अखिलेश यादव लड़ेगे विधानसभा चुनाव:2022 के मैदान में उतरेंगे सपा अध्यक्ष, पहली बार किस सीट से लड़ेगे इसका ऐलान इसी सप्ताह होगा

लखनऊ5 महीने पहले

उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव अखिलेश यादव लड़ेगे। पार्टी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 2022 के विधानसभा के चुनावी मैदान में खुद मैदान में उतरेंगे। हालांकि कौन सी विधानसभा से चुनाव मैदान में उतरेंगे इसका एलान जल्द ही हो जाएगा। दैनिक भास्कर से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा था पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत के बाद खुद के चुनाव मैदान में उतरने पर फैसला करुंगा। फिलहाल पहली बार विधानसभा का चुनाव अखिलेश यादव लड़ेगे।

सात दिन पहले दिया था संकेत
दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू के दौरान से जब चुनाव लड़ने पर सवाल किया गया तो उन्होंने दिए संकेत दिए थे।
सवाल: कई बड़े नेता इस बार चुनाव लड़ेंगे या नहीं यह सवाल हर कोई पूछ रहा है। आप चुनाव लड़ेंगे या 403 सीटों पर लड़वाएंगे?
- समाजवादी पार्टी और गठबंधन मिल कर सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करके यह तय कर लेंगे। अगर वो चाहते होंगे तो मैं चुनाव लड़ूंगा। अगर वो चाहते होंगे कि मैं चुनाव लड़ाऊं तो मैं लड़ाऊंगा।

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के मैनपुरी से चुनाव लड़ने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मैनपुरी या करहल विधानसभा सीट से अखिलेश यादव के मैदान में उतरने के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से इसे लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है। यूपी विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण 20 फरवरी को मैनपुरी में मतदान होगा। मैनपुरी सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाती है। लोकसभा चुनाव हों या विधानसभा चुनाव, यहां हर पार्टी को सपा से कड़ी टक्कर मिलती है।

मैनपुरी या आजमगढ़ जिले से लड़ेगे चुनाव
मैनपुरी जिले की चार विधानसभा सीटों में एकमात्र किशनी सीट सुरक्षित श्रेणी की है। इस सीट पर बीते 28 साल से समाजवादी पार्टी का कब्जा है। अन्य सीटों पर भाजपा ने भले ही कभी न कभी जीत हासिल की, लेकिन किशनी में भाजपा कभी नहीं जीत पाई। यहां के मतदाता किसी सियासी लहर में भी प्रभावित नहीं हुए। किशनी विधानसभा सीट का गठन वर्ष 1962 में हुआ था। उस वक्त जिले की करहल सीट सुरक्षित श्रेणी में हुआ करती थी। वर्ष 1993 में पहली बार चुनाव मैदान में उतरी सपा ने इस सीट पर रामेश्वर दयाल बाल्मीकि को लड़ाया था और जीत हासिल की थी। इससे पहले रामेश्वर दयाल बाल्मीकि वर्ष 1989 में जनता दल की टिकट पर और वर्ष 1991 में जेपी की टिकट पर विधायक बन चुके थे। 1993 के चुनाव के बाद सपा दबदबा बरकरार हरा। वर्ष 1996 में सपा से रामेश्वर दयाल बाल्मीकि फिर जीते। वर्ष 2002 और 2007 में सपा प्रत्याशी संध्या कठेरिया ने जीत हासिल की। इसके बाद सपा के ब्रजेश कठेरिया 2012 में जीते। वर्ष 2017 में पूरे प्रदेश में भाजपा की प्रचंड लहर चली, लेकिन यहां उसका असर नहीं पड़ा। बीते चुनाव में सपा के ब्रजेश कठेरिया ने ही जीत हासिल की थी। बीते चुनाव में भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। सुरक्षित होने के बाद भी इस सीट पर बसपा कभी जीत हासिल नहीं कर पाई है। यह भी चर्चा है अपने संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ की गोपालपुर सीट से विधानसभा मैदान में उतर सकते है।