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प्रियंका के तेवरों से कांग्रेसियों में जगी उम्मीद:आने वाले दिनों में बेरोजगारी व महंगाई को बड़ा मुद्दा बनाकर सड़क पर उतरने की तैयारी,लखीमपुर खीरी कांड़ ने कार्यकर्ताओं में फूंकी नई जान

लखनऊ2 महीने पहले
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वाराणसी में उन्होंने अपनी रैली की शुरुआत जहां शक्ति की आराधना से की है‚ वहीं यह बताने से भी नहीं चूकीं कि उन्होंने नवरात्रि के व्रत रखे हुए हैं। - Dainik Bhaskar
वाराणसी में उन्होंने अपनी रैली की शुरुआत जहां शक्ति की आराधना से की है‚ वहीं यह बताने से भी नहीं चूकीं कि उन्होंने नवरात्रि के व्रत रखे हुए हैं।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को मुख्य लड़ाई में लाने के लिए जी जान से जुटी प्रियंका गांधी के तेवरों ने जहां कांग्रेसियों में नई जान फूंकने का काम किया है‚ वहीं अब उन्हें लगने लगा है कि यदि पाटी जनहित के मुद्दों पर सड़क पर उतर जाए तो आने वाले चुनाव में कांग्रेस सम्मान जनक सीटों के साथ वापसी कर सकती है। सूत्रों की मानें तो लखीमपुर खीरी कांड़ से शुरू हुआ प्रियंका का अभियान अब रुकने वाला नहीं है और आने वाले दिनों में यह और आक्रामक होता नजर आएगा।

आम जन के मुद्दों के साथ जनता के बीच जाना

लखीमपुर खीरी कांड में जिस तरह से प्रियंका ने मेहनत की है‚ उससे राज्य में सबसे निचले पायदान पर खड़ी दिखाई दे रही पार्टी पिछले कुछ दिनों से राज्य में मुख्य विपक्षी दलों सपा और बसपा को पीछे छोड़कर फ्रंट फुट पर नजर आने लगी है। राज्य की सियासी लड़ाई में प्रियंका अपने प्रतिद्धंदियों से काफी आगे नजर आ रही हैं। उनके तेवर बता रहे हैं कि वह विधानसभा चुनाव तक इस टैंपो को बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रियंका के नजदीकी सूत्रों की मानें तो उन्होंने राज्य के नेताओं को आने वाले दिनों में बड़ी लड़ाई के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में कांग्रेस बेरोजगारी व महंगाई जैसे आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़क पर संघर्ष करती दिखाई पड़ेगी। लखीमपुर खीरी कांड़ में जिस तरह से प्रियंका ने आक्रामक रुख अपनाया हुआ है‚ उससे जहां कांग्रेस के कार्यकर्ता उत्साहित हैं‚ वहीं सत्तारूढ़ दल में बेचैनी में है। राज्य में कांग्रेस को फिर से पुरानी स्थिति में लौटाने की लड़ाई में जुटीं प्रियंका सियासत के हर हथियार को आजमाने को तैयार हैं।

मंदिरों की परिक्रमा, दलित, किसान, नौजवान और महिलाएं के एजेंडे पर धार देने पर जोर

भाजपा के उग्र हिंदुत्व की काट और अपने कांग्रेस पर लगे अल्पसंख्यक हितैषी के आरोपों को मिटाने के लिए प्रियंका अब न केवल मंदिरों की परिक्रमा कर रही हैं‚ बल्कि इसका प्रदर्शन करने से भी नहीं चूक रही हैं। वाराणसी में उन्होंने अपनी रैली की शुरुआत जहां शक्ति की आराधना से की है‚ वहीं यह बताने से भी नहीं चूकीं कि उन्होंने नवरात्रि के व्रत रखे हुए हैं। साफ है कि उनकी नजर हिंदू वोटों पर है। किसान‚ नौजवान व महिलाएं‚ जहां उनके एजेंडे़ में हैं‚ वहीं दलित‚ ब्राह्मण व पिछड़े वर्ग के मतदाताओं पर भी उनकी नजर है।

सीएम के झाड़ू लगाने के बयान पर प्रतिक्रिया दिखाई

झाडू लगाने के उनके वीडियो पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की टिप्पणी पर उन्होंने जिस तरह की प्रतिक्रिया दिखाई है‚ वह अपने परंपरागत दलित वोटों को पुनः अपने पाले में लाने की उनकी रणनीति का एक हिस्सा है। उनकी सबसे बड़ी चुनौती राज्य में कांग्रेस का जमीनी मजबूत ढांचा न होना है। आने वाले दिनों में उनका पूरा फोकस इसी पर रहने वाला है। राजनीति के जानकार भी इस बात को मानते हैं कि लखीमपुर खीरी कांड़ से प्रियंका ने पार्टी कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने में सफलता पाई है कि यदि पार्टी के लोग पूरी ईमानदारी से जनहित के मुद्दाें पर जनता के बीच खड़े नजर आ जाएं तो राज्य में मुश्किल लड़ाई को बहुत हद तक आसान बनाया जा सकता है।