48 घंटे में 97 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी गई:कोयले की कमी से बढ़ता जा रहा बिजली खरीद का बोझ , दो और इकाइयां हुई बंद, 700 मेगावाट उत्पादन हुआ बंद

लखनऊएक महीने पहले
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कोयले की कमी से बिजली संकट बढ़ता जा रहा है। - Dainik Bhaskar
कोयले की कमी से बिजली संकट बढ़ता जा रहा है।

कोयले की कोई भी यूनिट पूरी क्षमता से नहीं चल रही है। यही वजह से कि उप्र सरकार ने एनर्जी एक्सचेंज से पिछले 48 घंट में करीब 97 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी है। इस दौरान गुरुवार को एक बार फिर से दो उत्पादन यूनिट इकाइयां बंद हो गई है। इसमें हरदुआगंज में 110 मेगावॉट और परीछा में 210 मेगावॉट यूनिट शामिल है। इसके अलावा बाकी जगह पर भी उत्पादन पर असर पड़ा है। यही वजह है कि पूरे प्रदेश में 700 मेगावॉट बिजली उत्पादन कम रहा।

बताया जा रहा है कि बुधवार की शाम को अब तक की सबसे महंगी बिजली खरीदी गई है। करीब 63 करोड़ खर्च कर पावर कॉरपोरेशन ने 27 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी है। इसके लिए प्रति यूनिट 19.20 रुपए का भुगतान किया गया है। वहीं, गुरुवार की शाम तक भी आपूर्ति के लिए करीब 21 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी है। हालांकि इसके लिए प्रति यूनिट 16.50 रुपए का भुगतान करना पड़ा। इसकी वजह से कॉरपोरेशन को 34.82 करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ा।

कोई भी यूनिट पूरी क्षमता से नहीं चल रही

अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय कोई भी यूनिट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही है। स्थिति यह है कि कोयले की कमी दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में एक - एक यूनिटों के बंद होने का क्रम जारी है। स्थिति यह है कि अक्टूबर में अब तक 325 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है। जबकि अगस्त से अब तक 550 मिलियन यूनिट कम बिजली उप्र पावर कॉरपोरेशन को मिली है।

आने वाले दिनों में कायम रहेगी समस्या

अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए हॉल- फिलहाल स्थिति में सुधार होता नहीं दिख रहा है। स्थिति यह है कि कोयले की कमी को दूर करने का कोइे ठोक प्रयास नहीं हो रहा है। सामान्य तौर पर 15 दिन का कोयले का रिजर्व स्टॉक होना चाहिए। जबकि अनपरा के पास केवल डेढ़ दिन का स्टॉक बचा है और परीछा में आधे दिन का। ओबरा के पास केवल दो दिन का, जबकि हरदुआगंज में केवल एक दिन का स्टॉक बचा है।

महंगी बिजली बेचने की मनमानी का विरोध

एनर्जी एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदने का विरोध शुरू हो गया है। उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसको लेकर मोर्चा खोल दिया है। उपभोक्ता परिषद ने ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से मिलकर एक्सचेंज की दरों पर सीलिंग लगाने की मांग की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा की मांग के बाद उप्र सरकार ने भी केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को सीलिंग का प्रस्ताव भेज दिया गया है। इसमें बिजली रेट की मनमानी रोकने की मांग की गई है। अध्यक्ष अवधेश वर्मा का आरोप है कि बीते तीन दिन में ही एक्सचेंज ने यूपी से 80 करोड़ का, जबकि देशभर से 840 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है।

छह रुपए प्रति यूनिट की बिजली 20 रुपए में बेच रहे हैं

अवधेश वर्मा का कहना है कि बिजली की वास्तविक लागत 6 रुपए/यूनिट से भी कम है जबकि इसको 20 रुपए प्रति यूनिट तक बेचा जा रहा है। उपभोक्ता परिषद ने ऊर्जा मंत्री को एक प्रस्ताव सौंपा है, जिसमें एक्सचेंजों की बिजली का अधिकतम मूल्य तय करने की बात कही गई है। दलील है कि केंद्र का कानून है कि कोई भी बिजली की ट्रेडिंग करने वाला अधिकतम 4 पैसा प्रति यूनिट से ज्यादा नहीं कमा सकता है। अवधेश वर्मा ने बताया कि पांच दिनों में इंडियन एनर्जी एक्सचेंज के शेयरों में 143 रुपये का उछाल आया है। यह उछाल लगभग 23 प्रतिशत का है।