गणतंत्र दिवस पर बोलीं मायावती:72 सालों बाद भी अधूरे हैं बाबा साहेब के सपने, संवैधानिक दायित्वों से कांग्रेस-बीजेपी दोनों ने मुंह मोड़ा

लखनऊ4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

BSP की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 73वें गणतंत्र दिवस पर केन्द्र और राज्य की सरकारों को आत्म-चिंतन की सलाह दी है। बसपा प्रमुख ने कहा, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकरर ने न्याय, स्वतंत्रता व समता के जिस गरिमामय 'आइडिया ऑफ इण्डिया' का अनुपम संविधान का मूल बनाया था। वो मानवतावादी महान उद्देश्य भारतीय गणतंत्र के 72 वर्ष के बाद भी काफी आधा-अधूरा है। ऐसा क्यों ? इसके लिए दोष दूसरे को देने के बजाय ईमानदारी से आत्म-चिंतन जरुरी है।

बसपा प्रमुख ने ट्विटर पर लिखा-

बीते साल 'कांग्रेस और बीजेपी को बताया था एक ही थाली के चट्टे-बट्टे'
बीएसपी चीफ ने बीते साल 2021 के गणतंत्र दिवस पर कहा था कि 1950 में देश का संविधान लागू हुआ तबसे लेकर अबतक का देश का इतिहास यह साबित करता है कि यहां पहले चाहे कांग्रेस पार्टी की सरकार रही हो या फिर अब भाजपा की, दोनों ने ही मुख्य तौर पर अपने असली संवैधानिक दायित्वों से काफी हद तक मुंह मोड़ा रखा है। वरना देश अभी तक गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन से इतना ज्यादा पीड़ित और त्रस्त क्यों बना रहता? पूर्व मुख्यमंत्री ने ये भी कहा था 'वैसे तो ये देश बाबा साहेब डॉक्टर आंबेडकर के मानवतावादी संविधान देने के लिए उनका हमेशा ही ऋणी रहा है लेकिन उनके समतामूलक संवैधानिक आदर्शों और सिद्धान्तों पर अमल करने का मामला काफी ढुलमुल ही रहा है। इसके लिए केन्द्र व राज्यों में ज्यादातर रहीं कांग्रेस और भाजपा की सरकारें ही ज्यादा दोषी मानी जाएंगी। ये दोनों ही दल समतामूलक मानवीय समाज व देश बनाने के मामले में जग-जाहिर तौर पर हमेशा एक ही थाली के चट्टे-बट्टे रहे हैं।"