लखीमपुर खीरी कांड के सियासी मायने, तीन राज्य पर असर:दर्द बांटने न्याय दिलाने की यात्रा से कांग्रेस का क्या लाभ, यूपी 42, उत्तराखंड में 9 विधान सभा सीट तो पंजाब में भी इसका प्रभाव

लखनऊएक महीने पहले
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अतिंम अरदास पर लखीमपुर खीरी में पहुंचकर प्रियंका गांधी ने मृतक किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित  की। - Dainik Bhaskar
अतिंम अरदास पर लखीमपुर खीरी में पहुंचकर प्रियंका गांधी ने मृतक किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर कांड में किसानों की मौत के बाद पूरे देश में हल्ला और शोर हैं। विपक्ष पूरी तरह से भाजपा सरकार को घेरने में पीछे नहीं है। लेकिन पहले दिन से लखीमपुर खीरी में हुए बवाल के बाद से कांग्रेस ज्यादा ही हमलावर है। सोनभ्रद, हाथरस के बाद एक बार फिर से राहुल-प्रियंका गांधी की दर्द बांटने न्याय दिलाने की यात्रा से कांग्रेस की सियासी लाभ तलाशने की संभावना आकी जा रही है। फिलहाल यूपी सरकार डैमेज कंट्रोल करने में दिन-रात जुटी रही। सरकार ने अधिकारियों को मौके पर भेजने से लेकर विपक्ष के नेताओं को घटना स्थल पर न जाने से रोका। यहीं नहीं मृतक के परिजनों से मुलाकात तक नहीं करने देने के पीछे आगामी विधानसभा में चुनावी नुकसान होने का भय साफ दिख रहा है। यूपी के भारत-नेपाल बॉर्डर से सटे लखनऊ मंडल का लखीमपुर जिला सबसे अहम हिस्सा है। इसका कुल क्षेत्रफल 7680 वर्ग किलोमीटर है। लखीमपुर खीरी और इससे जुड़े पांच जिलों के बॉर्डर में 42 विधानसभा सीटें हैं।

यूपी-उत्तराखंड के तराई क्षेत्र के सिख-किसान वोटर की भूमिका सबसे अहम
खेती किसानी के लिए सबसे अहम माने जाने वाला लखीमपुर खीरी जिला किसानों की आय के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। यूपी और उत्तराखंड दोनों ही तराई इलाके में सिख समुदाय के लोग पेशे से खेती करने के साथ-साथ यहां सत्ता के खेल को बनाने और बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। यूपी में तराई बेल्ट के पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं, लखीमपुर खीरी, रामपुर, सीतापुर और बहराइच से गोंडा तक फैला जबकि उत्तराखंड के तराई इलाकों में जसपुर, काशीपुर, रुद्रपुर, किच्छा, गदरपुर, बाजपुर, सितारगंज और नानकमत्ता तक है।

इन छह जिलों के सियासी सूरत पर एक नजर
अब यूपी के मध्य क्षेत्र में आने वाले इस जिले की सियासी सूरत पर भी एक नजर दौड़ा लेते हैं। लखीमपुर खीरी जिले में 8 विधानसभा क्षेत्र हैं- पलिया, निघासन, गोला, श्रीनगर, धौरहरा, लखीमपुर, कसता और मोहम्मदी। 2017 में बीजेपी में इन सभी सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बीजेपी के लिए यह प्रदर्शन इसलिए खास था क्योंकि 2012 के विधानसभा चुनाव में उसे इस जिले की महज एक सीट पर जीत हासिल हुई थी, जब निघासन सीट मौजूदा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के खाते में गई थी।
इसके अलावाा पीलीभीत में कुल 4 विधानसभा क्षेत्र हैं, यहां 2017 में बीजेपी को सभी सीटों पर जीत मिली थी। हरदोई में 2017 के चुनाव में बीजेपी ने यहां की 8 में 7 विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया था। सीतापुर में यूपी के पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जिले की 9 में से 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में पार्टी के खाते में शाहजहांपुर की 6 में से 5 सीटें गई थीं। बात बहराइच की करें तो इस जिले में 7 विधानसभा क्षेत्र हैं, 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां बीजेपी को 6 सीटों पर जीत मिली थी।
इस तरह लखीमपुर खीरी समेत इन 6 जिलों की कुल 42 विधानसभा सीटों में से 2017 में बीजेपी के खाते में 37 सीटें आई थीं। जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खाते में इन 42 सीटों में से महज 5 ही आई थीं (लखीमपुर खीरी से 1, पीलीभीत से 1, हरदोई से 0, सीतापुर से 0, बहराइच से 2, शाहजहांपुर से 1)। ऐसे में साफ है कि बीजेपी को अगर लखीमपुर खीरी हिंसा मामले से सियासी नुकसान हुआ तो उसके पास खोने के लिए बहुत कुछ होगा।

किसानी और जनसंख्या के आंकड़े
-लखीमपुर खीरी में अब आबादी की बात करें तो 2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की कुल आबादी 4021243 थी, जिनमें 3078262 हिंदू थे। उस जनगणना के मुताबिक, यहां सिखों की 94388 आबादी दर्ज की गई। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है। यह जिला लखनऊ मंडल का हिस्सा है और इसका कुल क्षेत्रफल 7680 वर्ग किलोमीटर है। खेती-किसानी इस जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी मानी जाती है।
गेहूं, चावल, मक्का, जौ और दालें यहां की प्रमुख खाद्य फसलें हैं, जबकि गन्ना और तिलहन प्रमुख गैर-खाद्य फसलें हैं। पिछले कुछ वक्त से यहां के किसान मेन्थॉल मिंट की खेती भी करने लगे हैं, क्योंकि तराई क्षेत्र होने के नाते यह इलाका मिंट की खेती के लिए अच्छा माना जाता है।
-ऐसे में पश्चिम यूपी के साथ-साथ तराई में भी बीजेपी के सियासी समीकरण को गड़बड़ा दिया है। यूपी क पीलीभीत में 30000, बरखेड़ा में 28000, पूरनपुर में 40000, बीसलपुर में 15000 पुवायां में 30000, शाहजहांपुर में 15000, बहेड़ी में 35000, बरेली कैंट में 20000, रामपुर 16000, बिलासपुर में 20000, लखीमपुर खीरी में 23000 सिख समाज के वोटर हैं. इसके अलावा बाकी सीटों पर 5 हजार से 15 हजार के बीच है।

पंजाब में आक्रोश, सियासत पर पड़ेगा असर
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले की 9 विधानसभा सीटों में सिख और पंजाबी मतदाता अच्छी संख्या में हैं. इसके अलावा देहरादून और हरिद्वार के इलाके में भी सिख समुदाय काफी अहम है। कृषि क़ानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन की जिस तरह कयादत पंजाब के किसानों ने की है और बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला है, उससे पंजाब के साथ-साथ उत्तराखंड और यूपी के तराई इलाके के सिख और पंजाबी मतदाता भी बीजेपी के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं। सिख बाहुल्य इलाके में घटना लखीमपुर खीरी की घटना की गुंज पंजाब में भी सियासत गरमा गई है और राज्‍य में लोगों में आक्रोश देखने को मिला। राहुल-प्रियंका गांधी के साथ यूपी के पंजाब के सीएम चरनजीत सिंह चन्नी आए।

जरुर पड़ेगा फर्क
वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस मानना है कि, जरुर लखीमपुर हिंसा की वजह से भाजपा पर फर्क पड़ेगा। कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल का रोल यूपी में कर रही है। हिंसा क्षेत्र में किसान, सिख और तराई क्षेत्र में रहने वालों का बड़ा प्रभाव है। इससे यूपी ही नहीं उत्तराखंड और पंजाब तक के किसान आक्रोशित हुए है।

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