4 PFI मेंबर्स के घर से रिपोर्ट:एक मौलवी, दूसरा लॉ छात्र, तीसरा बढ़ई, चौथा टेलरिंग करता है; पढ़िए यूपी में कैसे फैला है नेटवर्क

लखनऊ2 महीने पहलेलेखक: अनुज शुक्ला

देश में नफरत की पाठशाला चलाने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) यूपी में सिमी के नक्शे कदम पर चल रही है। सिमी पर प्रतिबंध लगने के बाद उसकी बी-पार्टी के रूप में उभरा ये संगठन बहराइच से लेकर सहारनपुर तक अपनी जड़ें फैला चुका है। लखनऊ और NCR को हेड क्वार्टर के तौर पर तैयार किया है।

इस नेटवर्क को समझने से पहले लखनऊ से अरेस्ट वसीम की कहानी पढ़ते हैं...

यही वो मकान है, जहां वसीम रहता है। इंदिरानगर में ज्यादातर लोगों को वसीम का बैकग्राउंड नहीं पता है।
यही वो मकान है, जहां वसीम रहता है। इंदिरानगर में ज्यादातर लोगों को वसीम का बैकग्राउंड नहीं पता है।

PFI का यूपी प्रदेश अध्यक्ष वसीम
NIA के सूत्रों के मुताबिक, वसीम PFI का यूपी प्रदेश अध्यक्ष है। उसने लखनऊ के साथ ही बाराबंकी, बहराइच, गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा में संगठन के नाम पर कई मीटिंग की। इसमें जुड़ने वालों को कट्टरता का पाठ पढ़ाने के साथ धर्म के नाम पर देश में माहौल खराब करने के लिए उकसाया।

लखनऊ की भूतनाथ में है टेलर शॉप, पिता बोला-वसीम का कोई लेना-देना नहीं

ये तस्वीर भूतनाथ मार्केट में वसीम के पिता सलीम की दुकान की है। वसीम के पकड़े जाने के बाद ये दुकान बंद चल रही है।
ये तस्वीर भूतनाथ मार्केट में वसीम के पिता सलीम की दुकान की है। वसीम के पकड़े जाने के बाद ये दुकान बंद चल रही है।

इंदिरानगर A- ब्लॉक में वसीम परिवार के साथ तीन मंजिला मकान में रहता है। यहां उसके चाचा का परिवार भी रहता है। परिजनों के मुताबिक, गुरुवार तड़के NIA की टीम घर पर आई और करीब एक घंटे जांच पड़ताल की। भूतनाथ गांधी मार्केट में वसीम के पिता सलीम की एस. टेलर्स नाम से दुकान है।

सलीम के मुताबिक वो चिनहट मल्हौर में रहते हैं। उन्होंने कहा कि वसीम का मेरी दुकान कुछ लेना-देना नहीं है।

NRC और CAA का विरोध करके नजर में आया वसीम

ये तस्वीर गिरफ्तार हुए वसीम की है। उसकी NRC और CAA विरोध के दौरान भी गिरफ्तारी हो चुकी है।
ये तस्वीर गिरफ्तार हुए वसीम की है। उसकी NRC और CAA विरोध के दौरान भी गिरफ्तारी हो चुकी है।

वसीम की NRC और CAA विरोध प्रदर्शन के चलते गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद से पुलिस और क्षेत्रीय लोगों की नजर में आ गया। इसके बाद से पड़ोसियों ने भी दूरी बढ़ा ली थी। एक परिचित के मुताबिक, उसे करीब आठ साल पहले पाकिस्तान का झंडा लगाने का बयान जारी करने पर गाजीपुर पुलिस ने नजरबंद कर किया था।

कुर्सी रोड से लेकर बक्शी का तालाब तक चल रही टेरर की क्लास
लखनऊ में PFI काकोरी से बक्शी का तालाब, कुर्सी रोड से बाराबंकी तक अपने सदस्य बनाए हैं। बख्शी का तालाब में उनका सेंटर भी चलता मिला था। तीन साल पहले नई दिल्ली में होने वाले एक अधिवेशन में ये पता चला। उस वक्त आगरा एक्सप्रेस वे से 7 बसों से जाते हुए लोगों को पुलिस ने रोका था।

  • लखनऊ के अलावा NIA-ATS ने बहराइच से करीमुद्दीन, बाराबंकी से नदीम और शामली से मौलाना साजिद को हिरासत में लिया गया है। अब आपको इन लोगों के बारे में बताते हैं...

1- आधी रात को बहराइच से करीमुद्दीन को उठाया
जरवल कस्बा बहराइच में आता है। यह बाराबंकी का बॉर्डर है। यहां आधी रात को करीमुद्दीन को घर से सुरक्षा एजेंसियों ने दबोच लिया। छोटी-सी फर्नीचर की दुकान चलाने वाला बढ़ई करीमुद्दीन पांच साल पहले PFI से जुड़ा था। परिवार के लोग भी इसकी पुष्टि करते हैं कि वह संगठन से गरीबों की मदद के नाम पर जुड़ा था। 20 सितंबर को भी PFI की पॉलिटिकल विंग SDPI की सभा हुई थी। इसमें काफी भीड़ उमड़ी थी।

यह करीमुद्दीन है, जिसे गुरुवार को हिरासत में लिया गया है।
यह करीमुद्दीन है, जिसे गुरुवार को हिरासत में लिया गया है।

2- बाराबंकी से लॉ स्टूडेंट्स नदीम को उठाया

बुधवार की रात 3.30 बजे बाराबंकी के कुर्सी थाने के गांव गौरहार में सुरक्षा एजेंसियों की गाड़ियां आकर रुकीं। नदीम के घर की कुंडी खटखटाई। दरवाजा खुलते ही धड़धड़ाते हुए 20-25 लोग घर में घुस गए। घर में सभी के मोबाइल ले लिए गए और नदीम को अपनी हिरासत में ले लिया गया। घर की तलाशी ली। नदीम की मां आबिदा बताती है, "अब तक 10 बार हमारे यहां छापा पड़ चुका है। हर बार पुलिस वाले आते हैं, घर के सामान इधर-उधर करते हैं और चले जाते हैं। इस बार भी नदीम के अलावा उन्हें घर से कुछ नहीं मिला।" नदीम इससे पहले भी CAA विरोधी दंगों में मुख्य आरोपियों में नाम आने के बाद गिरफ्तार हो चुका है।

यह तस्वीर बाराबंकी से हिरासत में लिए गए आरोपी नदीम की है।
यह तस्वीर बाराबंकी से हिरासत में लिए गए आरोपी नदीम की है।

नदीम भी PFI से पांच साल पहले जुड़ा है। पढ़ाई के दौरान ही उसे संगठन में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। वह संगठन का राष्ट्रीय स्तर पर कोषाध्यक्ष का काम देखता है। नदीम सरकार विरोधी धरना-प्रदर्शनों में पहले भी शामिल होता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों की नजर में वह CAA हिंसा के दौरान ही आ गया था। नदीम चार भाई हैं। दो उससे बड़े हैं और एक छोटा भाई है। बड़ा भाई सऊदी अरब में काम करता था। छोटा भाई खेती-किसानी करता है। सबसे छोटा भाई भी पढ़ाई कर रहा है। आरोपी नदीम की शादी हो चुकी है। 11 महीने का बच्चा भी है। जब वह गिरफ्तार हुआ, तो उसकी पत्नी घर में ही थी।

3- शामली के मौलाना साजिद पकड़ा गया

शामली में बुधवार की आधी रात सुरक्षा एजेंसियों के अफसर मामोर गांव पहुंचते हैं। प्रधान के पति मौलाना साजिद का घर खुलवाने के बाद उससे कुछ देर तक पूछताछ की। फिर उसे हिरासत में लिया जाता है। मुस्लिम बाहुल्य मामोर गांव में मौलाना साजिद राजनीति करता है। सूत्रों के मुताबिक, मौलाना पर आरोप है कि वह संगठन के लिए फंडिंग इकट्ठा करता था। साथ ही ब्रेनवॉश का भी काम करता था। मौलाना साजिद 2019 में भी गिरफ्तार हो चुका है। उसके ऊपर दिसंबर 2019 में CAA विरोधी दंगों में आपत्तिजनक पोस्टर बांटने के आरोप लगे थे।

यह आरोपी मौलाना साजिद की तस्वीर है।
यह आरोपी मौलाना साजिद की तस्वीर है।

NIA ने बहराइच से बाराबंकी तक 8 को उठाया
NIA और ATS ने PFI के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद समेत बहराइच जरवल के करीमुद्दीन, बाराबंकी कुर्सी के नदीम, शामली से साजिद, कैराना से सादाब और साजेब और वाराणसी से नदीम को उठाया। इनमें सिर्फ वसीम की गिरफ्तारी दिखाई गई है। बाकी सभी लोगों को लेकर NIA की तरफ से कोई बयान नहीं आया है।

100 करोड़ से ज्यादा की हुई टेरर फंडिंग
ED के सूत्रों के मुताबिक PFI के बैंक खातों में करीब 100 करोड़ से ज्यादा की रकम का लेन-देन हुआ है। जिसको देने वालों के बारे में कोई जानकारी संगठन मुहैया नहीं करा पाया। ये रकम संगठन को हवाला और धर्म के नाम पर दी गई है। इन्हीं जांच रिपोर्ट के आधार पर पिछले दिनों ED ने PFI के 5 सदस्यों के खिलाफ लखनऊ की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट भी दायर की थी। NIA और ATS की जांच में सामने आया है कि ये फंड PFI टेरर फंडिंग में इस्तेमाल कर रहा है। इसके लिए प्रदेश के कई जिलों में सभा करके युवाओं का ब्रेन वॉश करते हैं।

अब आपको लखनऊ का पीएफआई कनेक्शन भी बताते हैं...
लखनऊ से चल रहा पीएफआई मीडिया सेल
काकोरी पुलिस ने अब्दुल मजीद को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि यूपी में राम जन्म भूमि पूजन और आर्टिकल 370 को लेकर धार्मिक उन्माद फैला रहा था। वो संगठन का यूपी मीडिया प्रभारी था। उसके पास कई आपत्तिजनक मैसेज और दस्तावेज मिले थे।
इसके साथ ही RSS दफ्तरों को उड़ाने की धमकी देना वाला PIF सदस्य को 7 जून को तमिलनाडु के पुदुकुदी इलाके से आरोपी राज मोहम्मद को भी लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। वो 2018 से 2021 के बीच पीआईएफ और एसडीपीआई यानी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया का सक्रिय सदस्य रहा था। वह लखनऊ में रहकर यूपी में दंगा भड़काने की साजिश रच रहा था।

अयोध्या कांड के बाद पीएफआई का आया नाम
पीएफआई की स्थापना 16 साल पहले केरल में हुई थी। 1992 में अयोध्या कांड के बाद इसकी सक्रियता बढ़ी। 2001 में 9/11 हमले के बाद भारत में सिमी पर बैन लगने के बाद नवंबर 2006 में इसका आधिकारिक संगठन तैयार हो गया।
यूपी में 2020 हाथरस में युवती से रेप के बाद धार्मिक हिंसा भड़काने में सिद्दीकी कप्पन, जरवल वैराकाजी के मसूद अहमद की गिरफ्तारी हुई।

जो देश में किसी भी घटना को संप्रदायिक बनाने का काम कर रहे थे। वहीं इससे पहले पीएफआई का प्रदेश अध्यक्ष वसीम ने सीएए के विरोध के नाम पर साथियों के साथ पूरे प्रदेश में दंगा फैलाने की कोशिश की थी। जिसमें प्रदेश में 108 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।

प्रदेश सरकार ने 2020 में प्रतिबंध लगाने की थी सिफारिश
यूपी में नागरिक संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदेश के 21 जिलों में हुए हिंसक प्रदर्शनों के पीछे पीएफआई की बड़ी भूमिका सामने आई थी। इसके बाद यूपी सरकार ने 2020 में तत्कालीन डीजीपी ओपी सिंह के प्रस्ताव पर तत्कालीन अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था। यूपी पुलिस ने सीएए आंदोलन के दौरान पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद, कोषाध्यक्ष नदीम अहमद और मंडल अध्यक्ष अशफाक समेत 108 लोगों को गिरफ्तार किया था।