लखनऊ हाईकोर्ट की पारा के SHO पर सख्त टिप्पणी:कहा- ऐसा लगता है नाबालिग लड़की की बरामदगी करना उनके बस की बात नहीं

लखनऊएक महीने पहले
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक नाबालिग हिंदू लड़की को 2 मुस्लिम युवकों से न छुड़ा पाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि लड़की की बरामदगी करना पारा SHO दधिबल तिवारी के बस की बात नहीं। वह उसको बरामद करना ही नहीं चाहते।

इसके साथ कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक और लखनऊ के पुलिस कमिश्नर को लड़की को बरामद करने के लिए उचित कदम उठाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने दोनों अफसरों को आदेश दिया है कि लड़की की बरामदगी कर उसे 23 दिसंबर को पेश किया जाए। पुलिस कमिश्नर को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया गया।

मां ने 2 युवकों पर लगाया है अपहरण करने का आरोप

यह आदेश जस्टिस विकास कुंवर श्रीवास्तव की एकल पीठ ने नाबालिग लड़की की मां सीमा मिश्रा की ओर से दाखिल एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर पारित किया। लड़की की मां ने 2 मुस्लिम युवकों वारिस और फरीद पर उसकी बेटी का अपहरण करने और अपने पास रखने का आरोप लगाया है। मां ने मांग की है कि उसकी बेटी को बरामद कर कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया जाए।

कोर्ट में पेश नहीं हुए पारा के SHO

पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने SHO पारा को नाबालिग को पेश करने के आदेश दिए थे। साथ ही उसकी मां को भी कोर्ट में बुलाया था। मां मंगलवार को कोर्ट में आई, लेकिन आदेश के बावजूद SHO नहीं आए। न ही नाबालिग की बरामदगी कर उसे पेश ही किया गया। FIR पर विवेचना कर रहे सब-इंस्पेक्टर अर्जुन सिंह कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने बताया कि नाबालिग की बरामदगी और अभियुक्त वारिस की गिरफ्तारी का पूरा प्रयास किया जा रहा है। लेकिन पुलिस अभी तक उन्हें ट्रेस कर पाने में सफल नहीं हुई है।

इस जवाब पर कोर्ट सख्त हो गई। उसने कहा कि ऐसा लगता है कि अभियुक्त वारिस को ट्रेस करना और नाबालिग को बरामद करना SHO पारा की क्षमता से बाहर है। कोर्ट ने यह भी कहा कि हो सकता है कि SHO बरामदगी करना ही नहीं चाहते।