लखनऊ के नाइट क्लब से निकलने वाले 70% नशे में:ड्रिंक एंड ड्राइव पर सजा का प्रावधान; पुलिस सीट-बेल्ट और हेलमेट के चालान कर रही

लखनऊ6 महीने पहलेलेखक: प्रवीण राय

स्थान गोमतीनगर विभूतिखंड की समिट बिल्डिंग। समय रात के 12.07 बजे। भास्कर टीम 13वीं मंजिल पर पहुंची। एक क्लब से कपल बाहर निकल रहा था। लड़का और लड़की दोनों ही लड़खड़ाते हुए लिफ्ट की तरफ बढ़ते हैं। यहां से बेसमेंट की पार्किंग तक पहुंचते हैं। यहां तक हमने उनका पीछा किया। नशा इस कदर सिर चढ़ा हुआ था कि वो अपनी कार नहीं ढूंढ पाते हैं। वहां खड़ा गार्ड उनकी हालत समझ लेता है। लड़का चाबी गार्ड की तरफ फेंक देता है। गार्ड उनकी कार लेकर आता है। लड़का बमुश्किल कार लेकर पार्किंग से निकल जाता है।

इस खबर में पोल भी है। आप हिस्सा लेकर सवाल का जवाब भी दे सकते हैं।

पार्किंग के इस सीन से हम आपको दोबारा बिल्डिंग की 13वीं मंजिल पर ले चलते हैं। यहां एक क्लब से दो लड़के और दो लड़कियां बाहर निकलते हैं। एक लड़का बीयर का कैन हाथ में लिए हुए हैं। किसी बात को लेकर उनके बीच झगड़ा भी होता रहता है। फिर ये लोग पार्किंग में पहुंचते हैं। हमारी टीम ने फिर उनका पीछा किया। एक लड़का कार लेने जाता है, जबकि दोनों लड़कियां और लड़का बीयर के घूंट पीते रहते हैं। कुछ देर बाद वो सभी कार में बैठकर पार्किंग से निकल जाते हैं। ड्राइवर नशे में ही था।

5 घंटे तक पार्किंग में मौजूद दैनिक भास्कर टीम के सामने हर घंटे ऐसे सीन कई बार होते हैं। नशे में धुत लड़के-लड़कियां आते रहते हैं। उसी हालत में कार को चलाकर अपने घरों की तरफ रवाना होते रहे। लड़के-लड़कियों के आने और जाने के बीच हमारे रिपोर्टर का आकलन रहा कि करीब 70% लड़के-लड़कियां नशे में ही घरों की तरफ रवाना हुए थे। सिर्फ 30% यूथ ऐसा मिला, जिसके पैर जमीन पर सीधे पड़ रहे थे।

लड़के के हाथ से बीयर लड़की लेकर पीती है, फिर लड़का घूंट पर घूंट पीता रहता है।
लड़के के हाथ से बीयर लड़की लेकर पीती है, फिर लड़का घूंट पर घूंट पीता रहता है।

कार की चाबी पकड़ाने के स्टाइल से जान लेते हैं कितने पैग ज्यादा हुए

यहां की स्थिति को और बेहतर समझने के लिए हमने वहां तैनात कुछ गार्ड से भी बात की। समिट बिल्डिंग के बेसमेंट पार्किंग में गार्ड हंसते हुए कहते हैं कि साहब, गाड़ी की चाबी पकड़ाने के स्टाइल से ही हम समझ जाते हैं कि कितने पैग ज्यादा हो चुके हैं। इतना तजुर्बा हो चुका है।

हमारी जिम्मेदारी गाड़ी उन तक पहुंचाने की होती है। कई बार तो साहब या मेमसाहब, पार्किंग से निकलने से पहले ही गाड़ी दीवार से लड़ा लेते हैं। तब हमें ही मदद करनी होती है। उनकी मेम साहब साथ में होती हैं, इसलिए टिप भी अच्छी दे जाते है। ये जगह ही ऐसी है, यहां बिना पिए कोई नहीं होता।

पीआरवी रहती है, लेकिन आती तब है जब हंगामा होता है

अब इस बिल्डिंग से बाहर निकलते हैं। पास ही पीआरवी वैन तैनात मिलती है। ऐसा लगता है कि उनकी ड्यूटी सिर्फ हंगामा होने के बाद ही शुरू होती है। शराब पीकर आने वालों के लिए शायद उनकी जिम्मेदारी नहीं है। हमने ट्रैफिक पुलिस महकमा से ड्रिंक एंड ड्राइव के बारे में जानना चाहा। सामने आया कि अभियान चलते हैं, लेकिन हेलमेट और सीट बेल्ट तक सीमित रहते हैं। दूसरी तरफ, शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के बारे में बिल्डिंग के क्लब संचालक कहते हैं कि हमारी जिम्मेदारी सिर्फ क्लब तक सीमित है।

एसीपी ट्रैफिक बोले-नशे में गाड़ी चलाने वालों की धरपकड़ नहीं हुई

ट्रैफिक पुलिस की भूमिका और बेहतर समझने के लिए हमने एसीपी ट्रैफिक सैफुद्दीन बेग से बात की। उन्होंने बताया कि शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों की स्पेशल ड्राइव नहीं चलाई जा सकी है। हेलमेट, ट्रिपलिंग, सीट बेल्ट, रांग साइड, प्रदूषण सर्टिफिकेट की मद में लगातार चालान हुए हैं।

वहीं, केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के CMS डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि हादसे के जितने भी केस ट्रॉमा में पहुंचे हैं, उनमें 25% ड्रिंक एंड ड्राइव के ही होते हैं। इस पर सख्ती होने से हादसे भी नियंत्रित हो सकते हैं। दैनिक भास्कर लगातार आपको इस हकीकत के करीब ले जा रहा है। यहां आप देख पाते हैं कि कैसे ये नाइट क्लब रूल्स तोड़ते हैं। यहां से निकलने वाले यूथ अराजक हो जाते हैं। इससे आस-पास रहने वालों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है

आइए आपको लखनऊ में चले ट्रैफिक अभियान के फैक्ट भी बताते हैं...

तारीखहेलमेटट्रिपलिंगसीट बेल्ट
6 मई3743502
7 मई3122308
8 मई3302311
9 मई3122403
10 मई3713006
13 मई3261307
14 मई4001509
15 मई2361009
17 मई2151509
18 मई2401501
19 मई6041710
20 मई9276114

(सोर्स : यातायात पुलिस लखनऊ कमिश्नरेट)

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