में 31,88,529 कृषकों को अब तक 37,885 करोड़ रु0 धान मूल्य का भुगतान किया जा चुका है। वर्ष 2012 से वर्ष 2017 के मध्य 19,02,098 कृषकों को 12,808 करोड़ रुपये गेहूं मूल्य का भुगतान, वर्तमान सरकार के साढ़े चार वर्ष में 43,75,574कृषकों को 36,405 करोड़ रुपये गेहूं मूल्य का भुगतान के साथ ही वर्ष 2012 से 2017 तक की अवधि में 95,215 करोड़ रु0 गन्ना मूल्य का भुगतान, वर्तमान सरकार द्वारा 45.74 लाख गन्ना कृषकों को अब तक 1,42,366 करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य का भुगतान कराया जा चुका है।

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