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रालोद के घोषणा पत्र में 22 वादे:लखनऊ में जयंत चौधरी बोले - बिजली का पुराना बिल माफ और आगे का हाफ, 1 करोड़ नौकरी देने का ऐलान

लखनऊ7 महीने पहले

यूपी विधानसभा चुनाव के रण में ताल ठोक रही राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने रविवार को अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है। रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने लखनऊ में दोपहर 12:30 बजे रविंद्रालय हाल में घोषणा पत्र जारी किया। इस दौरान जयंत चौधरी बोले कि नौजवानों को हम 5 सालों में एक करोड़ नौकरी देंगे। कुछ लोगों के मन में यह शंका होगी कि यह होगा कैसे। हम याद दिलाना चाहते है कि योगी सरकार ने 70 लाख की जगह महज साढ़े 4 लाख नौकरी दी गई।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे में सवाल उठना तय है। लेकिन, कृषि उत्पाद को बढ़ाया जाए तो यह संभव है। हम जो बातें बोल रहे हैं उसका दूर तक प्रभाव है। उन्होंने कहा कि लानत है उन सरकारों पर जो युवाओं को बेरोजगार के लिए भटकाती हैं। बिजली को लेकर नारा दिया कि पुराना बिल माफ और आगे का हाफ।

BJP सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि इनके पास कोई मुद्दा नहीं है। ये सड़क पर नमाज पढ़ाने, जिन्ना पर चर्चा करेंगे। रोटी, कपड़ा, मकान, रोजगार के सवाल पर यह बचते हैं। किसानों के लिए कुछ नहीं किया है। गन्ना, आलू किसान सब परेशान हैं। अब उनको एहसास हुआ है कि चुनाव जीतना है तो किसान के लिए कुछ करना है तो कुछ घोषणा कर रहे हैं। लेकिन, हम उनसे ज्यादा करेंगे। हर व्यक्ति हमारे घोषणा पत्र को देखे, चर्चा करें। जरूरत पड़ी तो उसमें भी सुधार करेंगे।

रालोद की ओर से जारी किया गया घोषणा पत्र
रालोद की ओर से जारी किया गया घोषणा पत्र

रालोद के 22 वादे

  • निजी और सरकारी क्षेत्र में 1 करोड़ नौकरियां।
  • किसानों को आलू का डेढ़ गुना ज्यादा दाम दिया जाएगा, आगरा में राज्य आलू अनुसंधान संस्थान और निर्यात प्रोत्साहन केंद्र की स्थापना की जाएगी।
  • गन्ना किसानों को लागत का डेढ़ गुना दिया जाएगा, 14 दिनों में भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
  • केंद्र सरकार की तर्ज पर किसानों को 6 हजार रुपए सालाना दिए जाएंगे। इस तरह किसानों को कुल 12 हजार रुपए प्रति साल मिलेंगे। जबकि असिंचित भूमि वाले किसानों को प्रति वर्ष 15 हजार रुपए दिए जाएंगे।
  • वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली पेंशन राशि को तीन गुना बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा वृद्धावस्था, विकलांगता और वृद्धावस्था विधवा पेंशन को भी तीन गुना बढ़ाया जाएगा।
  • सभी विभागों और सभी स्तरों पर पदों की भर्ती में महिलाओं को 50% आरक्षण।
  • किसानों के लिए नई प्रभावी बीमा योजना तैयार करने का ऐलान।
  • किसानों और बुनकरों की बिजली का बिल माफ किया जाएगा। इसके अलावा आगे आने वाले बिलों को आधा किया जाएगा।
  • पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच की स्थापना की जाएगी।
  • नए कृषि कानूनों के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास किया जाएगा।
  • पुलिस नौकरियों के लिए आवेदन की आयु सीमा 28 साल तक बढ़ाई जाएगी।
  • कांशीराम शहरी श्रम कल्याण योजना के अंतर्गत असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों और कारीगरों को आर्थिक सहायता।
  • उच्च शिक्षा हासिल करने वाले और टॉप 100 यूनिवर्सिटी और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पाने वाले पिछड़े और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों के छात्रों को छात्रवृति।
  • प्रति ग्राम पंचायत में एक स्वास्थ्य मित्र की नियुक्ति, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए जाने वाले भत्ते में वृद्धि।
  • सभी प्रमुख शहरों के लिए 15 वर्षीय इंट्रा-सिटी प्लान तैयार होगा। 2030 तक सभी राज्य बसों को ई-बस में कन्वर्ट किया जाएगा।
  • कृषि, पशुपालन और डेयरी के लिए अलग बजट की व्यवस्था।
  • नई खेल नीति तैयार की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में पदक जीतने के लिए आक्रामक लक्ष्य और रणनीति तैयार होगी।
  • 100 स्टार्ट अप, वैज्ञानिकों को सालाना एक करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। साल 2030 तक सभी सरकारी स्कूलों को कंप्यूटर लैब और इंटरनेट से लैस किया जाएगा।
  • मनरेगा योजना के अनुसार मजदूरी दर को बढ़ाकर 320 रुपए किया जाएगा।
  • कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए मिलेंगे।
  • मुकदमेबाजी को कम करने के लिए 5 सदस्यीय आयोग का गठन।
  • सेना, अर्द्ध-सैनिक बल, पुलिस और अग्निशमन विभाग के शहीदों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपए मिलेंगे।

पश्चिमी यूपी में जयंत तलाश रहे हैं अपनी खोई जमीन

अखिलेश यादव के साथ जयंत चौधरी। फाइल फोटो
अखिलेश यादव के साथ जयंत चौधरी। फाइल फोटो

पिता चौधरी अजित सिंह के स्वर्गवास के बाद पहली बार जयंत के कंधों पर पार्टी की पूरी कमान है। इस लिहाज से यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। इस चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा की क्या वह पश्चिमी यूपी में अपने खोए हुए जनाधार को वापस ला पाएंगे या 2014, 2017, 2019 की तरह उनकी पार्टी को फिर से करारी हार का सामना करना पड़ेगा।

लखनऊ के रविंद्रालय में घोषणा के दौरान लगी कार्यकर्ताओं की भीड़
लखनऊ के रविंद्रालय में घोषणा के दौरान लगी कार्यकर्ताओं की भीड़

दरअसल, किसान आंदोलन के बीच BJP से पश्चिमी यूपी के किसानों और जाटों की नाराजगी का फायदा उठाने के लिए जयंत चौधरी लगातार रथ यात्रा निकाल रहे हैं। खाप पंचायतों का सहारा लेकर वह किसान महापंचायत में शिरकत भी कर रहे हैं। जयंत को उम्मीद है कि किसानों के साथ ही जाट, गुर्जर इस बार रालोद के पाले में आएंगे। जिससे उनका जो पश्चिमी यूपी में खोया जनाधार है वह इस चुनाव में वापस मिल सकता है।

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